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सुप्रीम कोर्ट पहुंची अतीक अहमद की बहन, रिटायर्ड जज की कमेटी से की अतीक और अशरफ हत्याकांड की जांच कराने की मांग

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: June 27, 2023 15:14 IST

बाहुबली अतीक अहमद और अशरफ की बहन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके दोनों भाइयों के पुलिस हिरासत में की गई हत्या की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की कमेटी से या किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से कराने की मांग की है।

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ठळक मुद्देअतीक और अशरफ हत्याकांड का मामला एक बार फिर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट मेंअतीक अहमद और अशरफ की बहन ने सुप्रीम कोर्ट में निष्पक्ष जांच के लिए दायर की याचिका अतीक अहमद और अशरफ अहमद की हत्या प्रयागराज में पुलिस अभिरक्षा में कर दी गई थी

दिल्ली: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पुलिस अभिरक्षा में मारे गये बाहुबली अतीक अहमद और अशरफ की बहन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके दोनों भाइयों के पुलिस हिरासत में की गई हत्या की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की कमेटी से या किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से कराने की मांग की है।

अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद को बीते अप्रैल में मीडिया से बातचीत के दौरान पत्रकार बताने वाले तीन हत्यारों ने बेहद नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी। वारदात के वक्त प्रयागराज पुलिस अपनी कस्टडी में दोनों भाईयों का मेडिकल कराने जा रही थी।

अतीक और अशरफ की बहन आयशा नूरी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा कथिततौर पर चलाये जा रहे फर्जी मुठभेड़, हत्याओं और गिरफ्तारी का शिकार उनका परिवार हुआ है। इसलिए कोर्ट इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज के तहत एक कमेटी बनाकर मामले को देखने की कृपा करें।

आयशा ने अपनी याचिका में कोर्ट से कहा है, “याचिकाकर्ता आयशा नूरी ने 'राज्य-प्रायोजित की गई हत्या' में अपने दोनों भाइयों और भतीजे को खो दिया है, संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वो रिट याचिका दायर करके कोर्ट के सामने पेश हुई हैं, जिसमें एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा इन मामलों की व्यापक जांच की मांग की जाती है।“

इसके साथ ही याचिका में यह आरोप भी लगाया गया है कि मामले में प्रतिवादी पुलिस अधिकारी उत्तर प्रदेश सरकार से मिले पूर्ण समर्थन का आनंद ले रहे हैं, जिसके कारण उन्होंने प्रतिशोध के तहत याचिकाकर्ता के परिवार के सदस्यों को मारने, उन्हें अपमानित करने, गिरफ्तार करने और परेशान करने की छूट मिली थी।

आयशा ने दावा किया गया कि याचिकाकर्ता के परिवार के सदस्यों को "खामोश" करने के लिए राज्य सरकार ने एक-एक सभी सदस्यों को झूठे मामलों में फंसाया है। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से अपील की जाती है कि न्याय के लिए यह आवश्यक है कि एक स्वतंत्र एजेंसी या रिटायर जज की कमेटी मामले की जांच करे। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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