नई दिल्लीः प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में एमटेक और पीएचडी पाठ्यक्रमों को आईआईटी परिषद की बैठक के बाद नया रूप दिया जाना तय है। अधिकारियों का दावा है कि इन कार्यक्रमों द्वारा प्रदान किए जाने वाले अवसरों का पूरा उपयोग नहीं किया जा रहा है। देश के 23 प्रमुख इंजीनियरिंग संस्थानों की सर्वोच्च समन्वय संस्था, आईआईटी परिषद ने यह निर्णय पिछले वर्ष अगस्त में हुई अपनी बैठक में लिया। यह बैठक दो वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद आयोजित की गई थी। जेईई एडवांस्ड परीक्षा को “एक बेहतर और कम तनावपूर्ण मूल्यांकन” वाला बनाने के उद्देश्य से, आईआईटी परिषद ने परीक्षा को अनुकूल बनाने की संभावना तलाशने की भी सिफारिश की, जिसमें उम्मीदवार की क्षमता के अनुसार प्रश्न वास्तविक समय में स्वतः तैयार किए जाएंगे और उनमें बदलाव किया जाएगा।
परिषद ने आईआईटी में पाठ्यक्रम, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और अनुसंधान पर एआई के प्रभाव पर चर्चा की। बैठक में कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) में हो रही प्रगति के मद्देनजर शिक्षा प्रणाली पर पुनर्विचार को लेकर भी चर्चा हुई। सुझाव दिया गया कि प्रत्येक आईआईटी को अगले 2-3 वर्षों में इंजीनियरिंग शिक्षा को उसी अनुरूप नया स्वरूप देने के लिए ठोस कदम विकसित करने के लक्ष्य पर काम करना चाहिए।
बैठक के सारांश के मुताबिक, “भारत में बी.टेक स्नातकों के एमटेक करने के प्रति अनिच्छुक होने का एक प्रमुख कारण विशेष विषय (स्पेशलाइजेशन) की सीमित उपलब्धता है। दूसरा कारण इंटर्नशिप के अवसरों की कमी है।” परिषद ने एमटेक कार्यक्रमों के लिए उद्योग इंटर्नशिप को एक अनिवार्य घटक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इसमें कहा गया, “काउंसिल ने दोहरे लाभ वाले एम.टेक कार्यक्रम शुरू करने के फायदों पर भी चर्चा की।” उन्होंने सभी आईआईटी को अगले एक वर्ष के भीतर अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं और दृष्टिकोण के अनुरूप एमटेक पाठ्यक्रम को संशोधित या पुनर्रचित करने का निर्देश भी दिया। परिषद ने आईआईटी के पीएचडी कार्यक्रमों को नवाचार, नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इंजन के रूप में पुनः स्थापित करने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया।