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Covid-19: अनलॉक पर विशेषज्ञों की नसीहत- 5% संक्रमण दर के बाद ही दें छूट, 70% बुजुर्गों का टीकाकरण जरूरी

By नितिन अग्रवाल | Updated: June 2, 2021 07:49 IST

भारत में कोरोना के मामले अब तेजी से घटने लगे हैं। ऐसे में कई राज्यों में पाबंदियों में ढील भी दी जा रही है। ऐसे में आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने अनलॉक करने की प्रक्रिया को लेकर सरकारों को सचेत किया है।

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ठळक मुद्देआईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने अनलॉक को लेकर दी नसीहतबलराम भार्गव ने कहा कि 5 प्रतिशत से कम संक्रमण दर के बाद ही दी जाए छूटअनलॉक मे भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन जरूरी

नई दिल्ली: भारत में कोविड-19 की लड़ाई की अगुवाई कर रहे विशेषज्ञों ने कहा है कि अनलॉक करते हुए राज्यों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने राज्यों को नसीहत दी है कि 60 साल से अधिक आयु वाले लगभग 70 प्रतिशत बुजुर्गों को टीके लगाने के बाद ही अनलॉक किया जाए।

आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि अनलॉक तभी किया जाए जब बुजुर्गों के अतिरिक्त 45 साल से अधिक आयु वाले गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले कम से कम 70% को टीके लगा दी जाए। 

अनलॉक के बाद संक्रमण में थोड़ी बढ़ोतरी की आशंका जताते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए पहले से तैयार रहना बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य सेवाओं के मौजूदा स्वरूप को अनलॉक में भी कायम रखा जा सकता है। अनलॉक केवल उन स्थानों पर ही किया जाए जहां संक्रमण दर लगातार 7 दिन तक 5 प्रतिशत से कम हो।

अनलॉक में भी मास्क और सुरक्षित दूरी के नियमों में फिलहाल ढील नहीं देने की नसीहत देते हुए कहा कि टीकाकरण के अतिरिक्त कोविड प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन करना जरूरी होगा।

345 जिलों में संक्रमण दर 5 प्रतिशत से कम

डॉ भार्गव ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण तेजी से कम हो रहा है। अब 239 से कम जिलों में संक्रमण दर 10 प्रतिशत से अधिक है जबकि अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ऐसे जिलों की संख्या 600 थी। वहीं 145 जिलों में 5 से 10 प्रतिशत के बीच, 345 जिलों में यह दर 5 प्रतिशत से भी कम हो चुकी है। 

वहीं टीकों को लेकर गांव में हो रहे प्रतिरोध पर डॉ भार्गव ने कहा कि पहले शहरों में ऐसी हिचकिचाहट थी लेकिन अब उतावलापन है। लोग टीका लगवाने  के लिए दौड़ रहे हैं। गांव में वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट देखी गई है। हमें इस उतावलेपन और हिचकिचाहट के बीच सामंजस्य बनाना है। उसके लिए समुदायों को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करना होगा। इसके अलावा समाज के प्रभावशाली राजनेताओं, धर्मगुरुओं और बुजुर्गों को समझाना होगा। हमें उनके सामने सही तथ्य रखने होंगे।

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