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पूर्ण चंद्रग्रहण, ब्लू मून, सुपरमून, दो चमकीले ग्रहों के बेहद करीब आना और चंद्रमा के पीछे बृहस्पति का ओझल होना?, 2026 में कई खगोलीय घटनाएं, देखिए डेटशीट

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 8, 2026 16:31 IST

चंद्रग्रहण को सामान्य आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है और यह रात्रि फोटोग्राफी का भी अच्छा अवसर होता है।

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ठळक मुद्देहर साल की तरह उल्का वर्षा और रात को तारामंडलों की परेड भी देखने को मिलेगी।चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करेगा और लाल या तांबे जैसे रंग का दिखाई दे सकता है।अन्य खगोलीय घटना रविवार, 31 मई को ‘ब्लू मून’ होगी।

टूवूम्बाः वर्ष 2026 में दक्षिणी आकाश में खगोलीय घटनाओं की भरमार रहेगी—अनुकूल समय पर पूर्ण चंद्रग्रहण, ब्लू मून और सुपरमून, दो सबसे चमकीले ग्रहों का एक-दूसरे के बेहद करीब आना और दिन के समय चंद्रमा के पीछे बृहस्पति का ओझल होना खगोलविदों के आकर्षण का केंद्र होंगे। इनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी घटनाएं सामान्य आंखों से देखी जा सकेंगी, यहां तक कि प्रकाश प्रदूषण वाले शहरों में भी। इन खास घटनाओं के अलावा, हर साल की तरह उल्का वर्षा और रात को तारामंडलों की परेड भी देखने को मिलेगी।

हालांकि इन्हें ग्रामीण और अंधेरी जगहों से देखना बेहतर होता है, लेकिन इनमें से कई शहरों से भी दिखाई देंगी। वर्ष की कुछ प्रमुख खगोलीय घटनाओं का विवरण इस प्रकार है। मार्च, मई और दिसंबर में चंद्रमा की हलचल मंगलवार, तीन मार्च की शाम को चंद्रग्रहण होगा। इस दौरान पूर्णिमा का चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करेगा और लाल या तांबे जैसे रंग का दिखाई दे सकता है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को परावर्तित कर चंद्रमा तक पहुंचाता है और यह प्रकाश लाल रंग का होता है—जो दुनिया भर के सूर्योदय और सूर्यास्त की आभा जैसा होता है। चंद्रग्रहण को सामान्य आंखों से सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है और यह रात्रि फोटोग्राफी का भी अच्छा अवसर होता है।

ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्वी हिस्से से देखने पर पूर्ण ग्रहण (जब चंद्रमा पूरी तरह ढक जाएगा) रात 10:04 बजे से 11:03 बजे तक होगा। ब्रिस्बेन में यह समय एक घंटा पहले और पर्थ में तीन घंटे पहले होगा। न्यूजीलैंड के आओतेरोआ से यह आधी रात के तुरंत बाद शुरू होगा। एक अन्य खगोलीय घटना रविवार, 31 मई को ‘ब्लू मून’ होगी।

यह नाम एक ही कैलेंडर माह में दूसरी पूर्णिमा को दिया जाता है। औसतन यह हर दो-तीन साल में एक बार होता है। चंद्रमा से जुड़ी अंतिम प्रमुख घटना बृहस्पतिवार, 24 दिसंबर (क्रिसमस ईव) को ‘सुपरमून’ होगी। इसमें पूर्णिमा उस समय पड़ती है, जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है। इससे चंद्रमा सामान्य से थोड़ा बड़ा दिखाई देता है।

चंद्रमा उदय के समय यह प्रभाव सबसे ज्यादा आकर्षक लगता है, क्योंकि क्षितिज के पास होने पर मस्तिष्क इस आकार को और बड़ा महसूस करता है। अप्रैल, जून और नवंबर में ग्रहों की हलचल होगी 19 से 22 अप्रैल की सुबह तड़के बुध, मंगल और शनि ग्रह आकाश में एक-दूसरे के काफी करीब दिखाई देंगे। इसके लिए पूर्व दिशा की ओर देखना होगा।

मंगलवार, 9 जून और बुधवार, 10 जून की शाम को दो सबसे चमकीले ग्रह —शुक्र और बृहस्पति— आसमान में एक-दूसरे बेहद करीब दिखाई देंगे। मंगलवार, 3 नवंबर को अर्धचंद्र बृहस्पति के सामने से गुजरेगा। यह घटना दिन में होगी, लेकिन दूरबीन से देखी जा सकेगी। ध्यान रहे, दूरबीन को कभी सूर्य की ओर न करें और बच्चों की पूरी निगरानी करें।

इसका समय ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग होगा। सिडनी से देखने पर सुबह 10:40 बजे चंद्रमा का चमकीला किनारा बृहस्पति को ढक लेगा और 11:39 बजे वह अंधेरे किनारे से फिर दिखाई देगा। दिसंबर में उल्का वर्षा होगी दिसंबर के मध्य में सुबह तड़के जेमिनिड उल्का वर्षा देखने का अनुकूल अवसर रहेगा।

यह साल की सबसे बेहतरीन उल्का वर्षाओं में से एक मानी जाती है। यह तब होती है जब पृथ्वी ‘फेथॉन’ नामक एक पथरीले क्षुद्रग्रह द्वारा छोड़े गए धूल के प्रवाह से गुजरती है। जब ये धूल कण पृथ्वी के वायुमंडल में लगभग 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर जलते हैं, तो प्रकाश की चमकदार लकीरें दिखाई देती हैं, जिन्हें उल्का कहा जाता है।

इस वर्ष चंद्रमा आकाश को ज्यादा उज्ज्वल नहीं करेगा, जिससे इन्हें देखने की संभावना बेहतर रहेगी। इस उल्का वर्षा का चरम मंगलवार, 15 दिसंबर की सुबह होने का अनुमान है। उल्काएं देखने के लिए यथासंभव अंधेरी जगह चुनें और उत्तर दिशा की ओर देखें। ये उल्काएं मिथुन (जेमिनी) तारामंडल के कैस्टर तारे के पास एक बिंदु से निकलती हुई प्रतीत होंगी।

जनवरी और दिसंबर होंगे टॉरस तारामंडल के नाम उत्तरी गोलार्ध में दिखाई देने वाले यूरोपीय परंपरा के कई तारामंडलों के नाम प्राचीन काल में रखे गए थे। 18वीं सदी में भूमध्य रेखा के दक्षिण में गए खोजकर्ताओं और खगोलविदों ने शेष अधिकांश तारामंडलों के नामकरण किए। पहले ओरायन, वृश्चिक, दक्षिणी क्रॉस और धनु जैसे तारामंडलों पर चर्चा की जा चुकी है।

2026 के लिए यहां राशि चक्र के तारामंडल वृषभ (टॉरस) का उल्लेख किया जा रहा है। वृषभ को खोजने का सबसे आसान तरीका है—ओरायन की पेटी (बेल्ट) के तीन तारों से नीचे की ओर एक काल्पनिक रेखा खींचना, जो एक चमकीले लाल तारे एल्डेबारन तक जाती है।

एल्डेबारन अंग्रेजी के उल्टे ‘वी’ आकार के तारों के समूह में स्थित है, जो बैल का सिर दर्शाता है—हमारे लिए उल्टा, क्योंकि इसका नामकरण उत्तरी गोलार्ध में किया गया था। इस समूह के अन्य तारे ‘हायडीज़’ नामक तारामंडल का हिस्सा हैं। वृषभ में एक और प्रसिद्ध तारामंडल ‘प्लेयडीज़’ है, जिसे ‘सेवन सिस्टर्स’ कहा जाता है।

यह नाम केवल यूरोपीय परंपरा में ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के फर्स्ट नेशंस सहित दुनिया भर की संस्कृतियों में प्रचलित है। सामान्य आंखों से आम तौर पर इस सघन समूह में केवल छह तारे दिखते हैं, लेकिन दूरबीन से सैकड़ों तारे नजर आते हैं। वर्ष 2025 में खगोलविदों ने पाया कि प्लेयडीज़ में पहले की तुलना में लगभग 20 गुना अधिक तारे हो सकते हैं।

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