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Coronavirus: ओडिशा CM पटनायक ने मोदी से कहा-देशभर में फंसे लोगों की वापसी लिए तैयार की जाए एसओपी

By भाषा | Updated: April 27, 2020 20:52 IST

कोविड-19 पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सरकार के मुख्य प्रवक्ता सुब्रतो बागची ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में पटनायक ने देशभर में जारी लॉकडाउन के कारण अपने घरों से दूर देशभर में फंसे छात्रों, कर्मचारियों, तीर्थयात्रियों, मरीजों और पेशवरों का मुद्दा उठाया।

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ठळक मुद्देPM नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए से मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई CM पटनायक ने ओडिशा में धीरे-धीरे कोविड-19 की जांच बढ़ाने के लिए कदम उठाने की भी मांग की।

भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह देशभर में फंसे लाखों लोगों की सुचारू आवाजाही के लिए राष्ट्रीय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाने की सोमवार को अपील की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से बुलायी गयी मुख्यमंत्रियों की बैठक में पटनायक ने यह प्रस्ताव रखा।

कोविड-19 पर राज्य सरकार के मुख्य प्रवक्ता सुब्रतो बागची ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में पटनायक ने देशभर में जारी लॉकडाउन के कारण अपने घरों से दूर देशभर में फंसे छात्रों, कर्मचारियों, तीर्थयात्रियों, मरीजों और पेशवरों का मुद्दा उठाया। पटनायक ने प्रधानमंत्री से फंसे हुए लोगों की सुचारू आवाजाही के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया।

ऐसे तंत्र से जगह-जगह पर फंसे लोगों की व्यवस्थित और अनुशासित आवाजाही सुनिश्चित होगी। अधिकारी ने बताया कि एक राज्य से दूसरे राज्य में निर्बाध आवाजाही संभव होने से लोग बिना किसी परेशानी के, अपने गृह निवास पहुंच पाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार के एक अनुमान के अनुसार ओडिशा के करीब पांच लाख प्रवासी मजदूर देशभर में फंसे हैं।

पटनायक उड़िया कर्मियों की सुरक्षित वापसी के संदर्भ में गुजरात और महाराष्ट्र सरकार से भी बात कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस में पटनायक ने ओडिशा में धीरे-धीरे कोविड-19 की जांच बढ़ाने के लिए कदम उठाने की भी मांग की। प्रवक्ता ने बताया कि ओडिशा में मार्च में कोविड-19 की जांच का केवल एक केन्द्र था जबकि अब राज्य में आठ केन्द्र हैं। रोजाना पहले जहां 250 से 300 लोगों की जांच की जाती थी, वहीं अब रोजाना 2,500 नमूनों की जांच होती है। 

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