लाइव न्यूज़ :

अमेरिका, भारत में एक साथ मौद्रिक नीति को कड़ा किये जाने की शुरुआत को लेकर चिंता: विरल आचार्य

By भाषा | Updated: September 1, 2021 23:22 IST

Open in App

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने बुधवार को कहा कि वह अमेरिका में उदार मौद्रिक प्रोत्साहन से कदम वापस खींचे जाने तथा आरबीआई के मौद्रिक नीति को कड़ा करने की दिशा में आगे कदम बढ़ाने की शुरुआत संभवत: एक साथ होने को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि उच्च विदेशी मुद्रा भंडार को छोड़कर घरेलू स्थिति ठीक वैसी ही है, जैसा कि 2013 में अमेरिका में प्रोत्साहन को वापस लेने के समय वैश्विक बाजारों पर प्रतिकूल असर पड़ा था। आचार्य ने कहा कि भारत में उच्च मुद्रास्फीति, ऊंचा राजकोषीय घाटा और शेयर बाजारों में उछाल ठीक उसी तरह है, जैसे 2013 में था तथा तब देश को ‘पांच नाजुक’ अर्थव्यवस्था वाले देशों में शामिल किया गया था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने पिछले सप्ताह कहा कि केंद्रीय बैंक कोविड संकट से प्रभावित अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिये शुरू की गयी उदार मौद्रिक नीति रुख में बदलाव पर फिलहाल विचार नहीं कर रहा है। इससे घरेलू बाजार को बड़ी राहत मिली।न्यूयार्क में अध्यापन कार्य के लिये आरबीआई से इस्तीफा देने वाले आचार्य ने कहा कि उन्हें इस बात का डर है कि अमेरिका का मौद्रिक प्राधिकरण अचानक से कदम उठा सकता है। इससे भारत जैसे वैश्विक बाजारों से पूंजी की निकासी होगी और 2013 जैसी स्थिति उत्पन्न होगी।उन्होंने एलारा कैपिटल के एक कार्यक्रम में कहा, ‘अगर विदेशी संस्थागत निवेशक पैसा निकालते हैं और फेडरल रिजर्व के बांड खरीद कार्यक्रम में कमी के साथ देश में मौद्रिक नीति कड़ी की जाती है, यह भारत में दो-तीन साल की अधिक नकदी की स्थिति के बाद झटका होगा।’’ आचार्य ने कहा कि देश में मुद्रास्फीति ऊंची है और काफी मात्रा में नकदी है। इससे आरबीआई नीतिगत दर बढ़ाने के लिये बाध्य होगा। आचार्य ने कहा, ‘‘उम्मीद की जानी चाहिये कि चाहे यह झटका भी हो तब भी तंत्र में इस झटके को सहने के लिये तमाम उपाय होने चाहिये। मैं इसको लेकर चिंतित हूं कि मौद्रिक नीति में बदलाव का यह दौर बहुत अच्छा नहीं रहा है। वर्तमान में कुछ शुरुआती स्थितियां उसी तरह की हैं। हमारा उच्च राजकोषीय घाटा है, मुद्रास्फीति ऊंची है और वास्तविक ब्याज दरें नकारात्मक बनीं हुई हैं। ये सभी परिस्थितियां 2013 के समान ही हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारफेडरल रिजर्व की ब्याजदरों में कटौती और उसके वैश्विक प्रभाव को समझिए

कारोबारअमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में की कटौती, क्या भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर? RBI की चिंता..

कारोबारअमेरिका: फेडरल रिजर्व ने प्रमुख ब्याज दर को 5.1 प्रतिशत पर बरकरार रखा, आगे वृद्धि का संकेत दिया

कारोबारबैंक ऑफ जापान ने अल्ट्रा-लो इंटरेस्ट रेट को बरकरार रखने का किया फैसला, कहा- वैश्विक केंद्रीय बैंकों में नहीं होगा शामिल

कारोबार‘भारत की वृहद आर्थिक स्थिति बेहतर, अमेरिका के मौद्रिक प्रोत्साहन उपायों में कमी से निपटने में सक्षम’

कारोबार अधिक खबरें

कारोबारपश्चिम एशिया में 10,000 से अधिक कर्मचारी?, टाटा समूह ने सहायता योजना की शुरू

कारोबारGold Rate Today: 3 अप्रैल 2026 को सोना हुआ सस्ता, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹ 1,50,865 प्रति 10 ग्राम

कारोबारदर्द कोई समझे, रील्स से बर्बादी तक?, कैसे पर्यटक और कंटेंट क्रिएटर्स पंपोर सरसों खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान?

कारोबारईरान में फिर से फंसे सैकड़ों कश्मीरी छात्र?, 7 दिन के लिए बंद अजरबैजान सीमा

कारोबारपाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458.40, केरोसिन दाम 457.80 और डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर?