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‘ स्विस बैंकों में रखे ग्राहकों के जमा राशि जरूरी नहीं कि स्विट्जरलैंड में स्थित हों’

By भाषा | Updated: July 20, 2021 22:45 IST

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नयी दिल्ली, 20 जुलाई वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को बताया कि स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने वित्त मंत्रालय को बताया है कि स्विस बैंकों में जमा ग्राहकों का धन जरूरी नहीं कि स्विट्जरलैंड में ही हों बल्कि उनमें विदेशी शाखाओं में भी जमा धन के आंकड़े भी शामिल हो सकते हैं।

स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत स्थित शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम जमा धन सहित भारतीय व्यक्तियों और कंपनियों द्वारा स्विस बैंकों में जमा धन, वर्ष 2020 में बढ़कर 2.55 अरब स्विस फ़्रैंक के 13 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया। भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह राशि करीब 20,700 करोड़ रुपये बनती है।

राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में, चौधरी ने कहा कि हाल में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के संबंध में, स्विस अधिकारियों ने अन्य बातों के साथ यह भी कहा कि एसएनबी रिपोर्ट स्विस बैंकिंग क्षेत्र की एक व्यापक तस्वीर प्रदान करती है और एसएनबी की वार्षिक बैंकिंग सांख्यिकी पर आधारित है।

पिछले महीने, वित्त मंत्रालय ने स्विस अधिकारियों से संबंधित तथ्यों के साथ-साथ वर्ष 2020 में भारतीय व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा जमा किए गए फंड में बदलाव के संभावित कारणों पर उनके विचार के बारे में विवरण मांगा था।

चौधरी ने कहा, ‘‘इन आंकड़ों के लिए, बैंक अपने बैंक कार्यालय और विदेशी शाखाओं के लेखा-जोखा की सूचनाएं देते हैं। इसके अलावा, स्विट्जरलैंड के अधिकारियों ने यह भी बताया है कि स्विस बैंकों के पास ग्राहकों का जमा-धन जरूरी नहीं कि स्विट्जरलैंड में रखा हो हो। ऐस में भारत के निवासियों द्वारा स्विट्जरलैंड में रखे गए धन के विश्लेषण के लिए एसएनबी की वार्षिक रपट का उपायोग नहीं किया जाना चाहिए।’’

एसएनबी डेटा का हवाला देते हुए, पीटीआई ने 17 जून को बताया कि भारत स्थित शाखाओं और अन्य वित्तीय संस्थानों के माध्यम सहित स्विस बैंकों में भारतीय व्यक्तियों और फर्मों द्वारा जमा किया गया धन वर्ष 2020 में 2.55 अरब स्विस फ़्रैंक के 13 साल के उच्च स्तर (20,700 करोड़ रुपये से अधिक) हो गया। जिसमें प्रतिभूतियों और उनकी तरह की योजनाओं के माध्यम से रखी गयी राशि में तेज वृद्धि का बड़ा योगदान है क्यों कि इस दौरान ग्राहक-जमा में गिरावट दर्ज की गयी।

रिपोर्ट के बाद, वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि स्विस अधिकारियों से संभावित कारणों पर उनके विचार के साथ प्रासंगिक तथ्य प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।

स्विट्ज़रलैंड और भारत के बीच कर मामलों में सूचनाओं का स्वत: आदान-प्रदान की व्यवस्था वर्ष 2018 से लागू है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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