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बरेली के 300 बिस्तरों के सरकारी अस्पताल में भर्ती का झांसा देकर डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी

By भाषा | Updated: January 30, 2021 17:44 IST

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बरेली (उप्र) 30 जनवरी बरेली के एक सरकारी अस्‍पताल में भर्ती के नाम पर 50 लोगों को झांसा देकर कथित रूप से डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है।

वरिष्‍ठ पुलिस अधीक्षक ने युवकों की शिकायत का संज्ञान लेते हुए इस मामले की जांच के निर्देश दिये हैं।

मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी कार्यालय और जिला महिला अस्पताल में तैनात कथित कुछ लिपिकों (क्लर्कों) द्वारा यहां एक सरकारी अस्पताल में नौकरी देने के नाम पर करीब 50 युवाओं को ठगने का आरोप लगा है।

बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवाण ने बताया कि 50 युवकों ने 300 बिस्तर के अस्पताल में नौकरी के नाम पर तीन -तीन लाख रुपये के ठगी का आरोप बरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बाबू पर लगाया है।

उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच बरेली सदर के क्षेत्राधिकारी (प्रथम) दिलीप कुमार को दी गई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पीलीभीत के थाना सुनगढ़ी के मोहल्ला तोलाराम निवासी सोमेश कश्यप, वजीरगंज बदायूं निवासी महेश कश्यप ,आकाश कश्यप, सिविल लाइंस बरेली निवासी राहुल कश्यप ने अपनी लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि बरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में तैनात एक बाबू से उनकी जान पहचान थी और उसने (बाबू) जिला अस्पताल के तीन अन्य बाबुओं से मिलवाया और वर्ष 2019 में बरेली में खुले 300 बिस्तरों के नये अस्पताल में चपरासी सुपरवाइजर, कंप्यूटर ऑपरेटर, लैब टेक्नीशियन, ड्राइवर, वार्ड आया और वार्ड व्बॉय के संविदा पदों पर भर्ती की जानकारी दी।

युवाओं के अनुसार बाबू ने कहा कि सभी पदों पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी बरेली भर्ती करेंगे और यदि पांच लाख रुपये दोगे तो भर्ती करा देंगे ,इसके बाद उनसे एक आवेदन भरवाए गये और अग्रिम के तौर पर तीन-तीन लाख रुपये लिए गए।

शिकायत के मुताबिक नियुक्ति पत्र मिलने में काफी विलम्ब होने से परेशान युवकों ने जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के कथित बाबू से टोका-टाकी की तो उसने मार्च 2020 में फर्जी नियुक्ति पत्र देना शुरू कर दिया।

आरोप है कि इसके बाद कोविड-19 महामारी का हवाला देते हुए बाबू ने कार्यभार ग्रहण करने का मामला टाल दिया।

शिकायत के मुताबिक कथित बाबू ने ठगी के शिकार युवकों से कहा कि अस्पताल को कोविड-19 मरीजों के लिए आरक्षित कर दिया गया है, इसलिए अभी कार्यभार ग्रहण नहीं होगा।

कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले कम होने के बाद अगस्त 2020 में आवेदकों ने दोबारा दबाव बनाया तो आरोपित ने अगस्त में ही सभी को एक-एक कर जिला अस्पताल बुलाया और मेडिकल कराने के बाद सभी को मेडिकल प्रमाण पत्र भी दिए गए, जिनपर कथित तौर पर चिकित्सालय के अधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर थी।

युवकों के अनुसार सितंबर और अक्टूबर में जब वे नियुक्ति पत्र लेकर अस्पताल पहुंचे तो पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। उन्‍हें बताया गया कि अस्पताल लिए इस तरह की कोई भर्ती की प्रक्रिया नहीं चल रही है। इसके बाद युवकों को ठगी का हुआ और जब वे संबंधित बाबू के पास पहुंचे तो उसने पैसे वापस करने का आश्‍वासन दिया।

शिकायत के मुताबिक नौकरी के नाम पर लिये गये धन को कई माह तक वापस न किये जाने पर युवकों ने पुलिस में शिकायत की।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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