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Amarnath yatra: दोहरे खतरे में अमरनाथ यात्रा?, आतंकी निशाने पर, पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा बल मुस्तैद

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: June 28, 2025 14:51 IST

amarnath yatra: सुरक्षा, यात्रा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पर विचार करते हुये यात्रियों पर आतंकियों के हमले का खतरा है।

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ठळक मुद्देआधिकारिक तौर पर यात्रा पर कोई खतरा नहीं माना जा रहा है।3 जुलाई से शुरू हो रही यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।आतंकी अमरनाथ यात्रा को नर्म लक्ष्य के रूप में ले सकते हैं।

जम्मूः ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकियों के निशाने पर टॉप पर आने से अमरनाथ यात्रा चुनौती के रूप में सामने आने लगी है। एक तो मौसम ऊपर से आतंकी खतरा। तीसरे कश्मीर के मृतप्रायः हो चुके पर्यटन में नई जान फूंकने की खातिर यात्रा को पर्यटन बाजार में बदलने के प्रयास। इन सबको मिला आधिकारिक तथा सुरक्षा के मोर्चे पर मिलने वाली चेतावनी यही कहती है कि अमरनाथ यात्रा को खतरों से मुक्त बनाना हो तो इसे पर्यटन बाजार में न बदला जाए क्योंकि आतंकियों के लिए यह नर्म लक्ष्य बन सकती है। इतना जरूर था कि आधिकारिक तौर पर यात्रा पर कोई खतरा नहीं माना जा रहा है।

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने प्रदेश में अमरनाथ यात्रा के पूरे मार्ग को आतंकी हमले के लिहाज से अत्याधिक संवेदनशील घोषित किया है और सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक कदम उठाये जाएं। गृह विभाग ने सभी संबंधित एजेंसियों को कहा है कि सुरक्षा, यात्रा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति पर विचार करते हुये यात्रियों पर आतंकियों के हमले का खतरा है।

यात्रा की संवेदनशीलता और प्रसिद्धि की वजह से यह आतंकवादी हमले के लिहाज से बहुत संवेदनशील है। केंद्र सरकार द्वारा जारी निर्देश में सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों को कहा गया है कि वे इस मामले में सभी नियमों का पालन करें ताकि 3 जुलाई से शुरू हो रही यात्रा की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

वैसे श्राइन बोर्ड ने अमरनाथ यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों लोगों को न्यौता तो दे दिया लेकिन अब वह परेशान हो गया है। उसकी परेशानी का कारण बदलते हालात तो हैं ही बदलता मौसम भी है। अगर हालात की चर्चा करें तो यह परतें उघड़नें लगी हैं कि आतंकी अमरनाथ यात्रा को नर्म लक्ष्य के रूप में ले सकते हैं।

फिलहाल किसी आतंकी गुट की ओर से कोई चेतावनी नहीं मिली है न ही अमरनाथ यात्रा पर किसी संगठन ने प्रतिबंध लगाया है मगर मिलने वाली सूचनाएं प्रशासन को परेशान किए जा रही हैं। बकौल उन सुरक्षाधिकारियों के, जिनके कांधों पर यात्रा का जिम्मा है, इतनी भीड़ को संभाल पाना और सुरक्षा प्रदान कर पाना खाला जी का घर नहीं है।

‘पहले ही आतंकी सभी सुरक्षा प्रबंधों को धत्ता बताते हुए कई बार अमरनाथ यात्रियों पर हमले करने में कामयाब होते रहे हैं। अब अगर इतनी भीड़ होगी तो किस किस को कहां सुरक्षा प्रदान की जाएगी जबकि यात्रा करने वालों को पर्यटक के रूप में सरकार कश्मीर के अन्य पर्यटनस्थलों की ओर भी खींच कर लाने की इच्छुक है,’एक अधिकारी का कहना था। 

इस चिंता में मौसम की चिंता भी अपनी अहम भूमिका निभाने लगी है। मौसम विभाग भी इस बार अभी से चेतावनी जारी करने लगा है कि यात्रा मार्ग पर इस बार मौसम कुछ अधिक ही खराब हो सकता है। हालांकि अभी से इस खराब हो रहे मौसम के कारण यात्रा प्रबंधों में आ रही परेशानियों से प्रशासन अभी से जूझने लगा है तो अमरनाथ यात्रा के दिनों, जब मानसून जवानी पर होगा कैसे संभलेगा लाखों का रेला, कोई जवाब देने को तैयार नहीं है।

सीमा सड़क संगठन की मदद के बिना अमरनाथ यात्रा संभव ही नहीं

इस बार की वार्षिक अमरनाथ यात्रा की सकुशलता के लिए चाहे सुरक्षाबलों की भूमिका अहम मानी जा रही है पर यात्रा को सुखदायक बनाने में सीमा सड़क संगठन अर्थात बीआरओ की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता जिसने न सिर्फ 45 किमी लंबे यात्रा मार्ग की चौड़ाई को 5 फुट से 12 फुट तक कर दिया बल्कि गुफा के द्वार तक वाहनों के आने जाने का रास्ता भी तैयार कर दिया।

बीआरओ ने अपने प्रोजेक्ट बीकन के तहत इन दुर्गम स्थलों पर नाममुकिन कार्य को पूरा कर अपने उस कथन को सच जरूर साबित किया है जिसमें वे कहते हैं कि बीआरओ आसमान तक सड़क तैयार कर सकता है। याद रहे बीआरओ का बीकन प्रोजेक्ट लद्दाख सेक्टर में सीमा सीमा तक सड़के बनाने में भी कामयाब रहा है।

बीआरओ के अधिकारियों ने अमरनाथ यात्रा मार्ग पर मुश्किलों और दुविधाओं की दास्तानें सुनाते हुए इसके प्रति जरूर बताया है कि कैसे कठिन परिस्थितियों में उसने 17 सौ के लगभग स्थानीय श्रमिकों की मदद से बालटाल और पहलगाम के 45 किमी के अमरनाथ यात्रा मार्ग पर रेलिंग लगाने, पुल और पुलियों के निर्माण, सुरक्षा दीवारें बनने और टाइलें बिछाने के कार्य को अंजाम दिया।

सिर्फ यही नहीं अप्रैल के प्रथम सप्ताह में इस यात्रा को संपन्न करवाने का जिम्मा जब उसे सौंपा गया तो उन्होंने करीब 47 किमी के क्षेत्र से बर्फ को भी हटाया और पहली बार बालटाल के रास्ते अमरनाथ गुफा तक वाहनों के चलने लायक मार्ग भी तैयार कर दिया। हालांकि इस वाहन चलने वाले मार्ग को लेकर फिलहाल विवाद भी पैदा हुआ है

लेकिन उप राज्यपाल मनोज सिन्हा कहते थे कि आपात स्थिति में ही इस मार्ग पर वाहन चलाए जाएंगे। दरअसल अमरनाथ गुफा तक वाहन ले जाने का विवाद पिछले साल तब खड़ा हुआ था जब पहली बार बीआरओ के वाहन गुफा तक पहुंचे थे और इस बार प्रथम पूजा के दौरान भी कई प्रायवेट वाहनों के गुफा तक पहुंचने के फोटो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद काफी हो हल्ला मचा तो उप राज्यपाल को इसके बचाव में आना पड़ा था जो अमरनाथ यात्रा की जिम्मेदारी लेने वाले अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के चेयरमेन के पद पर विराजमान हैं।

टॅग्स :अमरनाथ यात्राजम्मू कश्मीर
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