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दिल्ली हिंसा: प्रशांत किशोर ने PM मोदी के ट्वीट पर दी प्रतिक्रिया, कहा- सर, अयोग्यता के लिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर को तो..

By अनुराग आनंद | Updated: February 26, 2020 17:00 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने शांति व भाई चारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा था कि पुलिस व बाकी एजेंसियां काम कर रहा हैं। इसी ट्वीट पर प्रशांत किशोर ने प्रतिक्रिया दी है।

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ठळक मुद्देदिल्ली हिंसा पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा कि मैं दिल्लीवासियों से शांति की अपील करता हूं।दिल्ली में एक और 1984 जैसे दंगे को नहीं होने देंगे",  हिंसा पर दिल्ली हाई कोर्ट ने की टिप्पणी

दिल्ली में हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया है। अपने ट्वीट में प्रशांत किशोर ने लिखा है कि सर, कम-से-कम इस अयोग्यता व अपराधिक लापरवाही के लिए दिल्ली पुलिस के कमिश्नर  को  तो हटाइए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने शांति व भाई चारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा था कि पुलिस व बाकी एजेंसियां काम कर रहा हैं। 

नरेंद्र मोदी ने चुप्पी तोड़ते हुए क्या कहा-

दिल्ली हिंसा पर पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है। पीएम ने ट्वीट कर कहा कि मैं दिल्लीवासियों से शांति की अपील करता हूं। हमारे संस्कार के मूल में शांति, सौहार्द है, मैं दिल्ली के बहनों, भाइयों से शांति और भाईचारा बनाये रखने की अपील करता हूं।

दिल्ली में हिंसा की घटनाओं के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को लोगों से शांति एवं भाईचारा बनाये रखने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा की है। मोदी ने यह भी कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि जल्दी शांति एवं सामान्य स्थिति बहाल हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘ दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में वर्तमान हालात की गहन समीक्षा की। पुलिस एवं अन्य एजेंसियां सामान्य स्थिति सुनिश्चित करने के लिये काम कर रही हैं ।’’ मोदी ने कहा, ‘‘ हमारे संस्कार के मूल में शांति, सौहार्द है। मैं दिल्ली के बहनों, भाइयों से शांति और भाईचारा बनाये रखने की अपील करता हूं।’’

गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) का समर्थन करने वाले और विरोध करने वाले समूहों के बीच संघर्ष ने साम्प्रदायिक रंग ले लिया था। उपद्रवियों ने कई घरों, दुकानों तथा वाहनों में आग लगा दी और एक-दूसरे पर पथराव किया। इन घटनाओं में बुधवार तक कम से कम 20 लोगों की जान चली गई और करीब 200 लोग घायल हो गए।

"दिल्ली में एक और 1984 जैसे दंगे को नहीं होने देंगे",  हिंसा पर दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली में जारी हिंसा को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रूप अख्तियार किया है। अपनी टिप्पणी में कोर्ट ने साफ किया कि दिल्ली में एक और 1984 जैसी दंगा को शहर में नहीं होने देंगे। दिल्ली हिंसा मामले में हाई कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू हो गई है। हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली में दूसरे '1984' को नहीं होने देंगे। 1984 में सिख दंगा हुआ था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाया और बीजेपी नेताओं का वीडियो देखा गया।

दिल्ली हिंसा पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी पर केंद्र सरकार के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि डीसीपी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं,  एक कांस्टेबल की जान भी जा चुकी है। पुलिस अधिकारी के सिर में चोट लगी है और वह वेंटिलेटर पर है। ऐसे में प्रशासन व सरकार क्या कदम उठा रही है?

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को शहर का दौरा करनी चाहिए। कोर्ट ने प्रभावित लोगों के मुआवजे को लेकर भी सरकार की तरफ से पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिए हैं। 

सुप्रीम कोर्ट भी सरकार को दिल्ली हिंसा मामले में लगा चुकी है फटकार-

सुप्रीम कोर्ट ने आज (26 फरवरी) नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शन पर सुनवाई को टाल दिया है। इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में जारी हिंसा को लेकर भी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हिंसा पर पुलिस को सही समय पर कार्रवाई नहीं करने के लिए कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कहा है कभी-कभी आउट ऑफ द बॉक्स एक्शन लेना पड़ता है। कोर्ट ने कहा, दिल्ली पुलिस को ब्रिटिश पुलिस को देखना चाहिए...वह कैसे काम करती है।

अमेरिका और ब्रिटेन पुलिस की तरह पेश आए दिल्ली पुलिस-

न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ ने कहा कि पुलिस ने पेशेवर रवैया नहीं अपनाया। उन्होंने अमेरिका और ब्रिटेन में पुलिस का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कुछ गलत होता है कि पुलिस को कानून के अनुसार पेशेवर तरीके से काम करना होता है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर उकसाने वाले लोगों को पुलिस बच कर निकलने नहीं देती तो यह सब नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी ने भड़काउ भाषण दिया था तो उसपर उसी वक्त क्यों नहीं एक्शन लिया गया? उत्तरपूर्वी दिल्ली में सीएए को लेकर साम्प्रदायिक हिंसा में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर बुधवार को 20 हो गई। 

टॅग्स :दिल्ली हिंसाजाफराबाद हिंसादिल्लीनरेंद्र मोदीप्रशांत किशोरनागरिकता संशोधन कानून1984 सिख विरोधी दंगेहाई कोर्ट
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