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सिख विरोधी दंगे: 1984 के दंगों के मामले में कांग्रेस के जगदीश टाइटलर पर सीबीआई ने हत्या का आरोप लगाया

By रुस्तम राणा | Updated: August 5, 2023 16:47 IST

सीबीआई ने कहा, "टाइटलर ने भीड़ को सिखों को मारने के लिए उकसाया, जिसके परिणामस्वरूप भीड़ ने गुरुद्वारा पुल बंगश को आग लगा दी और 1 नवंबर 1984 को सिख समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी।"

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ठळक मुद्देकेंद्रीय जांच ब्यूरो ने शनिवार को आरोप-पत्र में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर पर हत्या का आरोप लगायाआरोप-पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस नेता ने दिल्ली में गुरुद्वारा पुल बंगश के पास सिखों को मारने के लिए भीड़ को उकसाया थाइस मामले में अदालत ने टाइटलर का जमानती बांड को स्वीकार किया

नई दिल्ली: 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने शनिवार को आरोप-पत्र में कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर पर हत्या का आरोप लगाया है। आरोप-पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस नेता ने दिल्ली में गुरुद्वारा पुल बंगश के पास सिखों को मारने के लिए भीड़ को उकसाया था। सीबीआई ने कहा, "टाइटलर ने भीड़ को सिखों को मारने के लिए उकसाया, जिसके परिणामस्वरूप भीड़ ने गुरुद्वारा पुल बंगश को आग लगा दी और 1 नवंबर 1984 को सिख समुदाय के तीन लोगों की हत्या कर दी।" गुरुद्वारा पुल बंगश और ठाकुर सिंह और बादल सिंह की हत्या कर दी गई।

सीबीआई के आरोप पत्र में एक गवाह के हवाले से कहा गया है कि उसने कांग्रेस नेता को अपनी कार से बाहर निकलते और भीड़ को उकसाते हुए देखा था। इसके अलावा आरोप पत्र में एक अन्य गवाह का उल्लेख है जिसने एक भीड़ को पेट्रोल कनस्तर, लाठियाँ, तलवारें और छड़ें ले जाते देखा था। उन्होंने कहा, जगदीश टाइटलर, जो उस समय संसद सदस्य थे, भी गुरुद्वारा पुल बंगश के सामने मौजूद थे, उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता भीड़ को गुरुद्वारे पर हमला करने के लिए उकसा रहे थे।

वहीं दिल्ली की एक अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान पुल बंगश में हुई हत्याओं से संबंधित मामले में टाइटलर का जमानती बांड शनिवार को स्वीकार कर लिया। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट विधि गुप्ता आनंद ने कहा कि आरोपी को पहले ही एक सत्र अदालत से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को टाइटलर को आरोप पत्र की एक प्रति प्रदान करने का निर्देश भी दिया। 

कांग्रेस नेता टाइटलर कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश हुए। उनकी पत्नी जेनिफर टाइटर उनकी जमानतदार बनीं। अदालत ने जेनिफर की पहचान और वित्तीय स्थिति का सत्यापन किया। साथ ही यह देखने के बाद कि वह आर्थिक रूप से सक्षम थीं, उन्हें जमानतदार के रूप में स्वीकार कर लिया। 

मजिस्ट्रेट ने कहा, "जमानत बांड प्रस्तुत किया गया है। जमानत आदेश में लगाई गई शर्तों के अधीन इसे स्वीकार किया जाता है।" मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। सत्र अदालत ने शुक्रवार को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत प्रतिभूति पर टाइटलर को राहत दे दी थी। 

अदालत ने कांग्रेस नेता पर कुछ शर्तें भी लगाई थीं, जिनमें यह भी शामिल है कि वह मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे या बिना अनुमति के देश से बाहर नहीं जाएंगे। मजिस्ट्रेट अदालत ने 26 जुलाई को टाइटलर से कहा था कि वह पांच अगस्त को उसके समक्ष पेश हों। 

अदालत ने मामले में दाखिल आरोप पत्र पर संज्ञान लेने के बाद आदेश पारित किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या किए जाने के एक दिन बाद 1 नवंबर, 1984 को यहां पुल बंगश क्षेत्र में तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी और एक गुरुद्वारे में आग लगा दी गई थी।

 

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