सोते समय हराते लेना नींद से जुड़ी बीमारियों में से ही एक है। यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है लेकिन खरातीं की वजह से ना केवल आपको पर्याप्त नींद लेने में परेशानी होती है, बल्कि साथ सो रहे लोगों की नींद में भी खलल पड़ता है। आज वर्ल्ड स्लीप डे (World Sleep Day) के मौके पर हम आपको खर्राटों रोकने का एक उपकरण बताने जा रहे हिहं। इसके इस्तेमाल से रातभर आपको खर्राटें नहीं आएँगे और आप आराम से सो सकते हैं। 

मैंडिब्यूलर रिपोजिशनिंग (mandibular repositioning device)

इस उपकरण का नाम है मैंडिब्यूलर रिपोजिशनिंग। इसका इस्तेमाल व्यक्ति के जबड़े के पास होता है। इसे मुंह में लगाने से व्यैक्ति की श्वास की नली में कुछ भी फंसता नहीं है और वह बिना खर्राटों के सो सकता है। यह उपकरण डॉक्टर का परामर्श लेने के बाद मार्केट से लें और आराम से इस्तेमाल करें।

खर्राटों से होने वाले नुकसान

खर्राटों की वजह से रात में नींद पूरी नहीं होती है। नींद ना पूरी होने की वजह से कई सारी दिक्कतें होने लगती हैं। जैसे कि दिनभर में बार-बार नींद आना, सुबह उठने पर सिर दर्द होना, एकाग्रता में कमी आना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आदि परेशानियां धीरे धीरे बढ़ने लगती हैं। लगातार कुछ दिन ये दिक्कतें रहें तो हार्ट अटैक, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर बीमारियाँ व्यक्ति को अपना शिकार बना लेती हैं। 

खर्राटों को रोकने का नेचुरल तरीका

1) शारीरिक वजन और खानपान: कई बार शारीरिक वजन बढ़ने से खर्राटों की समस्या हो सकती है, क्योंकि सोते समय गर्दन के आसपास मौजूद फैटी ऊतक श्वास नली को दबा देते हैं, जिससे सांस को अंदर-बाहर जाने में जगह कम मिलती है और मुंह से आवाज आती है।

2) करवट लेकर सोएं: कई बार कमर के बल सोने से जीभ, ठुड्डी और फैटी ऊतक श्वास नली को दबा देते हैं, जिससे खर्राटे आने लगते हैं। इसलिए कमर के बल सोने की जगह बाएं या दाएं तरफ करवट लेकर सोना चाहिए।

3) धूम्रपान न करें: धूम्रपान करने से आपकी नाक और गले के अंदर का बलगम फूल जाता है। जो कि सांस को अंदर-बाहर आने में परेशानी करता है। जिससे सोते समय खर्राटे आने लगते हैं।

4) नाक को साफ रखें: कई बार लोग अपनी नाक को साफ नहीं करते हैं, जिससे उसके अंदर गंदगी भरती जाती है और सोते समय सांस को अंदर-बाहर आने में परेशानी होती है और इसी वजह से खर्राटे आते हैं।

5) डॉक्टर से परामर्श लें: कई बार खर्राटे आना हृदय या नींद संबंधी परेशानी का संकेत होता है। इसलिए समय रहते अपने अपने डॉक्टर  से परामर्श करना न भूलें,  जिससे आपको समय पर उचित इलाज मिल सके।

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क्या है वर्ल्ड स्लीप डे? (What is World Sleep Day)

हर साल 15 मार्च को दुनिया भर में वर्ल्ड स्लीप डे (World Sleep Day) मनाया जाता है। लोगों को नींद की अहमियत बताने और नींद से जुड़ी परेशानियों के प्रति उजागर करने के मकसद से वर्ल्ड स्लीप कमिटी द्वारा साल का एक दिन गठित किया गया है। इसदिन कमिटी द्वारा खास वर्कशॉप और इवेंट कराए जाते हैं जिसमें नींद से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी दी जाती है। ताकि लोग नींद की जरूरत को समझें और अपने लाइफस्टाइल की ओर ध्यान देते हुए स्वस्थ जीवन बिताएं।

नींद का महत्व

रात में पर्याप्त नींद लेने से हमारा शरीर कई रोगों से बच जाता है। लेकिन यही अगर हम रात में देरी से सोएं और सुबह जल्दी उठ जाएं, नींद पूरी ना करें, तो कुछ ही समय के अन्दर हमारा शरीर विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ जाता है। नींद पूरी ना करने से पाचन तंत्र में कमजोरी, मानसिक रूप से तनाव और यहां तक कि सेक्स लाइफ पर भी बुरा असर पड़ता है। 

जो लोग लंबे समय तक नींद पूरी नहीं कर पाते हैं, उनकी सेक्स लाइफ खराब हो जाती है। जाहिर है नींद पूरी नहीं होने से व्यक्ति चिड़चिड़ापन और थकावट महसूस करता है और इन दोनों चीजों का सेक्स लाइफ से गहरा रिश्ता होता है। थकावट और तनाव की वजह सेक्स इच्छा में भी कमी आ जाती है। व्यक्ति को ऐसा लगता है जैसे उसे अपनी नींद पूरी करनी है और सेक्स की तरफ ध्यान नहीं दे पाता है।

कितनी नींद है जरूरी?

दिल्ली के मशहूर साइकेट्रिस्ट डॉक्टर अभिनव मोंगा के अनुसार, बिस्तर सेक्स और स्लीप के लिए है लेकिन कुछ लोग बिस्तर पर खाना, टीवी देखना, पढ़ाई करते हैं जोकि गलत है। इसलिए बिस्तर को सेक्स और स्लीप के लिए ही इस्तेमाल करें, तो दोनों काम बेहतर तरीके से हो पाएंगे। एक व्यक्ति को रोजाना कम से कम 8 घंटे की नींद लेनी चाहिए।

नींद पूरी नहीं होने से आपको ध्यान लगाने में परेशानी, चिड़चिड़ापन, काम में मन ना लगना, गुस्सा आना, किसी चीज में दिल ना लगना या थकावट होना आदि समस्याएं हो सकती हैं। डॉक्टर के अनुसार, 10 फीसदी लोगों को नींद नहीं आने की समस्या है जिसमें 50 फीसदी लोगों को साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम होती हैं।

नींद नहीं आने के कारण

नींद नहीं के कारणों में काम का बोझ, शिफ्ट, रात के समय चाय या अल्कोहल का अधिक सेवन, डिनर में भारी खाना, जर्नल रूटीन फॉलो नहीं करना शामिल हैं। इनके अलावा कुछ शारीरिक और मानसिक बीमारियां भी कारण बनती हैं जैसे अस्थमा, सांस लेने में दिक्कत, हार्ट डिजीज, माइग्रेन शामिल हैं। लंबे समय तक नींद नहीं आने का सबसे बड़ा कारण  साइकोलॉजिकल प्रॉब्लम होती हैं।

बेहतर नींद के लिए इन बातों का रखें ध्यान

सोने और उठने का टाइम फिक्स करें
हैवी डिनर नी लें 
स्मोकिंग और अल्कोहल से बचें 
शाम को 6 बजे के बाद चाय पीने से बचें 
सोने से 3 घंटे पहले तक हैवी एक्सरसाइज ना करें 
दिन में सोने से बचें 
सोने का कमरा डार्क, कूल और साउंड नहीं होना चाहिए 
सोने से पहले रिलैक्सेशन एक्सरसाइज भी है जरूरी


Web Title: World Sleep Day: Use mandibular repositioning device to get rid of snoring in night, know natural ways to stop snoring
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