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राष्ट्रमंडल खेलों से पहले होटलों के लिये दिये गये भूखंडों की नीलामी फिर करे नोएडा : न्यायालय

By भाषा | Updated: March 9, 2021 21:37 IST

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नयी दिल्ली, नौ मार्च उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को भूखंडों के लिये पट्टा अनुबंध के क्रियान्वयन को लेकर न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) और निजी कंपनियों के बीच गतिरोध दूर करने के लिये समाधान पेश किया। इसके तहत इन भूखंडों की तीन महीने के भीतर नये सिरे से ई-नीलामी करने का आदेश दिया गया है।

इन भूखंडों पर 2010 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों से पहले पांच और तीन सितारा होटल बनने थे।

न्यायालय ने इन भूखंडों के लिये योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत जो भूखंड होटल बनाने के लिये निजी कंपनियों के पास है, उसे नोएडा के पास वापस भेजा जाएगा। प्राधिकरण इनकी नये सिरे से ई-नीलामी करेगा और इससे जो राशि प्राप्त होगी, उसमें से कंपनियों ने जो राशि जमा की हुई है, उसे ब्याज सहित लौटाया जाएगा।

न्यायाधीश यू यू ललित, न्यााधीश इंदु मल्होत्रा और न्यायाधीश कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा, ‘‘नोएडा गतिरोध में फंसे भूखंडों की तीन महीने में नीलामी करेगा या ई-बोलियां आमंत्रित करेगा....।’’

पीठ ने कहा कि यह पूरी तरह से नोएडा पर निर्भर है कि वह किसी भी मकसद के लिये भूखंडों को एक साथ या फिर अलग-अलग बेचे। इस प्रकार की बिक्री से प्राप्त राशि में से उन याचिकाकर्ताओं को भुगतान बिक्री के तीन महीने के भीतर किया जाएगा, जिन्होंने इसका विकल्प चुना है।

शीर्ष अदालत ने मौजूदा स्थिति को गतिरोध बताया जिसके कारण प्राधिकरण की मूल्यवान संपत्ति अटकी पड़ी है।

पीठ ने कहा, ‘‘इस स्थिति से न तो जनहित का भला हो रहा है न ही नोएडा को समय पर किस्तें मिल रही है।’’

नोएडा ने 2006 में होटल भूखंड आवंटन योजना शुरू की थी। इसका मकसद राष्ट्रीय राजधानी में बड़े खेल आयोजन से पहले होटलों की जरूरतों को पूरा करना था। केंद्रीय खेल मंत्रालय के आग्रह पर, उसने 25 होटलों के निर्माण के लिये भूखंडों को पट्टे पर देने का निर्णय किया था। इसमें से पांच होटल पांच सितारा बनने थे। इसके लिये आरक्षित मूल्य 7,400 प्रति वर्ग मीटर रखा गया था।

बाद में विभिन्न पक्षों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय और फिर शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर कर विभिन्न कारणों से पट्टा अनुबंध रद्द करने का आग्रह किया।

शुरू में उच्च न्यायालय के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले पर पुनर्विचार किया और पाया कि आवंटन सही तरीके से नहीं किया गया तथा नोएडा को पट्टा अनुबंध समाप्त करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने मामले में आरक्षित मूल्य काफी कम होने के आरोप को देखते हुए राज्य सरकार से इस संदर्भ में पुनर्विचार करने को कहा था।

बाद में, निजी कंपनियों की याचिका पर उच्च न्यायालय ने राज्य के पट्टा अनुबंध समाप्त करने के निर्णय को खारिज कर दिया और उसे इस आधार पर पुनर्विचार करने को कहा कि मामले में आवंटियों के पक्ष को नहीं सुना गया था।

राज्य सरकार पट्टा अनुबंध समाप्त करने के रुख पर कायम रही और इससे शीर्ष अदालत में मामला गया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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