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ITR File: आईटीआर फाइल करते समय इस बात का जरूर रखें ध्यान, वरना आ सकता है नोटिस

By रुस्तम राणा | Updated: March 1, 2022 16:10 IST

विदेशी संपत्ति की जानकारी देते समय यदि आपसे कोई चूक होती है तो उसे अघोषित विदेशी आय और संपत्ति मान लिया जाएगा। इसको लेकर आपके ऊपर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के तहत अतिरिक्त कर, ब्याज और दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।

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नई दिल्ली: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है। खासकर कुछ जानकारियों को लेकर, अन्यथा आपको इनकम टैक्स की तरफ से नोटिस भी आ सकता है। दरअसल, कई बार ऐसा होता है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय टेक्सपेयर कुछ जानकारी नहीं दे पाते हैं, जिसके कारण उनका फॉर्म सही नहीं माना जाता है, जिसके कारण उन्हें आयकर विभाग की तरफ से नोटिस आ सकता है। नियम के अनुसार, इनकम टैक्स भरते समय बैंक खातों से लेकर विदेश में किसी भी प्रकार से संपत्ति या होल्डिंग्स की जानकारियां अवश्य देना चाहिए।

ITR भरते समय यह जानकारी देना है जरूरी

अगर आप विदेश में रह रहे हैं और उस देश में कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न में यहां उसे दिखाना जरूरी है। आईटी कानून के तहत, आईटीआर में सभी विदेशी संपत्तियों की रिपोर्ट करने की आवश्यकता है। अगर व्यक्ति वित्तीय वर्ष के दौरान भारत के “निवासी और सामान्य निवासी” के रूप में है। साथ ही ऐसी विदेशी संपत्ति जिसके तहत आईटीआर में टैक्स के लिए पेशकश की गई है तो उसे आईटीआर में यहां दिखाना जरूरी होता है।

इन बातों का भी जरूर रखें ध्यान

आईटीआर भरते समय कुछ अन्य बातों को भी जान लेना आवश्यक है। जैसे अगर कोई टैक्सपेयर है और उसने किसी विदेशी संपत्ति में एक दिन के लिए भी स्वामित्व या लाभार्थी के तौर पर हिस्सेदारी ले रखी है तो भी उन्हें आईटीआर में इसका उल्लेख करना अनिवार्य होगा। ऐसा न पर संपत्ति को अघोषित आय माना जाएगा। ऐसे में उस संपत्ति पर सरकार आपसे 30 फीसदी की दर से टैक्स के साथ ही जुर्माना ले सकती है।

ऐसी संपत्तियों को भी जरूर बताएं

आईटीआर फाइल करते समय जिन विदेशी संपत्तियों के बारे में आपको जानकारी देनी है उनमें आपके विदेशी बैंक खाते, वित्तीय हित, अचल संपत्ति, ट्रस्ट, भारत के बाहर रखी गई कोई अन्य पूंजीगत संपत्ति संपत्तियां आती हैं। विदेशी संपत्ति की जानकारी देते समय यदि आपसे कोई चूक होती है तो उसे अघोषित विदेशी आय और संपत्ति मान लिया जाएगा। इसको लेकर आपके ऊपर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के तहत अतिरिक्त कर, ब्याज और दंडात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। 

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