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सीट पर झझट, 70 नहीं 76 चाहिए?, कांग्रेस आलाकमान ने प्रत्याशी किए तय, किसी दिन घोषणा, सदाकत आश्रम में चुनाव समिति की बैठक

By एस पी सिन्हा | Updated: September 19, 2025 17:01 IST

Bihar Assembly Elections: गुरुवार को पटना के सदाकत आश्रम में हुई चुनाव समिति की बैठक में 76 सीटों पर चर्चा हुई, जहां से उम्मीदवार उतारे जाना करीब-करीब तय है।

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ठळक मुद्देकई सीटों पर उम्मीदवार भी तय कर दिए जाने की चर्चा है।कांग्रेस नेता लगातार बैठक और दौरा कर रहे हैं।बिहार कांग्रेस ने 76 सीटों पर तैयारी शुरू कर दी है।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में तो दो-दो मोर्चों पर खटपट है। एक तो मुख्यमंत्री के चेहरे पर अब तक राजद को कांग्रेस का साथ नहीं मिला है, जबकि सीटों के तालमेल को लेकर भी तनातनी की स्थिति सामने आने लगी है। अब कांग्रेस की नई चाल से तेजस्वी यादव और लालू यादव की टेंशन बढ़ जा सकती है। दरअसल, कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसको लेकर गुरुवार को पटना के सदाकत आश्रम में हुई चुनाव समिति की बैठक में 76 सीटों पर चर्चा हुई, जहां से उम्मीदवार उतारे जाना करीब-करीब तय है।

इसके साथ ही कई सीटों पर उम्मीदवार भी तय कर दिए जाने की चर्चा है। बताया जाता है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने प्रस्ताव दिया कि चुनाव समिति के सदस्य हाथ उठाकर करें। जिसके बाद सदस्यों ने इस पर मुहर लगा दी। इसतरह कांग्रेस में बिहार में अपनी स्थिति मजबूत करने की मुहिम खोल दी है। कांग्रेस नेता लगातार बैठक और दौरा कर रहे हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार बिहार कांग्रेस ने 76 सीटों पर तैयारी शुरू कर दी है। इनमें से 38 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान जल्द किया जाएगा। खास बात यह है कि कांग्रेस इसके लिए राजद की हरी झंडी का इंतजार नहीं करेगी। बता दें कि, चुनाव से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर खींचतान तेज हो गई है।

कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि तेजस्वी यादव को फिलहाल मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया जाएगा, बल्कि इसका फैसला जनता करेगी। पार्टी के इस रुख से राजद की नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। उधर, कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ से बिहार में उसका जनाधार मजबूत हुआ है।

इसी वजह से पार्टी अब सीटों के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री पद की भी मांग कर रही है। इधर, कांग्रेस की इस बढ़ती सक्रियता के बीच तेजस्वी यादव ‘बिहार अधिकार यात्रा’ पर निकल पड़े हैं, जिसे कांग्रेस की रणनीति का जवाब माना जा रहा है। कांग्रेस चाहती है कि सीट बंटवारे में ‘अच्छी’ और ‘खराब’ सीटों का संतुलन हो।

कांग्रेस सूत्रों की मानें तो कुटुंबा विधानसभा सीट को लेकर राजद और कांग्रेस में तकरार है। पूर्व मंत्री सुरेश पासवान का चेहरा राजद ने कुटुंबा विधानसभा सीट से आगे किया है। राजद के रवैये से कांग्रेस में नाराजगी है। कांग्रेस ने माना जानबूझकर सुरेश पासवान को आगे किया जा रहा है। जबकि सात बार से कुटुंबा विधानसभा सीट पर राजेश राम और उनके पिता का दबदबा रहा है।

ऐसे में कांग्रेस के लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस राजद की मोहताज नहीं। सूत्रों को कहना है कि राजद कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र को लेकर प्रेशर पॉलिटिक्स कर रही है। राजेश राम को उपमुख्यमंत्री का चेहरा सामने नहीं लाने को लेकर पॉलिटिक्स हो रही है। बदली हुई और बेहतर परिस्थितियों में कांग्रेस इस बार विधानसभा चुनाव लड़ रही है।

इसके साथ ही 2020 में जीती गई 19 सीटें और वे सीटें जहां पार्टी 5 हजार वोटों से हारी थी उसे मिलनी चाहिए। कुल मिलाकर कांग्रेस इस बार भी करीब 76 सीटों पर दावा ठोक रही है। राजद की बात करें तो राजद 2020 में 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 75 सीट जीती था। अब भी करीब 90 सीटों पर राजद की पकड़ अच्छी है।

वहीं, सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा के बाद 76 सीटों को सेलेक्ट कर लिया है। माना जा रहा है कि 24 सितंबर को पहलीबार पटना में होने वाली कांग्रेस वर्किंग कमेटी(सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। पटना में सीडब्ल्यूसी की बैठक का होना इस बात का संकेत है कि राहुल गांधी कांग्रेस को अपने पैरों पर खड़ा करना चाहते हैं।

इस बैठक से साफ़ है कि कांग्रेस इसबार सीट शेयरिंग में कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। सियासत के जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी ने पहले यात्रा कर राजद पर दबाव बनाया और अब सीडब्ल्यूसी की बैठक पटना में कराने का फैसला लेकर ये साफ कर दिया है कि कांग्रेस किसी भी कीमत पर अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाना चाहती है।

दरअसल, कांग्रेस राहुल गांधी की मतदाता अधिकार यात्रा से उत्साहित है। राहुल गांधी की यात्रा में जिस तरह से भीड़ उमड़ी, उससे कांग्रेस को लग रहा है कि उसकी पकड़ मजबूत हुई है। यही वजह है कि कांग्रेस अभी अपनी ताकत दिखा रही है। वह यह बताना चाहती है कि वह राजद की पिछलग्गू पार्टी नहीं है।

हालांकि, दोनों खेमों का कहना है कि अभी सीट शेयरिंग पर बातचीत जारी है। हालांकि कांग्रेस की इस चाल से राजद में खलबली है। इससे पहले तेजस्वी यादव ने कहा था कि वे सभी 243 सीटों पर लड़ सकते हैं। मगर अब कांग्रेस ने अधिक सीटें मांग कर मामले को और उलझा दिया है।

इधर राजद खेमे का कहना है कि कांग्रेस को 70 सीटों पर ही संतोष करना होगा। राजद पिछली बार से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं है। इसकी वजह है कि 2020 में कांग्रेस ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा तो था मगर सीटें केवल 19 ही जीत पाई थी।

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