नेपाल के रास्ते बिहार में प्रवेश हो रहे बांग्लादेशी नागरिक?, सीमा पर बढ़ाई चौकसी, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और सीतामढ़ी में 10 वर्ष में मदरसों की संख्या बढ़ी
By एस पी सिन्हा | Updated: January 3, 2026 16:18 IST2026-01-03T16:17:21+5:302026-01-03T16:18:53+5:30
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की ओर से तैयार ताजा रिपोर्ट में भारत-नेपाल सीमा पर कट्टरपंथी गतिविधियां बढ़ने का खुलासा हुआ है।

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पटनाः भारत-नेपाल सीमा पर बिहार मे आए दिन बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। नेपाल को ट्रांजिट रूट बनाकर विदेशी नागरिकों को भारत में अवैध रूप से प्रवेश कराया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेशी नागरिकों के लिए नेपाल सबसे आसान प्रवेश द्वार बन चुका है। नेपाल की वीजा नीति अपेक्षाकृत सरल होने के कारण विदेशी नागरिक पहले वहां टूरिस्ट वीजा पर पहुंचते हैं। इसके बाद सीमावर्ती भारतीय जिलों में सक्रिय एजेंट उन्हें बिना भारतीय वीजा के सीमा पार कराते हैं। जिन्हें बिहार के अलावे देश के अन्य जगहों पर ठिकाने पर पहुंचा दिया जाता है।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की ओर से तैयार ताजा रिपोर्ट में भारत-नेपाल सीमा पर कट्टरपंथी गतिविधियां बढ़ने का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक बिहार से सटी नेपाल के सीमा के साथ वाले क्षेत्र में बड़ी संख्या में मस्जिदें और गेस्ट हाउस उभर आए हैं जिन्हें पाकिस्तान के दावत-ए-इस्लामिया की ओर से फंडिंग मिल रही है।
हाल यह है कि उत्तर बिहार के नेपाल सीमा से सटे मधुबनी, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण और सीतामढ़ी जिले में 10 वर्ष में मदरसों की संख्या बढ़ी है। खासतौर से पूर्वी चंपारण में। नेपाल से सटे रक्सौल, रामगढ़वा, आदापुर, छौड़ादानो प्रखंड के विभिन्न गांवों में छोटे-बड़े 149 मदरसे थे। बीते 10 वर्षो में 16 नए बने हैं।
कुल मदरसों में से मात्र नौ ही निबंधित हैं। इन क्षेत्रों में हिंदुओं के मुकाबले मुस्लिमों की आबादी दोगुनी बढ़ी है। इन इलाकों से सटे नेपाल में स्थिति में ज्यादा बदलाव आया है। वहीं, दोनों देशों की खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल के परसा, बारा और रौतहट जिले में 300 से अधिक मदरसों का निर्माण हुआ है।
इनमें से 45 तो बीते पांच वर्षो के दौरान ही बने हैं। यहां मुस्लिमों की आबादी भी तेजी से बढ़ी है। बताया जाता है कि पश्चिम चंपारण के मैनाटांड़, गौनाहा और सिकटा प्रखंड के अलावा बगहा दो प्रखंड का वाल्मीकि नगर नेपाल सीमा से सटा है। इन इलाकों में मदरसों की संख्या 25 है। इनमें से आठ बीते 10 साल में बने हैं।
मैनाटांड़ प्रखंड के इनरवा बॉर्डर के समीप भारतीय क्षेत्र के गांवों में बीते 10 साल में मुस्लिमों की आबादी दोगुनी हो गई है। वहीं, सिकटा प्रखंड के कठिया-मठिया गांव का हाल भी कुछ ऐसा ही है। अन्य इलाकों में 30 से 35 प्रतिशत मुस्लिम आबादी बढ़ी है। जबकि मधुबनी के जयनगर, बासोपट्टी, लदनिया, हरलाखी, लौकही, मधवापुर प्रखंड में 33 मदरसे हैं। 10 वर्ष पहले इनकी संख्या 20 थी।
सीतामढ़ी के बैरगनिया, परिहार, सोनबरसा, मेजरगंज, सुरसंड में सात मदरसे चल रहे हैं। इसके साथ ही अररिया में सीमा पर भारतीय क्षेत्र में अधिकांश मदरसे एवं मस्जिदों का संचालन या तो ग्रामीणों द्वारा हो रहा है या सऊदी अरब द्वारा भेजे गए धन से हो रहा है। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब की संस्था ऐसे मदरसों की एवं मस्जिदों की सूची अपने पास रखती है।
जरूरत पड़ने पर संचालन में मदद भी करती है। ऐसे मदरसों में नरपतगंज प्रखंड के बड़ा बबुआन, बसमतिया, घूरना, पथराहा, फुलकाहा, सोनापुर, भंगही का आदि के मदरसे एवं मस्जिदें शामिल हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के नरपतगंज इलाके में 20 मस्जिदें, आठ मदरसे हैं। जोगबनी क्षेत्र में 10 मदरसे और 18 मस्जिदें हैं।
भारत-नेपाल सीमा की ताजा स्थिति से अवगत एक अधिकारी ने पहचान नहीं खोलने की शर्त पर बताया कि अभी हाल में एक दो मंजिला गेस्ट हाउस का निर्माण किया गया है जहां, दावत-ए-इस्लामिया के ‘मेहमानों’ को ठहराया जाता है। यहां पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों से आए लोगों को ठहराया जाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि “नेपाल के सीमावर्ती जिले जैसे कि रौताहट, परसा, कपिलवस्तु, सुनसारी और बारा में विदेश फंडिंग हासिल करने वाले मस्जिद-मदरसे भारत विरोधी गतिविधियों के केंद्र बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार तुर्की भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाली इलाके में मस्जिदें और मदरसे बनवा रहा है। इससे भारत की चिंता बढ़ गई है।
नेपाल में तुर्की की मौजूदगी पुरानी है, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में निर्माण कार्य जरूर नया है। तुर्की के गैर-सरकारी संगठन आईएचएच ने नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है। आईएचएच चरमपंथी समूहों से जुड़ा है और इसके बारे में कहा जाता है कि इसे तुर्की सरकार और खुफिया एजेंसियों से पैसे और समर्थन भी मिलता है।
इस्लामी संघ नेपाल (आईएसएन) जैसे स्वदेशी समूहों के साथ अपने गठजोड़ के जरिए आईएचएच ने अल्पसंख्यक मुस्लिम आबादी के लिए मस्जिदों, मदरसों, अनाथालयों और इस्लामी केंद्रों के निर्माण को प्रायोजित किया है। बिहार की सात जिलों से सटी नेपाल की सीमा जनसंख्या संतुलन के लिए संवेदनशील होती जा रही है।
कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी बढ़ी है। मदरसों और मस्जिदों की बढ़ती संख्या भी चिंता का विषय है। खुफिया इकाइयों ने यहां आबादी के बिगड़ते संतुलन को लेकर चिंता जताई है। वर्ष 2016 के बाद नेपाल सीमा से सटे भारतीय क्षेत्र में बिना मान्यता वाले मदरसों की संख्या बढ़ती जा रही है। पुलिस को संदेह है कि ऐसे कई लोग हैं,
जो सीमावर्ती गांवों में रहकर विदेशी नागरिकों को सुरक्षित रास्तों से भारत में दाखिल कराते हैं। बदले में मोटी रकम वसूली जाती है। सूत्रों का दावा है कि अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने के बाद इन विदेशी नागरिकों को पटना, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था पहले से तय रहती है।
वहां उनके ठहरने, काम और पहचान छिपाने तक की योजना बनाई जाती है। बताया जाता है कि बीते 20 दिनों में 18 संदिग्ध बिहार में घुसे हैं। एक खालिस्तानी पकड़ाया है। बिहार नेपाल से 729 किमी लंबी सीमा साझा करता है। यहीं से घुसपैठ होती है, क्योंकि पूरी बॉर्डर खुली है। लेकिन इस बार ड्रोन के जरिए आसमान से घुसपैठियों पर नजर रखी जा रही है।
केंद्र की तरफ से जारी किए गए खुफिया अलर्ट में कहा गया है कि आतंकी संगठन बांग्लादेश के जमात-उल-मुजाहिदीन, हरकत-उल जिहाद अल-इस्लामी और बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी संगठनों के आतंकी नेपाली नागरिकों के रूप में बिहार के रास्ते एंट्री कर सकते हैं।’ पाकिस्तान से तनाव के बीच नेपाल और बांग्लादेश बॉर्डर पर सख्ती बढ़ा दी गई है।
इस संबंध में पूछे जाने पर बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा बलों की चौकियां अलर्ट पर हैं। सुरक्षा कर्मियों को सादे कपड़ों में भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थलों पर तैनात किया गया है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं चेकिंग पॉइंट्स पर सख्ती बढ़ाई गई है।
जिले में स्लीपर सेल के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। उन्होंने बताया कि बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और धार्मिक स्थलों की निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध स्थिति से निपटा जा सके। इसके अलावा, वाहनों की सघन चेकिंग और सीमा पर चेकिंग अभियान को बढ़ावा दिया गया है।
विनय कुमार ने बताया कि बड़ी संख्या में पाकिस्तानी आतंकी डंकी रूट के सहारे पहले अवैध रूप से नेपाल में घुसते हैं। फिर बिहार के रास्ते भारत में घुसने की कोशिश रहती है। कहा तो यह भी जाता है कि कई पाकिस्तानी नागरिकों ने तो नेपाली महिलाओं से शादी कर ली और वहीं बस गए।