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बीजेपी की राह चली बीएसपी, मायावती ने खेला ये दांव

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: December 15, 2017 12:54 IST

बसपा सुप्रीमो मायावती 2019 के चुनाव के लिए भाजपा की रणनीति को अपना कर नए वोटरों को रिझाने की कोशिश में जुटी हैं।

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उत्तर प्रदेश में हुए निकाय चुनाव के बाद यहां की राजनीति काफी गरमा गई है। चुनाव में भाजपा की जीत के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती भी अब बीजेपी की राह पर चलने लगी हैं। मेरठ नगर निकाय चुनाव में नवनिर्वाचित मेयर सुनीता वर्मा ने हाल ही में राष्ट्रगीत वंदे मातरम का अपमान किया था। जिसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें लखनऊ बुलाकर जमकर फटकार लगाई। मायवती के इस एक्शन पर कई राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। 

असल में शपथ ग्रहण समारोह के दौरान बसपा मेयर सुनीता वर्मा वन्दे मातरम बजने पर भी बैठी रही थीं, जबकि उन्हें शपथ दिलवाने वाले मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार भी खड़े हो गए थे। मेयर सुनीता वर्मा के राष्ट्रगीत केअपमान से बसपा सुप्रीमो मायावती भी खफा हो गई और उन्हें इनमें बचाव में उतरना पड़ा। विवाद के बाद मायवती ने यह बयान जारी किया था कि उनकी पार्टी राष्ट्रीय प्रतीक, राष्ट्रगान और वन्दे मातरम का सम्मान करती हैं। 

इस बयान पर राजनीतिकों का कहना है कि बसपा सुप्रीमो मायावती 2019 के चुनाव के लिए नए वोटरों को रिझाने का काम कर रही हैं। खबरों की मानें तो वन्दे मातरम के बहाने जिस तरह भाजपा हिन्दू वोटरों को ध्रुवीकृत करने की कोशिश करती रही है। इस बात को देखते हुए बसपा को भी इसका अंदाजा लग गया है कि इतने बड़े वोटर बैंक को नजरअंदाज कर उसकी आने वाले 2019 की चुनाव में राह आसन नहीं होगी। इसी को मद्देनजर रखते हुए वन्दे मातरम पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए बसपा ने जहां नए संभावित वोटरों को लुभाने की कोशिश की है तो साथ ही यह संकेत भी दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह भारतीय जनता पार्टी से चुनावी गठबंधन भी कर सकती हैं।

बसपा खुले तौर पर भले ही भाजपा को अपना सबसे बड़ा विरोधी पार्टी मानती हो लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वन्दे मातरम के विवाद पर अपना मत रखते हुए मायावती दलित राजनीति के साथ ही अन्य जातियों को अपने पाले में करने के लिए भाजपा का अनुसरण कर सकती हैं। 

मायावती की फटकार के बाद मेरठ की मेयर सुनीता वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि बवाल की वजह से काफी शोर हो रहा था और उन्हें वन्दे मातरम की आवाज नहीं सुनाई दी। मेयर ने यह भी कहा है कि उनकी पार्टी के सभी नेताओं के लिए बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष का निर्देश सबसे ऊपर है। इस फटकार के बाद मेयर के तेवर अब काफी बदले दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद चर्चाएं तो यही है कि वन्दे मातरम और देशभक्ति की पिच पर अब बसपा भाजपा को चुनौती देने के साथ-साथ भविष्य में उसके साथ किसी तरह के समझौते करने के लिए भी तैयार हो सकती है। 

टॅग्स :मायावती
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