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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बदलाव, एक अप्रैल, 2023 से सभी भुगतान डिजिटल, यूपीआई और स्मार्टकार्ड शुरू

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: November 19, 2022 19:23 IST

दिल्ली एम्सः संस्थान ने नये और पुराने मरीजों के ‘बाह्य रोगी विभाग’ (ओपीडी) पंजीकरण के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एकाउंट (आभा) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का भी फैसला किया है।

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ठळक मुद्देएम्स में सभी भुगतान एक अप्रैल, 2023 से पूरी तरह डिजिटल हो जाएंगे।सभी काउंटरों पर यूपीआई और कार्ड भुगतान के अलावा स्मार्टकार्ड शुरू किया है।राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के ‘स्कैन एवं शेयर क्यूआर कोड’ को स्वीकार किया जा सकेगा।

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में काउंटरों पर ‘यूपीआई’ और कार्ड से भुगतान के अलावा स्मार्ट कार्ड शुरू किये जाने के साथ ही एक अप्रैल, 2023 से सभी भुगतान डिजिटल हो जाएंगे। एम्स ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘ एम्स, नयी दिल्ली ने सभी काउंटरों पर यूपीआई और कार्ड भुगतान के अलावा स्मार्टकार्ड शुरू किया है।

 

एम्स में सभी भुगतान एक अप्रैल, 2023 से पूरी तरह डिजिटल हो जाएंगे।’’ संस्थान ने नये और पुराने मरीजों के ‘बाह्य रोगी विभाग’ (ओपीडी) पंजीकरण के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एकाउंट (आभा) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का भी फैसला किया है।

पंद्रह नवंबर को जारी किये गये कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक इससे एम्स नयी दिल्ली में सभी ओपीडी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के ‘स्कैन एवं शेयर क्यूआर कोड’ को स्वीकार किया जा सकेगा तथा मरीजों को संस्थान में पहुंचने पर उनका जल्दी पंजीकरण हो पाएगा एवं उन्हें क्रम संख्या मिल पाएगी।

मरीजों के वास्ते आभा आईडी बनाने में सहूलियत के लिए सुबह सात बजे से रात दस बजे तक समर्पित काउंटर चलाये जाएंगे और इसके लिए स्मार्ट फोन की जरूरत भी नहीं होगी। यह परियोजना 21 नवंबर से नये राजकुमारी अमृत कौर ओपीडी में प्रयोग के तौर पर शुरू की जाएगी तथा एक जनवरी से सभी ओपीडी में इसे मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।

ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘यह देखा गया है कि एम्स ओपीडी पहुंचने वाले मरीज पंजीकरण के वास्ते लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। कई मरीजों के पास आभा होने के बाद भी पंजीकरण के लिए उनका विवरण हाथ से डाला जा रहा है।’’ उसमें कहा गया है, ‘आभा आईडी की मदद से पंजीकरण के समय ओटीपी में अक्सर देरी हो जाती है।

ओटीपी को दोबारा भेजने की अधिकतम सीमा तीन तय कर दी गयी है।’ ज्ञापन के अनुसार एनएचए के स्कैन एवं शेयर क्यूआर कोड से पंजीकरण के अच्छे नतीजे आये है और अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को भी आसानी हुई है। 

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