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बिहार विधानसभा चुनाव: वीआरएस ले चुके डीजीपी पांडेय, गुप्त रखी है राजनीतिक पारी, नीतीश कुमार के पढ़े कसीदे

By स्वाति सिंह | Updated: September 23, 2020 20:37 IST

गुप्तेश्वर पांडेय पहले भी चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे चुके हैं. साल 2009 में भी उन्होंने वीआरएस लेकर लोकसभा चुनाव लडना चाहते थे. इस्तीफे के नौ महीने बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने बिहार सरकार से इस्तीफा वापस लेकर नौकरी करने की गुहार लगाई.

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ठळक मुद्देबिहार पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने वीआरएस लेकर सूबे की सियासत को गर्मा दिया है. गुप्तेश्वर पांडेय ने भले ही वीआरएस ले लिया हो, लेकिन चुनावी राजनीति को लेकर उन्होंने अपना पता नहीं खोला

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने वीआरएस लेकर सूबे की सियासत को गर्मा दिया है. हालांकि, उन्होंने कहा है कि ''मैं अभी तक किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुआ हूं और मैंने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है. गुप्तेश्वर पांडेय ने भले ही वीआरएस ले लिया हो, लेकिन चुनावी राजनीति को लेकर उन्होंने अपना पता नहीं खोला. गुप्तेश्वर पांडेय ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया है कि वह चुनाव लड़ने जा रहे हैं या नहीं.

पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय से जब यह सवाल किया गया कि क्या वह चुनाव लड़ने जा रहे हैं तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि अभी उन्होंने इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है. जहां तक सामाजिक कार्यों का सवाल है, मैं इसे राजनीति में प्रवेश किये बिना भी कर सकता हूं.'' वहीं, उन्होंने सोशल मीडिया के प्लेटफार्म फेसबुक, ट्विटर और यू-ट्यूब पर 23 सितंबर की शाम को छह बजे लाइव हुए. गुप्तेश्वर पांडेय फरवरी 2021 में सेवानिवृत्त होनेवाले थे. 1987 बैच के आईपीएस गुप्तेश्वर पांडेय के चुनावी मैदान में उतरने की संभावना जताई जा रही है. यहां बता दें कि गुप्तेश्वर पांडेय पहले भी चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे चुके हैं. साल 2009 में भी उन्होंने वीआरएस लेकर लोकसभा चुनाव लडना चाहते थे. इस्तीफे के नौ महीने बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने बिहार सरकार से इस्तीफा वापस लेकर नौकरी करने की गुहार लगाई. तत्कालीन नीतीश सरकार ने अर्जी को स्वीकार करते हुए इस्तीफा वापस कर दिया. इसके बाद वह फिर नौकरी में वापस आ गये. उस समय वह आईजी थे. साल 2019 में बिहार के डीजीपी का प्रभार ग्रहण करने के बाद अब एक बार फिर 2020 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है.

वीआरएस के बाद पहली बार दिलाई जंगलराज की याद

पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने वीआरएस के बाद पहली बार बिहार में जंगलराज की याद लोगों को दिलाई है. उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों को और को नहीं भूलना चाहिए. जब यहां एके-47 के दम पर अपराधियों का बोलबाला था बिहार में पिछले 15 साल के अंदर बहुत कुछ बदला है और आज यहां रामराज्य वाली स्थिति है. गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि उन्होंने लोगों के सवालों से उठकर वीआरएस लेने का फैसला किया हर दिन उन्हें हजारों फोन आते थे कि क्या उन्होंने वीआरएस ले लिया है. हर दिन लोगों के सवालों का जवाब देना मुश्किल था. इसलिए उन्होंने खुद वीआरएस लेने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस की सेवा पूरे निष्ठा के साथ की है और आगे जिस क्षेत्र में भी काम करेंगे निष्ठा बनी रहेगी. वीआरएस लेने के बाद गुप्तेश्वर पांडे ने जिस तरह नीतीश सरकार के कसीदे पढ़े हैं वह इस बात का संकेत है कि वह अपनी राजनीतिक पारी खेलने को तैयार हैं. 

गुप्तेश्वर पांडे ने सुशांत सिंह राजपूत के को लेकर उन पर उठ रहे सवालों पर भी खुलकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह राजपूत मामले में जो कुछ हुआ वह बिहारी अस्मिता से जुडा सवाल था. बिहार पुलिस के ऊपर जब सवाल उठे तो खुलकर सामने आ गए. उन्होंने कहा कि वह विधानसभा का चुनाव लडेंगे या लोकसभा का, यह बात उन्होंने कभी नहीं कहीं. उन्होंने किसी राजनीतिक दल को अभी तक ज्वाइन नहीं किया है. वह अपने समर्थकों चाहने वालों और जनता से पहले राय मशविरा करेंगे. उसके बाद ही आगे का कोई फैसला करेंगे. उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि समाज सेवा के लिए राजनीति में ही आ जाए. लेकिन उसके बावजूद उनके शुभचिंतक चाहेंगे, वह उसी रास्ते पर चलेंगे.

वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट से लड़ सकते हैं उपचुनाव 

गुप्तेश्वर पांडेय ने यह जरूर कहा कि बक्सर के लोग चाहते हैं कि वह चुनाव लड़ें और बेगूसराय में भी उनके चाहने वालों की लंबी ज्यादा है. उन्होंने यह भी कहा कि वाल्मीकि नगर सीट से भी उन पर चुनाव लड़ने के लिए आग्रह आ रहा है. वाल्मीकिनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव होना है और यह भी कयास लगाया जा रहा है कि गुप्तेश्वर पांडे वहां से चुनाव लड सकते हैं.

उन्होंने आज नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की जो इस बात का संकेत है कि वह जदयू का ही दामन थामेंगे. उनके बयानों को लेकर कयास लगाया जाने लगा था कि गुप्तेश्वर पांडेय बिहार की सियासत में दांव आजमायेंगे. लेकिन, सेवानिवृत्ति से पांच माह पहले नौकरी छोड कर राजनीति में आने की सुगबुगाहट भी नहीं थी.

सुशांत सिंह राजपूत के निधन को लेकर शिवसेना पर किया प्रहार 

गुप्तेश्वर पांडे ने शिवसेना पर भी आज खुलकर प्रहार किया. अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बिहार पुलिस को महाराष्ट्र भेजने और महाराष्ट्र की शिवसेना सरकार द्वारा बिहार सरकार पर हमले किये जाने के बाद नीतीश सरकार के बचाव में खुले तौर पर उतर आये.

यहां उल्लेखनीय है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा था, ''सुशांत बिहार का बेटा था. रहस्मय ढंग से मौत हुई. मौत होने के बाद उसकी जांच हुई, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला और उसको आत्महत्या का मामला घोषित कर दिया गया. 14 जून की घटना 21 जून तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. इधर, सुशांत के बूढे पिता एक-डेढ महीने के बाद हमारे पास आये और साजिश की आशंका जताई है. उन्होंने पूरी कहानी बतायी. उनके बयान के आधार पर बिहार में मुकदमा दर्ज किया गया और फिर बिहार पुलिस की टीम मुंबई गई. मुंबई जाने पर बिहार पुलिस की टीम के साथ क्या हुआ सबको पता है.''

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