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चुनाव में करारी हार के बाद लालू परिवार में एकजुटता की संकट, बेटियां दूर और तेजस्वी यादव का एकक्षत्र राज?

By एस पी सिन्हा | Updated: November 17, 2025 16:42 IST

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने एक्स पर लिखा कि “क्या लालू जी और राबड़ी देवी को कैद कर लिया गया है? जान पर खतरा? रोहिणी जी को प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए, तेजप्रताप साथ जाएं… मीसा क्यों चुप हैं?”

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ठळक मुद्देस्वार्थ होगा तब दो दिन प्यार दिखाएगा, काम निकलते ही अपनी औकात दिखा देगा। गंदी गालियां दी गईं और यहां तक कि मारने के लिए चप्पल उठाई गई।बेइज्जती झेलनी पड़ी और भावुक होकर वह घर छोड़कर चली गईं।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव में राजद मात्र 25 सीटों पर सिमट कर रह गई है। इसके बाद लालू यादव के परिवार में चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार देर रात लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर अपने दर्द को सोशल मीडिया पर शेयर किया और बिना नाम लिए परिवार के भीतर मौजूद एक ‘जहरीले इंसान’ पर हमला बोला। रोहिणी आचार्य ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि परिवार में एक ऐसा जहरीला इंसान जरूर होता है, जिसे आप कितनी भी इज्जत दे दो, वह कभी आपका सम्मान नहीं करेगा। वह बेचारा बनकर उल्टे आप पर इल्जाम लगाता रहेगा। जब उसे स्वार्थ होगा तब दो दिन प्यार दिखाएगा, काम निकलते ही अपनी औकात दिखा देगा। 

हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे तेजस्वी यादव और उनके करीबी समूह पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है। इस से पहले रोहिणी एक्स पर भी भावुक होकर परिवार और राजनीति से दूरी बनाने की बात कह चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें गंदी गालियां दी गईं और यहां तक कि मारने के लिए चप्पल उठाई गई।

रोहिणी का कहना है कि आत्मसम्मान से समझौता करने से इनकार करने की वजह से उन्हें बेइज्जती झेलनी पड़ी और भावुक होकर वह घर छोड़कर चली गईं। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने एक्स पर लिखा कि “क्या लालू जी और राबड़ी देवी को कैद कर लिया गया है? जान पर खतरा? रोहिणी जी को प्राथमिकी दर्ज करनी चाहिए, तेजप्रताप साथ जाएं… मीसा क्यों चुप हैं?”

उनकी यह प्रतिक्रिया रोहिणी के उन आरोपों के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके साथ बदसलूकी और मारपीट तक की गई। उधर, चुनाव परिणाम के बाद से ही तेजस्वी यादव की ओर से कोई बयान नहीं दिया गया है। ना ही राजद प्रमुख लालू यादव ने कोई आधिकारिक बयान दिया है।

लेकिन चौंकाने वाली बात है कि हार और पारिवारिक कलह के बाद भी लालू यादव अपनी डेली रुटीन को बाकायदा फॉलो कर रहे हैं। लालू सुबह सुबह कार से सैर पर निकलते हैं और शाम में अपनी रथ पर सवार होकर जेपी गंगा पथ की ओर भी सैर करने निकलते हैं। उल्लेखनीय है कि चुनाव में मिली करारी हार के दो दिन बाद अचानक लालू परिवार की परिवारिक कलह सड़क पर आ गई।

खबरों की सुर्खियों में लालू परिवार में टूट की खबरों ने जगह बना ली। यह सब तब हुआ जब रोहिणी आचार्य ने शनिवार दोपहर एक ट्वीट किया। रोहिणी आचार्य के आरोप के बाद लालू परिवार पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ मीडिया चैनलों ने यहां तक की खबरें चलाई की लालू यादव को परिवार में नजरबंद कर रखा गया है।

वहीं इन सभी अफवाहों के बीच आज जो वीडियो सामने आई वो सवाल के रुख को कई दिशा में मोड़ रही है। वीडियो सोमवार सुबह की है, जिसमें लालू यादव अपने डेली रूटीन के तहत सैर कर वापस राबड़ी आवास में जा रहे हैं। राबड़ी आवास के बाहर मौजूद मीडियाकर्मियों ने देखा कि कार में लालू यादव मौजूद थे।

ऐसे में राजनीतिक जानकारों की मानें तो ये साफ है कि तमाम विवादों के बाद भी लालू परिवार का आंतरिक माहौल शांत है, परिवार के सदस्य अपनी दैनिक कार्य में जुटे हैं। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या लालू परिवार का यह विवाद सोशल मीडिया और मीडिया तक ही सिमट है इसकी आंच परिवार में नहीं है।

कहीं इस विवाद को सामने राजद की बड़ी हार को छिपाने के लिए तो नहीं किया गया है? क्या लालू परिवार का यह विवाद इतनी बड़ी हार से ध्यान हटाने के लिए है? क्या लालू यादव की मौजूदगी में हुई इस विवाद के बाद भी लालू पुत्र मोह में ही हैं? क्या लालू यादव पर जो धृतराष्ट्र होने का आरोप लगाया जा रहा है वो सही है?

क्या पुत्र मोह में लालू अपनी उस बेटी को भी नाकार देंगे जिनसे किडनी देकर उन्हें जीवनदान दी है? सवाल तो ये भी खड़े हो रहे हैं कि क्या लालू परिवार के सदस्य तेजस्वी यादव के परम मित्र संजय यादव और रेमिज को दूर करने के लिए ऐसा माहौल बना रहे हैं? तेजस्वी और संजय यादव की नजदीकी परिवार के लोगों को पसंद नहीं आ रही है?

इन सवालों से भी किनारा नहीं किया जा सकता है। वहीं रोहिणी की बाद रविवार को देर रात लालू यादव की तीन और बेटियां घर छोड़कर जा चुकी हैं। बता दें कि तेजस्वी यादव के परम मित्र को लेकर लालू परिवार में शुरू से ही विवाद था। संजय यादव को लेकर मीसा भारती, तेज प्रताप यादव पहले से ही मोर्चा खोल चुके थे।

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