नयी दिल्ली, 28 जून भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने गो एयरलाइंस के 3,600 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए जमा कराए दस्तावेजों के मसौदे की ‘जांच’ को फिलहाल रोक दिया है।
गो एयरलाइंस (इंडिया) लि. ने खुद को ‘गो फर्स्ट’ के नाम से नए सिरे से ब्रांड किया है। कंपनी ने आईपीओ के लिए दस्तावेज मई में जमा कराए थे। कंपनी आईपीओ से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल अपने कर्ज को चुकाने पर करेगी।
सेबी की वेबसाइट पर डाली गई सूचना के अनुसार गो एयरलाइंस के आईपीओ के लिए नियामक ने अभी अपने निष्कर्ष को रोक लिया है। यह सूचना 25 जून को डाली गई है। किसी कंपनी के आईपीओ को मंजूरी के लिए सेबी की ओर से निष्कर्ष जरूरी होता है।
आमतौर पर नियामक आईपीओ दस्तावेजों पर अपने निष्कर्ष 30 दिन में दे देता है।
मौजूदा नियमों के अनुसार नियामक किसी मामले में अपने निष्कर्ष 30 दिन, 45 दिन या 90 दिन या उससे अधिक दिन तक रोक सकता है।
गो एयरलाइंस के आईपीओ पर निष्कर्ष को रोकने का मतलब है कि कंपनी या बिक्री करने वाले शेयरधारकों की कोई जांच चल रही है। नियामक ने 11 जून को निर्गम के लीड प्रबंधक से कुछ स्पष्टीकरण मांगा था।
सेबी ने आईपीओ पर निष्कर्ष क्यों नहीं दिया है, इसकी कोई विशेष वजहा पता नहीं चली है। एयरलाइन के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘गो एयर को इस बारे में सेबी से कोई सूचना नहीं मिली है।
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