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नौ वर्षीय बालिका के कथित बलात्कार, हत्या मामले में चार व्यक्तियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल

By भाषा | Updated: August 28, 2021 22:52 IST

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दिल्ली पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में दिल्ली छावनी इलाके में नौ साल की एक बच्ची के कथित बलात्कार और हत्या के मामले में श्मशान के पुजारी और तीन अन्य के खिलाफ शनिवार को यहां की एक अदालत में आरोपपत्र दायर किया। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि आरोपपत्र दाखिल किया जाना दिखाता है कि महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित करने के वास्ते तेजी कार्रवाई करने के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार प्रतिबद्ध है। चार सौ पृष्ठों की अंतिम रिपोर्ट में दक्षिण-पश्चिम जिले के श्मशान के 55 वर्षीय पुजारी राधेश्याम और उसके कर्मचारियों-कुलदीप सिंह, सलीम अहमद और लक्ष्मी नारायण को यह दावा करते हुए आरोपी बनाया गया है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य थे। चारों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 304, 376 (डी), 342, 506, 201 और 34 के तहत आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही चारों के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम की धारा छह और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कानून की धारा तीन के तहत भी आरोप लगाये गए हैं। सभी आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। रिपोर्ट ड्यूटी मजिस्ट्रेट मनु श्री के समक्ष दायर की गई जिसे उन्होंने 31 अगस्त को संबंधित अदालत के विचारार्थ रख लिया। मामले को गत पांच अगस्त को दिल्ली पुलिस की अपराधा शाखा को सौंपा गया था। अंतिम रिपोर्ट में उस विशेष जांच दल की एक रिपोर्ट भी शामिल की गई है जिसका गठन अपराध शाखा द्वारा त्वरित और पेशेवर जांच के लिए किया गया था।पुलिस ने कहा, ‘‘जांच के दौरान, प्रासंगिक गवाहों की गवाही दर्ज करने के अलावा, वैज्ञानिक, तकनीकी और अन्य साक्ष्य एकत्र किए गए और उनका विश्लेषण किया गया। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, रोहिणी के साथ-साथ दिल्ली पुलिस के फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ऑन बायोलॉजी एंड ओडोन्टोलॉजी से भी सहायता ली गई।’’पुलिस ने कहा कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान फोरेंसिक मनोवैज्ञानिकों को भी शामिल किया गया था और एक रिपोर्ट को अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया गया है। दिल्ली पुलिस ने बच्ची की मां के बयान के आधार पर एक मामला दर्ज किया था जिसने आरोप लगाया था कि उसकी बेटी के साथ बलात्कार और उसकी हत्या की गई और बाद में एक अगस्त को परिवार की सहमति के बिना उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह ने तेजी से जांच पूरी करने और 30 दिन के भीतर आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया ताकि मृतका के परिवार वालों को जल्दी न्याय मिल सके। बयान में कहा गया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 30 दिन के भीतर आरोपपत्र दाखिल किया गया। बयान में कहा गया, “दिल्ली पुलिस द्वारा आरोपपत्र दाखिल करने से महिलाओं और लड़कियों के विरुद्ध अपराध करने वालों के प्रति नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की प्रतिबद्धता और कतई बर्दाश्न न करने की नीति का पता चलता है। अपराधियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कार्य किया गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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