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सांस क्यों फूलती है, जानें कारण, लक्ष्ण और उपाय

By लोकमत न्यूज़ ब्यूरो | Updated: October 18, 2018 20:04 IST

लगातार कुछ दिनों तक सांस फूलने की दिक्कत हो तो ये टेस्ट कराने चाहिए- छाती का ऐक्सरे, छाती का एचआर, सीटी, पीएफटी, दिल के लिए डीएसई, खून की जांच।

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सांस फूलने की मुख्य वजह है शरीर को ऑक्सीजन ठीक से न मिल पाना जिस से फेफड़े पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। ऐसे में फेफड़े ऑक्सीजन पाने के लिए श्वसन क्रिया की गति को बढ़ा देते हैं जिस को हम सरल भाषा में सांस फूलना कहते हैं। यदि समय रहते सांस फूलने पर ध्यान नहीं दिया गया तो इस के परिणाम जानलेवा हो सकते हैं।

सांस फूलने के रोकने के 2 उपाय हैं। एक, या तो शरीर की ऑक्सीजन की मांग पूरी करने के लिए बाहर से अतिरिक्त ऑक्सीजन दी जाए, दूसरे, शरीर की ऑक्सीजन की मांग को कम किया जाए।

महत्त्वपूर्ण कारण

सांस फूलने के खासकर अपने देश में 2 मुख्य कारण हैं। एक तो ज्यादा मोटापा व दूसरा शरीर में खून यानी लाल कणों की कमी। अगर ऑक्सीजन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाले रक्तकणों यानी हीमोग्लोबिन की कमी है तो ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होगी।

अपने देश में अधिकांश महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं। काफी संख्या में महिलाएं बच्चेदानी की समस्या व उस से जुड़ी अनावश्यक व अधिक रक्तस्नव (ब्लीडिंग) की समस्या से पीड़ित हैं। देश में अधिकतर बच्चों के जन्म के बीच फासला काफी कम होना भी एनीमिया व सांस फूलने की शिकायत का एक बड़ा कारण है।

1. मोटापा एक अभिशाप

आजकल लोगों की आरामतलबी बढ़ रही है। नियमित सुबह की सैर व व्यायाम का अभाव, शराब व चरबीयुक्त खाद्य पदार्थों का भरपूर सेवन ये दोनों बातें शरीर के मोटापे को तेजी से बढ़ा रही हैं।

अकसर मोटे लोगों को यह शिकायत करते सुना जाता है कि जरा सी सीढ़ी चढ़ने में सांस फूलती है। मोटापे में जरूरी नहीं कि दिल की बीमारी ही हो। समय रहते यदि कुपोषण खत्म कर दिया जाए व मोटापे को नियंत्रित किया जाए तो सांस फूलने की समस्या से छुटकारा मिल सकता है।

2. फेफड़े का रोग, बड़ा कारण

फेफड़े का इन्फेक्शन, जैसे निमोनिया व टीबी सांस फूलने का सब से बड़ा कारण हैं। श्वास नली व उस की शाखाओं में सूजन भी इस का एक कारण है जिसे मेडिकल भाषा में अस्थमैटिक ब्रांकाइटिस कहते हैं। कभी-कभी श्वास नली पर किसी गिल्टी या छाती में ट्यूमर का दबाव भी सांस फूलने का कारण बन सकता है।

अकसर दुर्घटना में छाती की चोट का सही इलाज न होने पर अंदर खून या मवाद जमा हो जाता है और उस से फेफड़ों पर दबाव बनता है। इस से अकसर सांस फूलने के साथसाथ खांसी की भी शिकायत रहती है।

3. दिल के रोग

यदि आप का दिल कमजोर है यानी पिछले हार्टअटैक के दौरान दिल का कोई हिस्सा बहुत कमजोर या नष्ट हो गया है तो ऐसा कमजोर दिल खून व पानी का साधारण भार भी नहीं उठा पाता और सांस फूलने का कारण बन जाता है। ऊपर से अगर मोटापा भी है, तो स्थिति और भी कष्टकारी हो जाती है।

दायीं तरफ का दिल गंदे खून का स्टोरहाउस है जो धड़कन के साथ शरीर के अंगों से आए गंदे खून को फेफड़े की तरफ शुद्धीकरण के लिए भेजता है और फिर यह खून दिल के बाएं हिस्से में इकट्ठा होता है और धड़कन के साथ शरीर के अन्य अंगों में जाता है।

अगर किसी को पैदाइशी दिल की बीमारी है और दिल के अंदर शुद्ध व अशुद्ध खून का आपस में सम्मिश्रण होता रहता है, तो जिस्म में नीलापन दिखता है विशेषकर उंगलियां व होंठ प्रभावित होते हैं और साथ ही, सांस फूलने की शिकायत रहती है।

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आवश्यक जांच

वैसे तो अनगिनत जांचें हैं पर कुछ बहुत जरूरी जांचें सांस फूलने के कारण को समझने व उस के इलाज के लिए आवश्यक हैं, जैसे छाती का ऐक्सरे, छाती का एचआर, सीटी, पीएफटी, दिल के लिए डीएसई, खून की जांच जैसे विटामिन डी की मात्र व ब्लड गैस एनालिसिस आदि।

सांस फूलने पर क्या करें

उस अस्पताल में जाएं जहां आवश्यक जांचों की सुविधा हो। संबंधित जांचों के बाद अगर लगे कि सांस फूलने का कारण फेफड़ा है तो किसी छाती रोग विशेषज्ञ व थोरेसिक सर्जन से सलाह लें। अगर सांस फूलना दिल की वजह से है तो किसी हृदयरोग विशेषज्ञ से सलाह लें। किडनी विशेषज्ञ की राय भी लेनी पड़ती है अगर गुरदे के कारण सांस फूल रही है।    

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