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कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजीव गांधी के हत्यारों को रिहा किये जाने का किया विरोध, कहा- "निर्णय अस्वीकार्य और पूरी तरह से गलत है"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: November 11, 2022 15:24 IST

कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है, जिसमें देश की सर्वोच्च अदालत ने राजीव गांधी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे 6 कैदियों की रिहाई का हुक्म दिया है।

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ठळक मुद्देकांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजीव हत्याकांड में उम्रकैद काट रहे 6 कैदियों की रिहाई पर जताया अफसोसकांग्रेस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजीव गांधी के हत्यारों को मुक्त करने का फैसला अस्वीकार्य हैकांग्रेस ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने भारत की भावना के अनुरूप काम नहीं किया

दिल्ली:कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर तीखा आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने 21 मई 1991 को हुई पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा को भुगत रहे 6 दोषियों को रिहा किये जाने का आदेश दिया है।

कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने प्रेसवार्ता करते हुए कांग्रेस पार्टी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना करते हुए कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के अन्य हत्यारों को मुक्त करने का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अस्वीकार्य और पूरी तरह से गलत है। कांग्रेस इसकी आलोचना करती है और इसे पूरी तरह से अक्षम्य मानती है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने भारत की भावना के अनुरूप काम नहीं किया है।"

सुप्रीम कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद देश के सबसे चर्चित हत्याकांड में से एक रहे राजीव गांधी हत्याकांड में एतिहासिक आदेश देते हुए 6 उम्रकैद के दोषियों को मामले में एक अन्य दोषी एजी पेरारिवलन को दी गई रिहाई के आधार पर एस नलिनी, जयकुमार, आरपी रविचंद्रन, रॉबर्ट पियास, सुथेंद्रराजा और श्रीहरन को भी रिहा करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दोषियों की रिहाई के मामले में सुनवाई करते हुए उस दलील को स्वीकर किया, जिसमें तमिलनाडु कैबिनेट ने 9 सितंबर, 2018 को राजीव हत्याकांड में सजा काट रहे दोषियों रिहाई की सिफारिश की थी और राज्य सरकार का कहना था कैबिनेट का यह फैसला राज्यपाल के लिए बाध्यकारी है। जिनके समक्ष दोषियों ने माफी याचिका दायर की थी।

इसके अलावा कोर्ट ने दोषियों का जेल में आचरण अच्छा पाया जाना और साथ में कुछ कैदियों द्वारा जेल में कैद रहते हुए शैक्षिक डिग्रियों के पाये जाने पर भी गौर करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश पारित किया है।

मालूम हो कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए 18 मई को एक अन्य दोषी पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश दिया था। पेरारिवलन ने 30 साल से अधिक जेल की सजा पूरी कर ली थी।

श्रीलंकाई एलटीटीई समर्थकों द्वारा 21 मई 1991 की रात तमिलनाडु के श्रीपेरुंबदूर में एक चुनावी सभा के दौरान बम विस्फोट करके राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। लिट्टे ने इस जघन्य कार्य के लिए धानु नाम की आत्मघाती महिला हमलावर का इस्तेमाल किया था। जिसने राजीव को चंदन की माला पहनाने के बहाने कमर में बंधे बम का विस्फोट करके उनकी जान ले ली थी।

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