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एएफटीए ने दालों के स्टॉक का बयोरा जुटाने के सरकार के कदम के खिलाफ मोदी को पत्र लिखा

By भाषा | Updated: May 28, 2021 17:59 IST

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नयी दिल्ली, 28 मई व्यापार संघ एएफटीए ने शुक्रवार को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत व्यापारियों, मिल मालिकों और आयातकों के पास रखे दालों के स्टॉक का विवरण एकत्र करने के सरकार के कदम के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है। एएफटीए ने इसे इंस्पेक्टर राज को प्रोत्साहित करने वाला कदम बताया।

दालों की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र ने 18 मई को राज्य सरकारों को सभी आयातकों, व्यापारियों, मिल मालिकों और स्टॉकधारकों को उनके पास मौजूद स्टॉक की मात्रा का खुलासा करने का निर्देश देकर दालों की जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था।

यह कहते हुए कि आवश्यक वस्तु (ईसी) अधिनियम के तहत की गई कोई भी कार्रवाई उद्योग में ‘घबराहट’ पैदा करेगी, दिल्ली स्थित कृषि किसान और व्यापार संघ (एएफटीए) ने कहा, ‘‘यह व्यापार करने में आसान व्यवस्था में बाधा पैदा करेगा और इंस्पेक्टर राज को प्रोत्साहित करेगा। जो इन कठिन समय में व्यापार करने के लिए स्वतंत्रता की आवश्यकता के खिलाफ है।’’

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में संगठन ने कहा है कि सरकार को दालों पर आयात शुल्क कम करने जैसे अन्य उपायों को अपनाना चाहिए। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कोई कार्रवाई देश की जरूरतों को पूरा नहीं करेंगी क्योंकि अन्य दालों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे हैं।

एएफटीए के महासचिव सुनील कुमार बलदेवा ने पत्र में कहा, ‘‘हम आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया मामले को देखें और साथ ही ईसी अधिनियम के तहत स्टॉक को सत्यापित करने के बारे में पुनर्विचार करें ताकि बाजार में किसी भी अन्य व्यवधान से बचा जा सके।’’

दालों का बाजार मूल्य हमेशा सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी के आसपास रहा है। उदाहरण के लिए, मूंग और चना की कीमतें एमएसपी दरों से कम हैं, जबकि अरहर और उड़द की कीमतें एमएसपी से 5-7 प्रतिशत अधिक हैं।

इसके अलावा, इस व्यापार निकाय ने कहा कि महामारी के कारण मंडियां लगातार काम नहीं कर पा रही हैं, जिसके कारण किसानों को मंडियों में इन जिंसों की आपूर्ति करने में ‘मुश्किलों’ का सामना करना पड़ रहा है।

इसमें कहा गया है कि किसान अपनी उपज नाफेड को बेच नहीं पा रहे हैं, जिसके कारण नाफेड अब तक केवल चार लाख टन चना खरीद पाया है, जबकि पिछले साल के इसी सत्र में उसने 21.8 लाख टन की खरीद की थी।

22 मई को हुई बैठक में विभिन्न राज्यों के दलहन व्यापारियों और किसानों से चर्चा के बाद यह पत्र लिखा गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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