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खून जमा देनेवाली ठंड में भी तेजी से किया जा रहा 'जोजिला टनल' का निर्माण कार्य, जमें बर्फ के बीच डटे हैं 1100 मजदूर

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: December 19, 2022 15:57 IST

मेगा इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) के वरिष्ठ प्रबंधक बुरहान अंद्राबी ने कहा कि सुरंग के निर्माण और कनेक्टिंग रोड के काम को पूरा करने के लिए छह साल की समय सीमा तय की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, यह उम्मीद की जा रही है कि लद्दाख और कश्मीर की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सुरंग की प्रमुख भूमिका होगी।

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ठळक मुद्देयह टनल एशिया की सबसे लंबी सुरंग भी होगी।तापमान के 10 से 13 डिग्री नीचे चले जाने के कारण बर्फ जम गया है।यह टनल समुद्र तल से 3528 मीटर की ऊंचाई पर है।

जम्मूः तापमान में अप्रत्याशित गिरावट के बावजूद जम्मू कश्मीर को लद्दाख से जोड़ने वाली जोजिला टनल का निर्माण कार्य जोरों पर है। यह टनल एशिया की सबसे लंबी सुरंग भी होगी। इसके पूरा होने के बाद सुरंग एशिया की सबसे लंबी और अपने अस्तित्व में ऐतिहासिक होगी।  अधिकारियों ने बताया कि टनल और एप्रोच रोड का निर्माण एक साथ किया जाना है। अनुमान है कि सुरंग से लगभग 33 मिलियन मीट्रिक टन मलबा हटाया जाएगा।

मेगा इंजीनियरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमईआईएल) के वरिष्ठ प्रबंधक बुरहान अंद्राबी ने कहा कि सुरंग के निर्माण और कनेक्टिंग रोड के काम को पूरा करने के लिए छह साल की समय सीमा तय की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, यह उम्मीद की जा रही है कि लद्दाख और कश्मीर की आर्थिक स्थिति को सुधारने में सुरंग की प्रमुख भूमिका होगी।

प्रबंधक ने पत्रकारों के साथ बात करते हुए कहा कि मीनमर्ग और बालटाल दोनों ओर से खुदाई का काम चल रहा था और अब तक उन्होंने 5 किमी से अधिक का काम पूरा कर लिया है। उन्होंने कहा कि यूटी में बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के बावजूद निर्माण कार्य प्रभावित नहीं हुआ है।

उन्होंने आगे कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल निर्माण कार्य जारी रखने के लिए बेहतर तैयारी की गई है। समुद्र तल से 3528 मीटर की ऊंचाई पर, जोजिला पास मार्ग से जुड़ी दो अन्य सुरंगों, नीलग्रार ए 1 और ए 2 पर भी काम तेजी से किया जा रहा है।

तापमान के माइनस 10 से 13 डिग्री चले जाने के कारण बर्फ जम गया है। हालांकि निर्माण कार्य नहीं रोका गया है। बुरहान ने बताया कि परियोजना में तीन सुरंगें, चार पुल, एक बर्फ आश्रय, एक क्लॉर्ट, एक कैच बांध, एक विक्षेपक बांध और एक कट और कवर सुरंग शामिल है।

वर्तमान में परियोजना पर 1100 श्रमिक काम कर रहे थे, जिनमें से लगभग 70 प्रतिशत स्थानीय लोग थे। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यह सुरंग रक्षा की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है।

गौरतलब है कि जोजिला टनल के निर्माण की लद्दाख के लोगों की लंबे समय से मांग थी। उन्होंने कहा कि इस सुरंग के बनने से न केवल श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर यात्रा सुरक्षित और आरामदायक होगी, बल्कि समय की भी काफी बचत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मई 2018 में सुरंग की आधारशिला रखी थी और कहा था कि जोजिला सुरंग सिर्फ एक सुरंग नहीं है बल्कि आधुनिक समय का आश्चर्य है।

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