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निजी बैंकों में प्रबंध निदेशक के लिए 70 वर्ष की आयु सीमा लगायी रिजर्व बैंक ने

By भाषा | Updated: April 26, 2021 19:37 IST

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मुंबई, 26 अप्रैल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने निजी क्षेत्र के बैंकों में प्रबंध निदेशक, मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और पूर्णकालिक निदेशक पद के व्यक्ति के लिए अधिकतम कार्यकाल 15 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष तय की है।

अध्यक्ष एवं गैर कार्यकरी निदेशकों के लिए अधिकतम आयु सीमा 75 वर्ष निधारित की गयी है।

केंद्रीय बैंक ने सोमवार को इस आशय के निर्देश जारी किए। ये निर्देश अध्यक्ष, निदेशक मंडल की बैठकों, निदेशकमंडल की कतिपय समितियों के स्वरूप , निदेशकों की आयु, कार्यकाल और परितोषिकों तथा पूर्णकालिक निदेशकों की नियुक्ति से संबंधित हैं।

आरबीआई आने वाले समय में बैंकों के निदेशन के संबंध में ‘वृहद दिशानिर्देश’ जारी करेगा।

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि समय समय पर सांविधिक अनुमति लेने के साथ किसी एक व्यक्ति को बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी या पूर्णकालिक निदेशक के पर पर 15 वर्ष से अधिक नहीं रखा जा सकता है।

यदि बैंक जरूरी समझता है तो ऐसे व्यक्ति को तीन वर्ष के अंतराल के बाद पुन: उस पर पर नियुक्त कर सकता है। इसके लिए सभी सांविधिक स्वीकृतियां लेनी पड़ेंगी और व्यक्ति को अन्य निर्धारित शर्तें पूरी करनी होंगी।

इस तीन वर्ष की अवधि में वह व्यक्ति बैंक या उसके समूह की किसी अन्य कंपनी के साथ नहीं जुड़ सकेगा।

रिजर्व बैंक ने कहा है कि कोई व्यक्ति 70 वर्ष की आयु हो जाने के बाद निजी क्षेत्र के बैंक में प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी और पूर्णकालिक निदेशक के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता और न ही कोई व्यक्ति इस आयु सीमा के बाद इन पदों पर बना रह सकता है।

कोई गैर कार्यकारी निदेशक एक बैंक में आठ साल से ज्यादा नहीं रह सकता। उसे तीन साल के अंतराल के बाद ही दोबारा ऐसे पद पर रखने का विचार किया जा सकता है।

गैर कार्यकारी निदेशक का परितोषिक वार्षिक 20 लाख रुपये से अधिक नहीं रखा जा सकता है।

बैंकों को बोर्ड स्तर की नियुक्तियों के लिए एक नियुक्ति एवं पारितोषिक समिति (एनआसी) बनानी होगी। इनमें केवल गैर कार्यकारी निदेशक होंगे। इस समिति की बैठक के लिए न्यूनतम तीन सदस्य जरूरी होने चाहिए। एनआरसी की बैठक में उपस्थित सदस्यों में कम से कम आधे सदस्य स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए। इनमें से एक सदस्य बोर्ड की जोखिम प्रबंधन समिति (आएबसीबी) का होना चाहिए।

एनआसी की बैठक की अध्यक्षता कोई स्वतंत्र निदेशक करेगा। रिजर्व बैंक जब और जैसे चाहेगा उसकी समय और उसी के अनुसार एनआसी की बैठक होगी।

बोर्ड की आडिट समिति में भी केवल गैर कार्यकारी निदेशक ही रखे जाएंगे।

बैंक का निदेशक मंडल एक जोखिम प्रबंधन समिति बनाएगा जिसमें बहुमत गैर कार्यकारी निदेशकों का होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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