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कोयला घोटाला: पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता को 3 साल जेल की सजा, पूर्व संयुक्त सचिव और GIL के निदेशक को भी जेल

By भाषा | Updated: August 8, 2022 12:24 IST

इस बीच, अदालत ने दोषी कंपनी ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (जीआईएल) के निदेशक मुकेश गुप्ता को आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के जुर्म में चार साल की जेल की सजा सुनाई तथा उन पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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ठळक मुद्देमामले में कोयला मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव के एस क्रोफा को भी दो साल की सजा हुई। दोषी कंपनी ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक को भी चार साल जेल की सजा सुनाई गई।एचसी गुप्ता को इससे पहले कोयला घोटाले के मामले में दोषी ठहराया गया था।

नयी दिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता को तीन साल की जेल की सजा सुनाई है। मामला महाराष्ट्र में एक कोयला खदान के आवंटन में अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। मामले की जानकारी रखने वाले एक वकील ने बताया कि विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने मामले में कोयला मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव के एस क्रोफा को भी दो साल की सजा सुनाई है और उन पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। एचसी गुप्ता पर भी एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

 दोषी कंपनी ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक को भी चार साल जेल

अदालत ने लोहारा ईस्ट कोयला खदान के आवंटन से जुड़े मामले में दोनों को आपराधिक षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी करने और भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया था। इस बीच, अदालत ने दोषी कंपनी ग्रेस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (जीआईएल) के निदेशक मुकेश गुप्ता को आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के जुर्म में चार साल की जेल की सजा सुनाई तथा उन पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। वहीं, कंपनी को भी अलग से दो लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया है।

एचसी गुप्ता को इससे पहले कोयला घोटाले के मामले में दोषी ठहराया गया था

एच सी गुप्ता को इससे पहले कोयला घोटाले के तीन अन्य मामलों में भी दोषी ठहराया गया था। इन मामलों में गुप्ता की ओर से सजा के खिलाफ दाखिल याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है। गुप्ता अभी जेल में हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अनुसार, 2005 से 2011 के बीच आरोपियों ने भारत सरकार के खिलाफ आपराधिक साजिश रची थी। सीबीआई ने यह भी कहा कि कंपनी ने अपने आवेदन में कुल आय 120 करोड़ रुपये होने का दावा किया था, जबकि उसकी कुल आय 3.3 करोड़ रुपये थी। उच्चतम न्यायालय ने 25 अगस्त 2014 को कोयला खदानों के सभी आवंटन रद्द कर दिए थे।

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