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अर्नब ने गिरफ्तारी को अदालत में चुनौती दी, अंतरिम जमानत याचिका पर कल सुनवाई

By भाषा | Updated: November 5, 2020 21:42 IST

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मुम्बई, पांच नवम्बर बंबई उच्च न्यायालय आत्महत्या के लिए कथित तौर पर उकसाने के मामले में गिरफ्तार किये गये ‘रिपब्लिक टीवी’ के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत संबंधी अर्जी पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा। यह मामला 2018 का है।

गोस्वामी को आर्किटेक्ट एवं इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक को आत्महत्या के लिए कथित रूप से उकसाने के मामले में मुम्बई के लोअर परेल स्थित उनके घर से बुधवार को गिरफ्तार किया गया था और पड़ोसी रायगढ़ जिले के अलीबाग थाने ले जाया गया था।

उन्हें अलीबाग की एक अदालत में पेश किया गया था जिसने उन्हें 18 नवम्बर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराए गए विस्तृत आदेश के अनुसार अदालत ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी पहली नजर में गैर कानूनी प्रतीत होती है।

पुलिस ने बृहस्पतिवार को अलीबाग सत्र अदालत के समक्ष एक संशोधित आवेदन दायर किया है जिसमें एक दिन पूर्व वहां मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई है।

गोस्वामी ने अपनी गिरफ्तारी को ‘‘गैरकानूनी’’ बताते हुए बंबई उच्च न्यायालय में इसके खिलाफ एक याचिका दायर की। उन्होंने जांच पर रोक लगाने, पुलिस को उन्हें रिहा करने और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का निर्देश देने अनुरोध किया है।

न्यायमूर्ति एस.एस. शिंदे और न्यायमूर्ति एम.एस. कार्णिक की एक खंडपीठ ने गोस्वामी को इस मामले की शिकायतकर्ता अन्वय नाइक की विधवा अक्षता नाइक को प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया।

पीठ ने कहा, ‘‘मांगी गयी अंतरिम राहत पर विचार करने से पहले हमें सभी संबंधित पक्षों को सुनना होगा। हमें शिकायतकर्ता की भी बात सुननी होगी क्योंकि मृतक के परिवार ने जांच को स्थानांतरित करने की याचिका दायर की है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘ प्रतिवादी (महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता) जवाब देने के हकदार हैं... हम मांगी गयी अंतरिम राहत पर कल गौर करेंगे।’’

गोस्वामी के वकील आबाद पोंडा ने कहा कि अलीबाग की अदालत में दिया गया जमानत आवेदन वापस ले लिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘ मजिस्ट्रेट ने यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि कब जमानत आवेदन पर सुनवाई होगी और उन्होंने इस पर सुनवाई में भी कठिनाई प्रकट की क्योंकि यह मामला सत्र अदालत के क्षेत्राधिकार में है।’’

पोंडा ने कहा, ‘‘इसलिए हम यहां उच्च न्यायालय में अंतरिम जमानत का अनुरोध कर रहे हैं।’’

गोस्वामी की ओर पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने दलील दी कि यदि उनके मुवक्किल को रिहा कर दिया जाता है तो अभियोजन को कोई नुकसान नहीं होगा।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि वह प्रतिवादियों को दलील पेश करने का मौका दिये बगैर जमानत के मुद्दे पर विचार नहीं कर सकता।

पोंडा ने भी दलील दी कि पुलिस ने बंद किये जा चुके मामले को खोला है जिसमें क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गयी थी और उसे रायगढ़ जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 16 अप्रैल, 2019 को स्वीकार कर लिया था।

याचिका में कहा गया है, ‘‘उन्हें एक दुर्भावना से प्रेरित, झूठे और बंद किए जा चुके मामले में गलत और गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया। यह याचिकाकर्ता और उनके चैनल के राजनीतिक उत्पीड़न और प्रतिशोध की राजनीति का एक और प्रयास है।’’

याचिका में दावा किया गया कि मई 2018 में पुलिस ने गोस्वामी और ‘रिपब्लिक टीवी’ के दो वरिष्ठ अधिकारियों के बयान दर्ज किए थे और सूंपर्ण जांच के बाद ही मामला बंद किया गया था।

इसमें यह भी दावा किया गया है कि गोस्वामी की कम्पनी ‘एआरजी आउटलायर प्राइवेट लिमिटेड’ ने अन्वय नाइक की कम्पनी ‘कॉनकॉर्ड डिज़ाइन्स’ को अनुबंध के तहत बकाया राशि का 90 प्रतिशत भुगतान कर दिया था।

याचिका में कहा, ‘‘जुलाई 2019 में, नाइक की कम्पनी के खाते में पूरी बकाया राशि जमा करा दी गई थी, लेकिन खाते के निष्क्रिय होने की वजह से वह राशि हमारे खाते में वापस आ गई।’’

उसने कहा कि याचिकाकर्ता ने पूर्व में पुलिस के साथ पूरा सहयोग किया और आगे भी करते रहेंगे।

केस डायरी और अन्य संबंधित दस्तावेजों पर गौर करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनयना पिंगले ने बुधवार को कहा कि पहली नजर में अभियोजन मृतक और आरोपी व्यक्तियों के बीच संपर्क को साबित करने में असफल रहा।

अदालत ने कहा, ‘‘आरोपियों की गिरफ्तारी के कारणों पर विचार करने और आरोपियों की दलीलें सुनने के बाद प्रारंभिक नजर में गिरफ्तारी गैर कानूनी प्रतीत होती है। ’’

मजिस्ट्रेट ने आदेश में कहा कि अगर पुलिस के मामले को स्वीकार किया जाए तो अन्वय नाइक ने गोस्वामी और दो अन्य आरोपियों द्वारा बकाये का कथित तौर पर भुगतान नहीं करने के कारण यह दुखद कदम उठाया । फिर सवाल उठता है कि उनकी (अन्वय नाइक की) मां कुमोदिनी नाइक ने खुदकुशी क्यों की।

अदालत ने कहा, ‘‘क्या उन्होंने (कुमोदिनी) खुदकुशी की थी? अभियोजन ने इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। पुलिस कुमोदिनी नाईक और अन्वय नाईक तथा गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों के बीच कड़ी साबित करने में नाकाम रही।’’

तीनों आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा कि पुलिस मामले में 2018 में पिछली जांच टीम द्वारा की गयी छानबीन की तथाकथित खामियों का उल्लेख नहीं कर पायी।

मजिस्ट्रेट ने आदेश में कहा कि पुलिस ने 2018 में मामले की जांच की थी और 2019 में संबंधित अदालत के सामने मामले को बंद करने का अनुरोध करते हुए रिपोर्ट सौंपी थी। अदालत ने कहा, ‘‘मजिस्ट्रेट ने 2019 में उस क्लोजर रिपोर्ट को मंजूर कर लिया था।’’

अलीबाग पुलिस ने बृहस्पतिवार को सत्र अदालत के समक्ष एक संशोधित याचिका दायर की जहां कथित आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गोस्वामी को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने संबंधी मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई है।

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