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नागरिकता विधेयक विधेयक पर सुलग रहा है असम, बीजेपी नेता हिमंत सरमा ने कहा- प्रदेश पर नहीं पड़ेगा प्रतिकूल असर

By भाषा | Updated: December 13, 2019 05:48 IST

पूर्वोत्तर में भाजपा मुख्य रणनीतिकार सरमा ने कहा कि विधेयक के खिलाफ कुछ नाराजगी दिख रही है लेकिन उन्होंने विधेयक को ऐतिहासिक करार देते हुए विश्वास जताया कि इससे असम पर दीर्घकालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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ठळक मुद्देअसम नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर उबल रहा है। राज्य के मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर लोगों की आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि इससे राज्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

असम नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर उबल रहा है। इस बीच राज्य के मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर लोगों की आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि इससे राज्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा और असम समझौते का उपबंध छह लागू करने से ‘राजनीतिक स्थिरता’ की नयी उम्मीद जगेगी। उल्लेखनीय है कि राज्यसभा में विधेयक के पारित होने पर असम और त्रिपुरा सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। हजारों लोग कर्फ्यू का उल्लंघन कर नागरिकता विधेयक के खिलाफ सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की ओर से की गई गोलीबारी में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है।

पूर्वोत्तर में भाजपा मुख्य रणनीतिकार सरमा ने कहा कि विधेयक के खिलाफ कुछ नाराजगी दिख रही है लेकिन उन्होंने विधेयक को ऐतिहासिक करार देते हुए विश्वास जताया कि इससे असम पर दीर्घकालिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। असम के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के घरों पर पथराव की भी खबरें आई हैं।

सरमा ने कहा, ‘‘ यह विधेयक धार्मिक आधार पर सताने की वजह से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए शरणार्थियों को नागरिकता देने में मदद करेगा। निश्चित तौर पर इससे असम में कुछ नाराजगी है लेकिन मुझे विश्वास है कि इस विधेयक का प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।’’’

उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने असम समझौते के उपबंध छह को लागू करने का वादा किया है जिससे राज्य में राजनीतिक स्थिरता के लिए नया रास्ता बनने की उम्मीद है। सरमा ने कहा, ‘‘गृह मंत्री अमित शाह द्वारा असम समझौते के उपबंध छह को लागू करने के वादे से असम में राजनीतिक स्थिरता की नयी उम्मीद जगेगी। इसलिए मेरा मानना है कि इसके दीर्घकालिक राजनीतिक प्रतिकूल असर नहीं होंगे।’’

उल्लेखनीय है कि असम समझौते पर 1985 में हस्ताक्षर किए गए थे। इसपर ऑल असम स्टुडेंट्स यूनियन (आसू), असम सरकार और केंद्र ने हस्ताक्षर किए थे। आसू के नेतृत्व में छह साल तक चले असम आंदोलन में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने की मांग की गई थी।

राज्यसभा से विधेयक पारित होने के वक्त संसद में मौजूद रहे सरमा ने कहा, ‘‘यह ध्यान दिलाना महत्वपूर्ण है कि बुधवार को राज्यसभा में वोटिंग में पूर्वोत्तर के सभी क्षेत्रीय दलों ने विधेयक के पक्ष में वोट किया। अटकलें थीं कि राजग से जुड़े पूर्वोत्तर के दल पक्ष में वोट शायद नहीं करेंगे। लेकिन अंत में सिर्फ राजग से जुड़े दलों ने ही नहीं बल्कि संप्रग के साथ आधिकारिक तौर पर जुड़े एनपीएफ ने भी विधेयक के पक्ष में वोट दिया।’’ भाजपा नेतृत्व वाले पूर्वोत्तर जनतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) के संयोजक सरमा ने कहा कि आने वाले समय में विधेयक से पार्टी को मदद मिलेगी। 

टॅग्स :नागरिकता संशोधन बिल 2019असमभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
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