2008 में 127 और 2025 में 323?, 17 साल में 196, नए साल पर कश्‍मीर से खुशी वाली खबर?, 'रेड लिस्ट' में शामिल वन्य प्राणी हंगुल?

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: January 3, 2026 13:29 IST2026-01-03T13:28:15+5:302026-01-03T13:29:07+5:30

वन्यजीव संरक्षण विभाग द्वारा संकलित नवीनतम जनगणना डेटा के अनुसार, त्राल संरक्षण प्रजनन केंद्र में लुप्तप्राय कश्मीरी हंगुल की आबादी 2008 में सिर्फ 127 से बढ़कर 2025 में 323 हो गई है। 

Happy news Hangul 127 in 2008 and 323 in 2025? 196 in 17 years New Year Wild animal Hangul included 'Red List' population rises Tral breeding centre | 2008 में 127 और 2025 में 323?, 17 साल में 196, नए साल पर कश्‍मीर से खुशी वाली खबर?, 'रेड लिस्ट' में शामिल वन्य प्राणी हंगुल?

file photo

Highlightsहंगुल भारत की 'रेड लिस्ट' में शामिल वन्य प्राणी है।अर्थ है कि इस जीव की प्रजाति गंभीर रूप से खतरे में है। वन्यजीव संरक्षण के लिए एक सकारात्मक खबर है।

जम्‍मूःजम्मू कश्मीर से कश्मीरी हिरण अर्थात हंगुल से जुड़ी एक अच्छी खबर आ रही है. वन्यजीव विभाग ने कहा कि कई साल बाद इसकी आबादी में कुछ वृद्धि देखी जा रही है। इस खबर ने वन्यजीव प्रेमियों को खुश कर दिया है। वन्यजीव विभाग और कई गैर सरकारी संगठनों के एक हालिया सर्वेक्षण में यह निष्कर्ष निकाला है। हालांकि, अपने सर्वे के रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि हंगुल की बढ़ती आबादी को देखते हुए तत्काल उनकी सुरक्षा और संरक्षण के उपायों को बढ़ाये जाने की आवश्यकता है। हंगुल भारत की 'रेड लिस्ट' में शामिल वन्य प्राणी है।

जिसका अर्थ है कि इस जीव की प्रजाति गंभीर रूप से खतरे में है। जम्मू कश्मीर में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक सकारात्मक खबर है। वन्यजीव संरक्षण विभाग द्वारा संकलित नवीनतम जनगणना डेटा के अनुसार, त्राल संरक्षण प्रजनन केंद्र में लुप्तप्राय कश्मीरी हंगुल की आबादी 2008 में सिर्फ 127 से बढ़कर 2025 में 323 हो गई है। 

अधिकारियों ने बताया कि यह वृद्धि, हालांकि मामूली है, लेकिन पिछले एक सदी में इस प्रजाति में देखी गई भारी और चिंताजनक गिरावट को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है। ऐतिहासिक रिकार्ड बताते हैं कि लगभग 118 साल पहले हंगुल की आबादी लगभग 5,000 थी। लगातार आवास का नुकसान, मानवीय हस्तक्षेप, शिकार और पारिस्थितिक गिरावट ने उनकी संख्या को नाटकीय रूप से कम कर दिया,

जिसके परिणामस्वरूप अंततः इस प्रजाति को गंभीर रूप से लुप्तप्राय घोषित कर दिया गया। दक्षिण कश्‍मीर के वन्यजीव वार्डन सुहैल अहमद बताते हैं कि शिकारगाह, त्राल में हंगुल संरक्षण प्रजनन केंद्र में निरंतर और वैज्ञानिक संरक्षण प्रयासों ने आबादी को स्थिर करने और धीरे-धीरे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अहमद ने बताया कि शिकारगाह त्राल में 2.5 हेक्टेयर में फैला हंगुल संरक्षण प्रजनन केंद्र पूरी तरह से चालू कर दिया गया है। पूरे क्षेत्र को खतरों को कम करने और घुसपैठ को रोकने के लिए पावर फेंस से ठीक से बाड़ लगाया गया है। उनका कहना था कि बेहतर बुनियादी ढांचे ने शिकारियों, आवारा जानवरों और मानवीय हस्तक्षेप से होने वाले जोखिमों को काफी कम कर दिया है,

जिससे लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए एक सुरक्षित और अधिक नियंत्रित वातावरण बना है।  हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि प्राकृतिक वन क्षेत्रों में हंगुल की आबादी अभी भी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। तेजी से शहरीकरण, वन भूमि पर अतिक्रमण, चराई का दबाव, और पर्यटन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण होने वाले व्यवधान ने उनके आवास को खंडित कर दिया है,

जिससे उनका जीवित रहना मुश्किल हो गया है।अहमद के बकौल, हंगुल एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय जानवर है, और लगातार व्यवधान और अन्य पारिस्थितिक मुद्दों के कारण प्राकृतिक वनों में उनकी संख्या बहुत कम है। वे कहते थे कि इस पर काबू पाने के लिए, सरकार ने नियंत्रित परिस्थितियों में उनकी आबादी बढ़ाने के लिए प्रजनन केंद्र स्थापित किया।

जबकि अधिकारियों के अनुसार, दीर्घकालिक योजना यह है कि एक बार जब उनकी संख्या एक स्थायी स्तर पर पहुंच जाएगी और उपयुक्त वन स्थितियों को सुनिश्चित किया जाएगा, तो स्वस्थ हंगुल को संरक्षित प्राकृतिक आवासों में छोड़ दिया जाएगा। वैसे वन्यजीव विशेषज्ञों ने संख्या में वृद्धि का स्वागत किया है,

लेकिन चेतावनी दी है कि कश्मीर के प्रतिष्ठित हिरण के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अभी और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। एक वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारी का कहना था कि 127 से 323 तक की वृद्धि उत्साहजनक है, लेकिन यह अभी भी आनुवंशिक रूप से व्यवहार्य आबादी के लिए आवश्यक संख्या से बहुत कम है।

ब्रीडिंग प्रोग्राम के साथ-साथ मजबूत हैबिटेट प्रोटेक्शन, कम्युनिटी में जागरूकता, और जंगल पर कब्जे के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। हंगुल, जिसे कश्मीर स्टैग के नाम से भी जाना जाता है, जम्मू कश्मीर का राज्य पशु है और इसका बहुत ज्‍यादा इकोलाजिकल और सांस्कृतिक महत्व है।

कंजर्वेशनिस्ट्स का मानना ​​है कि लगातार कोशिशों, साइंटिफिक मैनेजमेंट और लोगों के सहयोग से इस प्रजाति को विलुप्त होने की कगार से बचाया जा सकता है। फिलहाल, त्राल में बढ़ती संख्या कश्मीर के नाज़ुक कंजर्वेशन परिदृश्य में उम्मीद की एक दुर्लभ किरण दिखाती है।

Web Title: Happy news Hangul 127 in 2008 and 323 in 2025? 196 in 17 years New Year Wild animal Hangul included 'Red List' population rises Tral breeding centre

कारोबार से जुड़ीहिंदी खबरोंऔर देश दुनिया खबरोंके लिए यहाँ क्लिक करे.यूट्यूब चैनल यहाँ इब करें और देखें हमारा एक्सक्लूसिव वीडियो कंटेंट. सोशल से जुड़ने के लिए हमारा Facebook Pageलाइक करे