लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित 1000 करोड़ रुपए के शाइन सिटी निवेश घोटाले के मुख्य आरोपी राशिद नसीम को दुबई से भारत लाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अफसर दुबई जाने की तैयारी में जुट गए हैं. ईडी के लखनऊ कार्यालय के अफसरों के अनुसार यूएई में कार्यरत विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के जरिए राशिद नसीम को दुबई से भारत लाने की कार्रवाई की जा रही है. जल्दी ही ईडी के उच्चाधिकारी दुबई जाकर राशिद नसीम को भारत लाएंगे. अगले दस दिनों में उसे भारत ले आया जाएगा. इसके बाद राशिद नसीम को रिमांड पर लेकर उसके आर्थिक नेटवर्क से जुड़े लोगों को पकड़ने की कार्रवाई की जाएगी.
ऐसे किया घोटाला गौरतलब है कि बीते सात वर्षों से फरार पांच लाख रुपए के इनामी आर्थिक अपराधी राशिद नसीम को शनिवार को दुबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उसकी गिरफ्तारी ईडी और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के अनुरोध पर हुई है. राशिद नसीम पर आरोप है कि उसने शाइन सिटी ग्रुप के जरिए निवेशकों से लुभावने रिटर्न का वादा करके करीब 1,000 करोड़ रुपए की ठगी की है. उक्त ठगी को लेकर पुलिस उसके और उसकी कंपनियों के खिलाफ 554 एफआईआर दर्ज कर हुई हैं. उसके खिलाफ सबसे अधिक एफआईआर लखनऊ में दर्ज है.कोर्ट के आदेश पर ईडी और ईओडब्ल्यू दोनों एजेंसियां उसके खिलाफ जांच कर रही हैं.
इन एजेंसियों के अधिकारियों के अनुसार, प्रयागराज के जीटीबी नगर में रहने वाले राशिद नसीम ने वर्ष 2013 में शाइन सिटी ग्रुप नाम से कंपनी बनाई. शाइन सिटी ग्रुप ने पॉन्जी और पिरामिड स्कीम चलाकर रियल एस्टेट निवेश, प्लॉट, घर, फ्लैट व अन्य आकर्षक योजनाओं के नाम पर निवेशकों से अरबों रुपए निवेश करवाए. निवेशकों को मोटे मुनाफे का लालच दिया. बाद में निवेशकों को न तो प्लॉट दिए गए और न रिटर्न. वही दूसरी तरफ उसने निवेशकों से जुटाए गए पैसे को विभिन्न फर्जी कंपनियों और अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किया. फिर उसने और उसके भाई आसिफ ने इस फंड का उपयोग जमीन, ऑफिस स्पेस और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स खरीदने में किया.
ऐसे खुला घोटाला रेरा की जांच से इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ. रेरा ने अपनी जांच में पाया गया कि लखनऊ में उसके पास 58 प्लॉट का रजिस्ट्रेशन था, लेकिन 3,000 की बुकिंग दिखाई. रेरा द्वारा पकड़े गए उसके फ़्राड के बाद राशिद नसीम वर्ष 2016 में दिल्ली भाग गया और वहां से वह नेपाल चला गया. वर्ष 2018 उसे और उसके साथियों को नेपाल में पकड़ा गया, लेकिन वहां जमानत पर छूटने के बाद वह वर्ष 2019 में दुबई चला गया. तब से वह दुबई में बैठकर वह भारत में अपने सहयोगियों के माध्यम से गतिविधियां जारी रखे हुए था और ठगी की रकम को विदेशी चैनलों से ट्रांसफर कर रहा था.
वर्ष 2021 में राशिद ने एक ऑडियो जारी कर यह दावा किया था कि सरकार ने उसकी करीब 500 करोड़ रुपए की संपत्ति कब्जे में ली है, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 1,000 करोड़ रुपए है. इस ऑडियो में यह भी कहा गया था कि उसके करीब 300 करोड़ रुपए किसानों और ब्रोकरों के बीच फंसे हैं और रजिस्ट्री विवादों के कारण कंपनी कानूनी उलझनों में फंसी है. राशिद के इस दावे को जांच एजेंसियां ने गलत बताते हुए उनकी सम्पत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की.
इसके साथ ही उसने फरार भाई आसिफ नसीम को प्रयागराज से गिरफ्तार किया था. अब दुबई से राशिद को यहाँ लाकर उसके आर्थिक नेटवर्क का पता लगाया जाएगा. इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि दुबई में वह किन लोगों की मदद से अभी तक गिरफ्तारी से बचा रहा था. नसीम ने ठगी की रकम किस-किस चैनल से विदेश भेजी है इसका भी पता ईडी लगाएगी.
नसीम के खिलाफ हुई कार्रवाई और दर्ज मुकदमे
शाइन सिटी घोटाले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी. बाद में जब उसके खिलाफ एक के बाद एक मामले दर्ज होने लगे तो सभी केस ईओडब्ल्यू को सौंप दिए गए थे. यूपी में दर्ज मुकदमों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की. इस मामले में अब तक 63 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। जिनमें प्रमुख रूप से राशिद नसीम समेत उसका भाई आसिफ नसीम इसे नवंबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था.
इसके अलावा हिमांशु कुमार, मनीष जायसवाल, ज्ञान प्रकाश उपाध्याय, मोहम्मद अकरम, शशि बाला, अभिषेक सिंह, दुर्गा प्रसाद, उद्धव सिंह, अमिताभ श्रीवास्तव, मीरा श्रीवास्तव की गिरफ्तारी हो चुकी है. राशिद नसीम के खिलाफ लखनऊ के गोमती नगर, विकास नगर, बीकेटी, मोहनलालगंज और गोसाईगंज में कई केस दर्ज हैं.इसके अलावा प्रयागराज और वाराणसी में भी कई मामले दर्ज हैं. वाराणसी में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भी हुई थी.
ईडी ने जनवरी 2021 में उसके खिलाफ दर्ज हुई 554 एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी. अब तक ईडी और ईओव्ब्लू ने उसकी कुल 266.70 करोड़ रुपए की संपत्तियां लखनऊ, बाराबंकी, हरियाणा और पटना में जब्त की हैं. लखनऊ के मोहनलालगंज में शाइन वैली सेक्टर 1, जवाहिर सिटी प्रोजेक्ट, कानपुर, प्रयागराज, बाराबंकी और वाराणसी, कौशांबी जैसे शहरों में शाइन सिटी अपने प्रोजेक्ट चला रहा था.