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झारखंड सरकार ने केन्द्र को पत्र लिख कोरोना के टीकों के अपव्यय पर अपने आंकड़े दुरुस्त करने को कहा

By भाषा | Updated: May 28, 2021 19:52 IST

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रांची, 28 मई झारखंड सरकार ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर कोविड-19 के टीकों के कथित अपव्यय पर अपने आंकड़े तत्काल दुरुस्त करने को कहा है क्योंकि केन्द्र सरकार के कोविन ऐप पर अब भी झारखंड में इन टीकों के 38.45 प्रतिशत अपव्यय की बात कही गयी है जबकि इसके उलट राज्य में टीकों का कुल अपव्यय देश के औसत से कहीं कम सिर्फ 4.65 प्रतिशत ही हुआ है।

झारखंड के अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अरुण सिंह ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि बृहस्पतिवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को इस सिलसिले में पत्र लिख कर कहा गया है कि केन्द्र सरकार कोविन ऐप पर अपने आंकड़ों को तुरंत दुरुस्त करे। उन्होंने बताया कि 27 मई की शाम को भी केन्द्र सरकार द्वारा संचालित कोविन ऐप पर झारखंड में देश में टीकों का सर्वाधिक अपव्यय दिखाया गया है और यह आंकड़ा अब बढ़ कर 38.45 प्रतिशत हो गया है।

इससे पूर्व यह मामला तब पूरे देश में चर्चा का विषय बना था जब केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 25 मई को जारी अपने आंकड़ों में झारखंड को टीकों के अपव्यय के मामले में देश में पहले स्थान पर रखा था और यहां कुल 37.3 प्रतिशत टीकों के अपव्यय की बात कही थी जिस पर झारखंड सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे झारखंड की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया था।

सिंह ने बताया कि केन्द्र सरकार को राज्य में टीकों के उपयोग का विस्तृत विवरण भेजा गया है और बताया गया है कि राज्य में टीकाकरण में लगे कुछ लोगों की मानवीय त्रुटि और कुछ तकनीकी कारणों के कारण कोविन ऐप का उचित अद्यतन न होने से ऐप पर आंकड़े सही नहीं प्रदर्शित हो रहे हैं जिन्हें तत्काल दुरुस्त करने की आवश्यकता है।

इससे पूर्व बुधवार को झारखंड सरकार ने दो टूक बता दिया था कि राज्य में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मंगलवार की सूचना के विपरीत सिर्फ 4.65 प्रतिशत ही कोरोना के टीकों का अब तक अपव्यय हुआ है जबकि मंगलवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने झारखंड में देश में सर्वाधिक कुल 37.3 प्रतिशत टीकों के अपव्यय की बात कही थी।

मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी वक्तव्य में भी बुधवार को कहा गया था कि राज्य सरकार के पास अबतक टीके की कुल खुराक की उपलब्धता के अनुसार, वैक्सीन का अपव्यय अनुपात केवल 4.65 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर कहा था, ‘‘तकनीकी कठिनाइयों के कारण टीकाकरण डेटा को केंद्रीय को-विन सर्वर पर पूरी तरह से अपडेट नहीं किया जा सका। इसका अपडेशन प्रक्रिया में है।’’

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने केन्द्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि केन्द्र सरकार टीकाकरण के आंकड़ों में हेरफेर कर झारखंड को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।

दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि इस तरह झारखंड के बारे में गलत आंकड़ों का पेश किया जाना बहुत ही ‘गैरजिम्मेदाराना’ है। सिर्फ कोविन ऐप के आंकड़ों के आधार पर इस तरह का विश्लेषण उचित नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़े जारी करने से पूर्व राज्य के अधिकारियों से इसकी पुष्टि की जा सकती थी।

उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कोविन ऐप पर नवीनतम आंकड़े अपलोड करने की लगातार कोशिश की जाती है लेकिन तकनीकी कारणों से यह कई बार संभव नहीं हो पाता है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने बुधवार को स्पष्ट किया था, ‘‘राज्य सरकार द्वारा जिलों को 48.63 लाख टीके की आपूर्ति की गई है। जिलों द्वारा अबतक 42.07 लाख टीकों का उपयोग किया गया है। जिलों में कुल टीके की कवरेज को देखें तो वह 40.12 लाख है, जबकि अपव्यय का प्रतिशत मात्र 4.63 है जो राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है।

राज्य सरकार के बयान में कहा गया है कि राज्य सरकार टीकों की कम से कम बर्बादी सुनिश्चित करने के लिए यथासंभव उपलब्ध वैक्सीन खुराक का अधिकतम उपयोग करने का प्रयास कर रही है। राज्य के सुदूरवर्ती और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण जागरूकता अभियान के साथ इसे और कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

इससे पहले मंगलवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण की अध्यक्षता में सभी राज्यों के स्वास्थ्य विभाग की डिजिटल बैठक हुई थी जिसमें सभी राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों से विचार विमर्श के बाद यह आंकड़ा जारी किया गया था कि पूरे देश में कोरोना के टीकों का सर्वाधिक अपव्यय झारखंड में हुआ है और बताया गया था कि राज्य में अब तक कुल 37.3 प्रतिशत टीकों का अपव्यय हो चुका है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार टीकों के अपव्यय में दूसरे स्थान पर छत्तीसगढ़ है जहां 30.2 प्रतिशत टीकों का अपव्यय हुआ है। इसके अलावा तमिलनाडु में 15.5 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर में 10.8 प्रतिशत अपव्यय की बात सामने आयी थी।

इस बीच बुधवार सुबह केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना के टीकों की बर्बादी पर सुबह आठ बजे जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि झारखंड में सिर्फ 6.44 प्रतिशत ही टीकों की बर्बादी हुई है।

इससे पूर्व केन्द्र सरकार द्वारा टीकों के अपव्यय पर आंकड़े जारी होने के बाद मंगलवार को ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य सभा सांसद दीपक प्रकाश ने राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते हुए तीखे सवाल दागे थे और पूछा था, ‘‘टीकों की इस बड़े पैमाने पर बर्बादी के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?’’

इस बीच झारखंड सरकार ने शुक्रवार को बताया कि राज्य में कोविड-19 रोधी टीकाकरण के लिए अभी टीके की कुल 879058 खुराक उपलब्ध हैं जिनमें 45 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों के लिए कुल 714538 खुराक और 18 वर्ष से 44 वर्ष तक के नागरिकों के लिए 164520 खुराक उपलब्ध हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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