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TIME के 100 शक्तिशाली महिलाओं में अमृत कौर शामिल, आजादी के बाद भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनीं, AIIMS बनाने में जानें इनका योगदान

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: March 6, 2020 17:18 IST

महान स्वतंत्रता सेनानी अमृत कौर आजाद भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं. अमृत कौरन 1947 से 1957 तक भारत की स्वास्थ्य मंत्री रही हैं. इनके ही स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए 1952 में भारत की राजधानी दिल्ली में एम्स की आधारशिला रखी गई है. 1956 में संसद में बने विशेष एक्ट से एम्स का निर्माण शुरू हुआ.

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ठळक मुद्देभारत में अब तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद में सिर्फ अमृत कौर, सुशीला नैय्यर और सुषमा स्वराज ने ही स्वास्थ्य मंत्री का प्रभार संभाला है.ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई करने वाली अमृत कौर 1918 में भारत वापस लौटी थीं, महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया.

प्रतिष्ठित मैगजीन टाइम ने पिछली शताब्दी की दुनिया की 100 शक्तिशाली महिलाओं में अमृत कौर का नाम शामिल किया है। इस लिस्ट में अमृत कौर के अलावा पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का नाम भी शामिल हैं। टाइम ने कौर को 1947 और गांधी को 1976 के लिए वुमन ऑफ द ईयर करार दिया है। 

आजाद भारत के पहले कैबिनेट में शामिल थीं अमृत कौर

अमृत कौर का जन्म पंजाब के कपूरथला के शाही परिवार में 2 फरवरी 1889 को हुआ था। अमृत कौर के पिता ने ईसाई धर्म को अपना लिया था और उनकी मां बंगाली ईसाई थीं। अमृत कौर ने अपने शुरुआती साल कपूरथला में ही बिताए। इसके बाद वह शिक्षा के लिए ब्रिटेन चली गईं। उन्होंने डोरसेट के शेरबर्न स्कूल से पढ़ाई की। स्कूल में पढ़ाई के दौरान वह क्रिकेट और हॉकी भी खेला करती थीं। स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेने से पहले अमृत कौर ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री ली थी। टाइम मैगजीन ने अमृत कौर के बारे में लिखा कि ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई के बाद वह भारत लौटी। यहां महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर अमृत कौर ने स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया। 

आजाद भारत की पहली महिला मंत्री

1947 में आजादी के बाद वह मंत्रिमंडल में जगह बनाने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने 1947 से 1957 तक 10 वर्ष स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार संभाला था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर की स्थापना की थी। देश के बड़े अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों की स्थापना में भी उनका अहम योगदान रहा था।

जानें टाइम ने क्यों शुरू किया 'वुमन ऑफ द ईयर'

'वुमन ऑफ द ईयर' शुरू करने का कारण बताते हुए टाइम ने कहा कि 72 वर्षों तक 'मैन ऑफ द ईयर' दिया गया जो कि हमेशा कोई न कोई मर्द होता था। पिछले 100 सालों में टाइम मैगजीन के कवर पेज का इतिहास देखें तो सिर्फ 18 बार ही महिलाओं को कवर पेज पर जगह मिली है। 

टाइम मैगजीन के कवर पेज में छपने वाली महिलाएं

साल          नाम                                         पहचान

1920  महिलाओं के संघर्ष पर तस्वीर1938  फ्रीडा काल्हो                                  पेंटर1952 क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय                    ब्रिटेन की महारानी1948 एलिनोर रुजवेल्ट                            अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंक रुजवेल्ट की पत्नी1954 मर्लिन मुनरो                                   अभिनेत्री1962 जैकलीन कैनेडी                             अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की पत्नी1970 ग्लोरिया स्टीनेम                               महिला अधिकारों के लड़ने वाली महिला1987-डायना हेडन                                  ब्रिटेन की राजकुमारी1993 टोनी मॉरिसन                                  लेखिका1996 रुथ गिन्सबर्ग                                   वकील1998 जेके रॉलिंग                                     लेखिका1997 एलेन डिजेनर्स                                सामाजिक कार्यकर्ता2003 सेरेना विलियम्स                              टेनिस प्लेयर2004 ओफ्रा विनफ्रे                                  मीडिया मुगल2008 मिशेल ओबामा                               अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की पत्नी2014 बियोंसे                                          मशहूर पॉप गायिका2016 हिलेरी क्लिंटन                            अमेरिकी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार2019 ग्रेटा थनबर्ग                               पर्यावरण कार्यकर्ता

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