लाइव न्यूज़ :

उत्तराखंड सरकार के यूसीसी बिल पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जताई आपत्ति, कहा- "हम यूसीसी के जरिये लागू किये जा रहे समान नागरिक संहिता से सहमत नहीं हैं"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: February 6, 2024 18:08 IST

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने के बाद कहा कि वो समान नागरिक संहिता को कभी नहीं मानेंगे।

Open in App
ठळक मुद्देऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उत्तराखंड सरकार द्वारा पेश किये यूसीसी विधेयक पर दिया बयानमुस्लिम बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने उठाया 'समान संहिता' पर सवालउन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार को ऐसी किसी समान नागरिक संहिता की कोई जरूरत नहीं थी

लखनऊ: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीबी) ने अपने चार दिवसीय सत्र के दौरान उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किए जाने के बाद कहा कि वो समान नागरिक संहिता को कभी नहीं मानेंगे।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार एआईएमपीएलबी के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने 'समान संहिता' की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए चिंता व्यक्त की कि क्या किसी समुदाय को छूट दी गई है।

उन्होंने कहा, "जहां तक ​​यूसीसी का सवाल है, हमारी राय है कि हर कानून में एकरूपता नहीं लाई जा सकती और अगर आप किसी समुदाय को इस यूसीसी से छूट देते हैं तो फिर इसे एक समान कोड कैसे कहा जा सकता है?"

मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, ''ऐसी किसी समान नागरिक संहिता की कोई जरूरत नहीं थी एआईएमपीएलबी की कानूनी टीम विधानसभा के समक्ष मसौदा पेश होने के बाद इसका अध्ययन करेगी और फिर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।"

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज विधानसभा में यूसीसी बिल पेश कियास जिसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया। इस विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और संबंधित मामलों से संबंधित कानून शामिल हैं।

उत्तराखंड सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने आरोप लगाया कि यूसीसी लागू करने का कदम ध्रुवीकरण का प्रयास है।

असम से कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने कहा, "उत्तराखंड की सरकार ध्रुवीकरण के लिए यूसीसी को विधानसभा में लाई है, लेकिन इसे लागू करना उनके लिए संभव नहीं है। यह कहीं से भी व्यावहारिक नहीं है।"

इस बीच, असम सरकार विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान राज्य में बहुविवाह को समाप्त करने के लिए एक विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। उत्तराखंड कैबिनेट द्वारा समान नागरिक संहिता (यूसीसी) मसौदा रिपोर्ट को मंजूरी दिए जाने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 फरवरी को इस संबंध में एक घोषणा की थी।

सीएम सरमा ने घोषणा की कि राज्य सरकार सक्रिय रूप से उत्तराखंड यूसीसी रिपोर्ट का आकलन कर रही है और आगामी बजट सत्र के दौरान बहुविवाह पर प्रतिबंध पर निर्णय होने की उम्मीद है।

टॅग्स :समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड)उत्तराखण्डपुष्कर सिंह धामीअसम
Open in App

संबंधित खबरें

ज़रा हटकेVIDEO: असम में योगी का बड़ा बयान, 'घुसपैठियों को बाहर करना ही होगा'

पूजा पाठभगवान हनुमान के अवतार माने जाते हैं बाबा नीम करोली?, कैंची में बनाया अपना धाम, हर साल जाते हैं करोड़ों लोग?

भारतVIDEO: चाय बागान से चुनावी हुंकार! पीएम मोदी ने श्रमिकों संग तोड़ी पत्तियां, बोले- असम में NDA हैट्रिक को तैयार

भारतBJP's Assam Manifesto: भाजपा ने असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने और "लव जिहाद" को खत्म करने का वादा किया

भारत40 लाख लखपति बाईदेवियों का सृजन?, ओरुनोदोई योजना के तहत 3000 रुपये?, भाजपा के ‘संकल्प पत्र’ में 31 वादे

भारत अधिक खबरें

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'

भारतउत्तर प्रदेश उपचुनाव 2026ः घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीट पर पड़ेंगे वोट?, 2027 विस चुनाव से पहले सेमीफाइनल, सीएम योगी-अखिलेश यादव में टक्कर?