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येल, ऑक्सफोर्ड और स्टेनफोर्ड कैंपस भारत में चाहते हैं पीएम मोदी, लाएंगे कानून

By एसके गुप्ता | Updated: October 9, 2020 21:13 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोचते हैं कि वे येल, ऑक्सफोर्ड और स्टैनफोर्ड जैसी विश्‍वस्‍तरीय यूनिवर्सिटी के कैंपस भारत में भी होने चाहिंए। जिससे भारतीयों को इसका अधिक लाभ मिल सके। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि हर साल देश का 7.5 लाख युवा विदेशी विश्वविद्यालयों में शिक्षा के लिए भारत से जाता है।

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ठळक मुद्देछात्र हर साल दूसरे देशों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए 15 अरब डॉलर खर्च करते हैं।इस कानून से देश की शिक्षा नीति को खोलने का काम किया जा रहा है। संसद से पारित कराने के लिए इसे तैयार किया जा रहा है। वहां भाजपा की सरकार का ही बहुमत है।

नई दिल्लीः भारतीय विश्वविद्यालयों से पढ़कर निकले बुद्धिजीवी दुनिया की कई बड़ी कंपनियों के शीर्ष पद पर नियुक्‍त हैं। माइक्रोसॉफ्ट कॉर्प से लेकर गूगल कंपनियां इसके उदाहरण हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोचते हैं कि वे येल, ऑक्सफोर्ड और स्टैनफोर्ड जैसी विश्‍वस्‍तरीय यूनिवर्सिटी के कैंपस भारत में भी होने चाहिंए। जिससे भारतीयों को इसका अधिक लाभ मिल सके। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि हर साल देश का 7.5 लाख युवा विदेशी विश्वविद्यालयों में शिक्षा के लिए भारत से जाता है।

यह छात्र हर साल दूसरे देशों में शिक्षा प्राप्त करने के लिए 15 अरब डॉलर खर्च करते हैं। इस कानून से देश की शिक्षा नीति को खोलने का काम किया जा रहा है। इसके लिए एक कानून भी तैयार किया जा रहा है जो विदेशी विश्वविद्यालयों के संचालन को विनियमित करेगा। संसद से पारित कराने के लिए इसे तैयार किया जा रहा है। वहां भाजपा की सरकार का ही बहुमत है।

पोखरियाल ने कहा हैं कि 'ऑस्ट्रेलिया की सरकार और कुछ विश्वविद्यालयों ने प्रस्ताव में रुचि दिखाई है, वहां बहुत उत्साह था। बहुत जल्द, भारत में कुछ बेहतरीन, विश्वस्तरीय संस्थान होंगे।' भारत को अपने शिक्षा क्षेत्र को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और कॉलेज पाठ्यक्रम और बाजार की मांगों के बीच बढ़ती दूरी को खत्‍म करने की जरूरत है। 

वर्तमान में भारत का शिक्षा क्षेत्र 2020 के वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धा सूचकांक में 132 देशों में 72 वें स्थान पर है, जो देश की प्रतिभा को विकसित करने, आकर्षित करने और बनाए रखने की क्षमता को मापता है हालांकि भारत की कुख्यात ट्रिकी नौकरशाही विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए परेशानी बन सकती है।

क्योंकि इन विदेशी विश्वविद्यालयों को भूमि पाने, शैक्षणिक कर्मचारियों और पर्याप्त बुनियादी ढांचे को प्राप्त करने में काफी परेशानी उठानी पड़ सकती है। इसके लिए सरकार की ओर से विदेशी विश्वविद्यालयों के लुभाने के लिए किस तरह के प्रोत्साहन की पेशकश की गई है। यह जानकारी फिलहाल नहीं दी गई है।

कुछ विश्वविद्यालयों ने पहले ही भारतीय संस्थानों के साथ साझेदारी की है, जिससे छात्रों को भारत में आंशिक रूप से अध्ययन करने और विदेश में मुख्य परिसर में अपनी डिग्री पूरी करने की अनुमति मिलती है। वर्तमान कदम इन विदेशी संस्थानों को स्थानीय भागीदारों के बिना परिसरों की स्थापना के लिए प्रोत्साहित करेगा।

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