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चीन कर रहा है समझौते का उल्लंघन, भारत-चीन के रिश्ते 'अभी खराब दौर' से गुजर रहे हैं: विदेश मंत्री एस जयशंकर

By अनिल शर्मा | Updated: November 19, 2021 11:57 IST

जयशंकर ने ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमिक फोरम’ में ‘ग्रेटर पावर कॉम्पीटीशन: द इमर्जिंग वर्ल्ड ऑर्डर’ के एक पैनल में भारत-चीन संबंधों पर बोलते हुए कहा कि ‘यह स्पष्ट है कि चीन अपना विस्तार कर रहा है...

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ठळक मुद्देविदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों को खराब दौर से गुजरने की बात कही हैजयशंकर ने सिंगापुर में कहा कि यह स्पष्ट है कि चीन अपना विस्तार कर रहा है

सिंगापुरः विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत और चीन अपने संबंधों में 'विशेष रूप से खराब दौर' से गुजर रहे हैं।  चीन के साथ पूर्वी लद्दाख सीमा संघर्ष के संदर्भ में अपनी बात रखते हुए विदेश मंत्री ने कहा, बीजिंग ने समझौतों के उल्लंघन में कई कार्रवाइयां की है जिसके लिए उसके पास अभी भी "विश्वसनीय स्पष्टीकरण" नहीं है। उन्होंने कहा कि यह चीनी नेतृत्व को जवाब देना है कि वे द्विपक्षीय संबंधों को कहां ले जाना चाहते हैं।

जयशंकर ने ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमिक फोरम’ में ‘ग्रेटर पावर कॉम्पीटीशन: द इमर्जिंग वर्ल्ड ऑर्डर’ के एक पैनल में भारत-चीन संबंधों पर बोलते हुए कहा कि ‘यह स्पष्ट है कि चीन अपना विस्तार कर रहा है, लेकिन चीन की प्रकृति, जिस तरीके से उसका प्रभाव बढ़ रहा है, वह बहुत अलग है और हमारे सामने ऐसी स्थिति नहीं है, जहां चीन अनिवार्य रूप से अमेरिका का स्थान ले ले। चीन और अमेरिका के बारे में सोचना स्वाभाविक है।’

दोनों देशों के संबंधो को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि वह अपने समकक्ष वांग यी से इस बाबत कई बार मिल चुके हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि चीनियों को इस बात पर कोई संदेह है कि हम अपने संबंधों पर कहां खड़े हैं और इसके साथ क्या सही नहीं हुआ है। मैं जिम्मेदारी के साथ काफी स्पष्ट रूप से कह रहा हूं। यदि वे इसे सुनना चाहते हैं, तो मुझे यकीन है कि उन्होंने इसे सुना होगा।'

गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पिछले साल 5 मई को पैंगोंग झील क्षेत्रों में एक हिंसक झड़प के बाद भड़क गया था और दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ भारी हथियारों को लेकर अपनी तैनाती बढ़ा दी थी। वहीं पिछले साल 15 जून को गालवान घाटी में एक घातक झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक वार्ताओं को लंब दौर चला। बातचीत में दोनों पक्षों ने फरवरी में पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे और अगस्त में गोगरा क्षेत्र में विघटन प्रक्रिया पूरी की। 10 अक्टूबर को अंतिम दौर की सैन्य वार्ता गतिरोध के साथ समाप्त हुई।

 

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