लाइव न्यूज़ :

चुनावी बॉन्ड को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, सीजेआई ने कहा- हम इसे सुनेंगे

By विशाल कुमार | Updated: April 5, 2022 13:11 IST

वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के ध्यान में एक खबर लाई जिसमें कहा गया था कि कोलकाता की एक कंपनी ने शराब की दरों को रोकने के लिए चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 40 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। भूषण ने इसे 'लोकतंत्र के साथ खिलवाड़' करार दिया।

Open in App
ठळक मुद्देवकील प्रशांत भूषण की याचिका पर सीजेआई एनवी रमना ने मामले को सूचीबद्ध करने की बात कही।एक कंपनी ने आबकारी दरों को रोकने के लिए 40 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।चुनावी बॉन्ड का उपयोग राजनीतिक दलों को गुमनाम रूप से धन दान करने के लिए किया जाता है।

नई दिल्ली: राजनीतिक दलों को अपारदर्शी तरीके से चंदा देने के लिए लाए गए चुनावी बॉन्ड जारी करने के कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर सीजेआई एनवी रमना ने मामले को सूचीबद्ध करने की बात करते हुए कहा कि हम इस पर सुनवाई करेंगे।

भूषण ने अदालत के ध्यान में एक खबर लाई जिसमें कहा गया था कि कोलकाता की एक कंपनी ने आबकारी दरों को रोकने के लिए चुनावी बॉन्ड के माध्यम से 40 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। भूषण ने इसे 'लोकतंत्र के साथ खिलवाड़' करार दिया।

इसके जवाब में सीजेआई ने कहा कि मैं इस मामले में देखूंगा। अगर कोविड-19 (के लिए) नहीं होता, तो मैंने इस मामले पर सुनवाई किया होता। हमें देखने दीजिए, हम मामले को देखेंगे। हालांकि, इसके बाद भी जब इसे महत्वपूर्ण बताते हुए भूषण ने जोर दिया तो सीजेआई ने कहा कि हां, हम इसे सुनेंगे।

2017 के केंद्रीय बजट में घोषित चुनावी बॉन्ड ब्याज मुक्त बॉन्ड हैं जिनका उपयोग राजनीतिक दलों को गुमनाम रूप से धन दान करने के लिए किया जाता है। चुनावी बॉन्ड खरीदने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं रखता है, और उसे हासिल करने वाले (जो कि राजनीतिक दल हैं) को उसका मालिक माना जाता है।

2017 के बजट भाषण के दौरान पहली बार तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा चुनावी बॉन्ड की घोषणा की गई थी। शुरुआत में, चुनावी बॉन्ड कंपनियों के लिए अपनी पहचान बताए बिना दान करने का एक तरीका बनकर उभरा, लेकिन अब गुमनामी व्यक्तियों, व्यक्तियों के समूहों, गैर सरकारी संगठनों, धार्मिक और अन्य ट्रस्ट तक बढ़ गई है, जिन्हें अपने विवरण का खुलासा किए बिना चुनावी बांड के माध्यम से दान करने की अनुमति है।

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टप्रशांत भूषण
Open in App

संबंधित खबरें

भारतअल्केमिस्ट एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड केस से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन, आखिर कारण

क्राइम अलर्टमालदा में 7 न्यायिक अधिकारी को बनाया बंधक?, बागडोगरा हवाई अड्डे से मुख्य आरोपी अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम अरेस्ट, अब तक 35 अरेस्ट, वीडियो

भारत7 न्यायिक अधिकारी और 9 घंटे तक बंधक?, मतदाता सूची से नाम हटाने पर बवाल, सीजीआई सूर्यकांत ने कहा-रात 2 बजे से निगरानी कर रहा?

भारतहिम्मत कैसे हुई ऐसा करने की?, वादी के पिता ने सीजेआई के भाई को फोन किया, नाराज न्यायाधीश ने कहा- क्या वह मुझे आदेश देंगे?

क्राइम अलर्टगुरुग्राम में 3 साल की बच्ची से बलात्कार?, उच्चतम न्यायालय ने कहा- आयुक्त से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक नाकाम?, कानून का जरा भी सम्मान तो तबादला करो

भारत अधिक खबरें

भारतLPG Cylinder Update: सिलेंडर के लिए अब लंबी वेटिंग खत्म! दिल्ली में बस ID कार्ड दिखाओ और 5KG सिलेंडर पाओ

भारतबाबा विश्वनाथ और ‘काशी कोतवाल’ काल भैरव में दर्शन-पूजन, सीएम योगी आदित्यनाथ पहुंचे मंदिर, वीडियो

भारतपश्चिम बंगाल चुनावः 4660 अतिरिक्त मतदान केंद्र?, कुल संख्या 85379 और 23 और 29 अप्रैल को 2 चरणों में पड़ेंगे वोट

भारतTamil Nadu Election 2026: क्या CBSE का नया सिलेबस भाषा विवाद की जड़? सीएम स्टालिन ने कहा- "भाषा थोपने का सुनियोजित प्रयास"

भारतFire Accident: ONGC मुंबई हाई प्लेटफॉर्म पर भीषण आग, 10 लोग घायल; राहत और बचाव कार्य जारी