लाइव न्यूज़ :

शुरुआती पुनरोद्धार के बाद मध्यम अवधि में सुस्त पड़कर 6.5 प्रतिशत रहेगी भारत की वृद्धि दर : फिच

By भाषा | Updated: January 14, 2021 16:41 IST

Open in App

नयी दिल्ली, 14 जनवरी भारतीय अर्थव्यवस्था को कोरोना वायरस महामारी का प्रभाव लंबे समय तक झेलना होगा। फिच रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगले वित्त वर्ष (2021-22) में भारतीय अर्थव्यवस्था 11 प्रतिशत की अच्छी वृद्धि दर्ज करेगी। लेकिन उसके बाद भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर सुस्त पड़ेगी। फिच का अनुमान है कि यह संकट समाप्त होने के बाद भी भारत की वृद्धि दर महामारी से पूर्व के स्तर से नीचे रहेगी।

फिच की रिपोर्ट ‘भारत मध्यम अवधि की सुस्त वृद्धि की राह पर’ में कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष में अच्छी वृद्धि दर्ज करने के बाद वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सुस्त पड़कर 6.5 प्रतिशत रहेगी।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी में फिच रेटिंग्स ने कहा, ‘‘आपूर्ति पक्ष के साथ मांग पक्ष की अड़चनों...मसलन वित्तीय क्षेत्र की कमजोर स्थिति की वजह से भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर महामारी के पूर्व के स्तर से नीचे रहेगी।’’

फिच ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से भारत में मंदी की स्थिति दुनिया में सबसे गंभीर है। सख्त लॉकडाउन और सीमित वित्तीय समर्थन की वजह से ऐसी स्थिति बनी है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अर्थव्यवस्था की स्थिति अब सुधर रही है। अगले कुछ माह के दौरान वैक्सीन आने की वजह से इसे और समर्थन मिलेगा।

‘‘हमारा अनुमान है कि 2021-22 में भारतीय अर्थव्यवस्था 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगी। चालू वित्त वर्ष 2020-21 में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 9.4 प्रतिशत की गिरावट आएगी।’’

फिच रेटिंग्स ने कहा कि कोविड-19 संकट शुरू होने से पहले ही भारतीय अर्थव्यवस्था नीचे आ रही थी। 2019-20 में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 4.2 प्रतिशत पर आ गई थी। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 6.1 प्रतिशत रही थी।

फिच का अनुमान है कि 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहेगी। इससे अगले तीन वित्त वर्षों में यह 6.6 प्रतिशत रहेगी।

फिच ने कहा कि 2021 में कई वैक्सीन आने की उम्मीद में हमने 2021-22 और 2022-23 के लिए अपने वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाया है। 2022-23 के लिए वृद्धि दर के अनुमान को 6 से बढ़ाकर 6.3 प्रतिशत किया गया है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि प्रभावी तरीके से कोविड-19 के टीके को पेश किए जाने की उम्मीद से वृद्धि को समर्थन मिलेगा। ‘‘हालांकि, यह स्वास्थ्य संकट समाप्त होने के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर कोविड-19 के पूर्व के स्तर से नीचे रहेगी।’’

इस महामारी की वजह से देश में 1.5 लाख लोगों की जान गई है। हालांकि, यूरोप और अमेरिका की तुलना में भारत में महामारी की मृत्यु दर कम है, लेकिन आर्थिक प्रभाव कहीं अधिक गंभीर है।

चालू वित्त वर्ष की पहली अप्रैल-जून की तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था में 23.9 प्रतिशत की भारी गिरावट आई थी। वहीं जुलाई-सितंबर की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.5 प्रतिशत नीचे आई थी। इससे एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था मंदी की गिरफ्त में आ गई थी।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

Open in App

संबंधित खबरें

क्राइम अलर्टबेंगलुरु के छात्रों ने ऐशो-आराम की ज़िंदगी के लिए नकली बंदूक से सहपाठी का किया अपहरण, 50,000 रुपये की मांगी फिरौती

भारतसुप्रीम कोर्ट के जज ने युवा वकीलों को रविवार को भी काम करने की सलाह दी

भारतबिहार में अपने निर्णयों के लिए याद किए जाएंगे नीतीश कुमार, नई सरकार के लिए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की होगी बड़ी चुनौती

भारतबिहार के मुख्यमंत्री की घोषणा कल, 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण समारोह, सीएम की रेस में सबसे आगे यह चेहरा

बॉलीवुड चुस्कीपाकिस्तान में US-ईरान बातचीत के बाद, नेटिज़न्स ने पूछा, ‘होटल का बिल कौन भरेगा?’ परेश रावल ने दिया मजेदार जवाब

कारोबार अधिक खबरें

कारोबारदिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवेः 6.5 की बजाय 2.5 घंटे में पहुंचे?, लागत 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये, 340 मीटर लंबी काली सुरंग, जानिए 5 मुख्य बातें

कारोबारApricot Blossom Festival Ladakh: गांव की सैर, बर्फीले रेगिस्‍तान लद्दाख में धूम-धमाका, देखिए तस्वीरें और वीडियो

कारोबारनागपुर मंडल ने किया कमाल, ब्लॉक्स की बेड़ियां तोड़ ‘धड़ाधड़’ दौड़ी ट्रेनें?

कारोबारनागपुर में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस, सिलेंडर की किल्लत नहीं, फिर कतार क्यों?, वाड़ी के अग्रवाल गैस एजेंसी में लगी 2 किमी की लाइन, देखिए तस्वीरें

कारोबारअमेरिका-ईरान वार्ता विफलः कच्चे तेल की कीमत 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल, कीमत में आग