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बजट 2018-2019: किसान से लेकर टैक्स तक, सरकार इन सौगातों से जनता को दे सकती है खुशी

By ऐश्वर्य अवस्थी | Updated: January 3, 2018 16:03 IST

2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से ठीक पहले आ रहे इस बजट के लोकलुभावन होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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साल 2018 का बजट पेश होने में कुछ समय शेष बचा है। जीएसटी के बाद सरकार अपना ये बजट पेश करेगी, जिस कारण से इस बजट पर भी आम जनता की निगाहें टिक गई हैं। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से ठीक पहले आ रहे इस बजट के लोकलुभावन होने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बजट में सरकार का फोकस आम आदमी को कई मोर्चों पर राहत देने पर हो सकता है। मोदी सरकार का जनता को ये आखिरी बजट है इसलिए बजट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

घर खरीदना हो सकता है सस्ता

इस साल के बजट में सबसे बड़ा तोहफा घर खरीदने वालों को मिल सकता है। जिस तरह के संकेत वित्तमंत्री अरुण जेटली पहले दे चुके हैं कि घर खरीदना जीएसटी के अंदर आने वाला है, अगर ऐसा होता है तो लोगों के लिए घर खरीदना आसाना होगा। इसका ऐलान बजट के जरिए जनता को किया जा सकता है। इसकी संभावना इसलिए भी प्रभल है क्योंकि अब कंस्ट्रक्शन मटीरियल पर बिल्डर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल जाता है। जो सरकार न सिर्फ रियल इस्टेट को जीएसटी के तहत शामिल कर सकती है, बल्क‍ि स्टांप ड्यूटी में भी कुछ राहत दे सकती है।

एजुकेशन लोन में लाभ की उम्मीद

एजुकेशन लोन के सस्ते होने के कयास सबसे ज्यादा हैं। एजुकेशन लोन को लेकर मांग की गई है कि इस पर मिलने वाले टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया जाए। सेक्शन 80E के तहत सरकार इस लोन के ब्याज पर टैक्स छूट का फायदा देती है, लेकिन यह फायदा ज्यादा से ज्यादा 8 फाइनेंशियल ईयर तक ही लिया जा सकता है। एजुकेशन लोन को भी होम लोन की तरह कर देना चाहिए। इस बजट में सरकार इस मुनाफे का लाभ जनता को दे सकती है।

एक फीसदी पर मिले कृषि कर्ज

कर्जों को आधार से जोड़ने का सुझाव किसान संगठनों ने बैठक में दिया है ताकि किसी को दोबारा कर्ज ना मिल सके। किसानों की हालत में वित्त वर्ष  2016-17 में 21 फीसदी की गिरावट आई है। देश में कृष‍ि उत्पादों की कीमतें भी नियंत्रण में रहती हैं। सरकार एक्सपोर्ट  को बढ़ावा देने के लिए कुछ अहम फैसले बजट में ले सकती है। इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिये जाने का इंतजाम किया जा सकता है। इसके साथ ही किसान कर्ज माफी पर भी कुछ अहम घोषणा हो सकती है।

ये कदम बजट में उठाए जा सकते हैं

- सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अधिकाधिक कवर करने के लिए मनरेगा पर व्यय बढ़ाना चाहिए- सरकार मनरेगा का बजट बढ़ा सकती है- राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मौजूदा सिंचाई योजनाओं के लिए टॉपअप आ सकता है- सरकार एमएसपी पॉलिसी का रिवीजन भी कर सकती है- रक्षा उत्पादन, रेलवे खुदरा व्यापार और वित्तीय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति पर रोक लगायी जानी चाहिए- गैर संगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय कोष बनाया जाना चाहिए- कृषि से जुड़ी इंडस्ट्री में प्राइवेट निवेश को बढ़ावा दिया जा सकता है- किसानों को कम ब्याज पर उधार दिया जा सकता है

वित्तवर्ष 2018 में कृषि के लिए 1.87 लाख करोड़ का बजट था। वित्तवर्ष 2018 के सरकार ने किसानों को 10 लाख करोड़ की क्रेडिट देने का लक्ष्य बनाया था। पिछले बजट में मनरेगा को 48 हजार करोड़ रुपए दिए गए थे।

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