पटनाः पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास पर कानूनी शिकंजा कस सकता है। दरअसल, उनपर यह आरोप है कि रिटायरमेंट के बाद भी वे अपने निजी लेटर पैड पर भारत सरकार का प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ और आईपीएस पदनाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि यदि ऐसा किया जा रहा है तो यह भारत का राज्य प्रतीक (अनुचित उपयोग निषेध) अधिनियम 2005 के तहत दंडनीय हो सकता है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है। बता दें कि 2018 में राज्य सरकार ने उन्हें अयोग्य मानते हुए कम्पल्सरी रिटायर कर दिया था।
इसके बाद से वे अक्सर सरकार की नीतियों और फैसलों की खुलकर आलोचना करते रहे हैं। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि सेवा के दौरान उन्होंने अपना एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) वरिष्ठ अधिकारियों से नहीं लिखवाया, क्योंकि वे उन पर भरोसा नहीं करते थे। अभी हाल ही में अमिताभ दास ने नीट से जुड़े एक मामले में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार गलत लोगों को संरक्षण दे रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। हालांकि उनके विरोधियों का कहना है कि वे लगातार विवादित बयान देकर चर्चा में बने रहना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि अमिताभ दास पर पहले भी कुछ गंभीर आरोप लग चुके हैं।
साल 2006 में एक महिला ने उन पर शादी का झूठा वादा कर लंबे समय तक यौन शोषण करने का आरोप लगाया था। उस समय वे जमुई में बीएमपी-11 के कमांडेंट पद पर तैनात थे। यह मामला काफी चर्चा में रहा था। इसके अलावा देवघर में एसपी रहते हुए भी उन पर एक विदेशी महिला से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था।
इन मामलों को लेकर अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। लेकिन अब अपने निजी लेटर पैड पर भारत सरकार का प्रतीक चिन्ह अशोक स्तंभ और आईपीएस पदनाम का इस्तेमाल करने के गंभीर मामलों पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवई की जा सकती है।