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दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है दिल्ली, प्रदूषण के कारण लोगों के जीवन हो रहे हैं 11.9 साल कम, शोध में खुलासा

By आजाद खान | Updated: August 30, 2023 08:21 IST

स्टडी की अगर माने तो भारत की 67.4 फीसदी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जो देश की अपनी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 40 μg/m3 से अधिक हैं।

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ठळक मुद्देहाल ही में दिल्ली को लेकर एक नई स्टडी सामने आई है। इसमें दिल्ली को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया है। यह नहीं दावा यह भी किया गया है कि प्रदूषण के कारण लोगों के जीवन 11.9 साल कम हो रहे है।

नई दिल्ली:  हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह पता चला है कि दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। यही नहीं अध्ययन में यह भी पाया गया है कि अगर दिल्ली में वर्तमान प्रदूषण के स्तर में बने रहते हैं तो इसके निवासियों के जीवन से औसतन 11.9 साल कम हो जाएंगे।

स्टडी में यह भी खुलासा हुआ है कि भारत की 67.4 फीसदी आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जो देश की अपनी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 40 μg/m3 से अधिक हैं। यही नहीं इस शोध में दिल्ली के वायु गुणवत्ता को लेकर कई और खुलासे हुए है। 

स्टडी में क्या खुलासे हुए है

बता दें कि यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान द्वारा जारी वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक (AQLI) ने यह खुलासा किया है कि भारत के 1.3 बिलियन (13 करोड़)लोगों में से सभी ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां वार्षिक औसत कण प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित 5 μg/m3 सीमा से अधिक है।

इस अध्ययन में यह भी खुलासा हुआ है कि महीन कण वायु प्रदूषण (PM2.5) औसत भारतीयों के जीवन को 5.3 साल कम कर देता है। शोध के अनुसार, दिल्ली दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर है, अगर वर्तमान प्रदूषण के स्तर इसे तरह से बने रहते हैं तो इसके 18 मिलियन (1.8 करोड़) निवासियों के जीवन एक्सपेंटेंसी औसतन WHO सीमा के सापेक्ष 11.9 साल और राष्ट्रीय दिशानिर्देश के सापेक्ष 8.5 साल कम हो जाएंगे।

खतरे में है दिल्ली!

अर्थशास्त्र में मिल्टन फ्रीडमैन प्रतिष्ठित सेवा प्रोफेसर और AQLI के निर्माता माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि "वैश्विक जीवन एक्सपेंटेंसी पर वायु प्रदूषण के प्रभाव का तीन-चौथाई हिस्सा केवल छह देशों - बांग्लादेश, भारत, पाकिस्तान, चीन, नाइजीरिया और इंडोनेशिया में होता है, जहां एक से अधिक लोग छह साल की उम्र में अपनी जान गंवाते हैं क्योंकि वे सांस लेते हैं।"

स्टडी के अनुसार, 'इस क्षेत्र के सबसे कम प्रदूषित जिले -पंजाब के पठानकोट में भी कण प्रदूषण WHO की सीमा से सात गुना अधिक है, जो वर्तमान स्तरों के बने रहने पर जीवन एक्सपेंटेंसी को 3.1 साल कम कर देगा।' शोध की अगर माने तो दिल्ली एक बहुत प्रदूषित शहर है और इसके निवासियों को वायु प्रदूषण के कारण जीवन एक्सपेंटेंसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खोने का जोखिम है।  

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