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समायोजित सकल राजस्व मामला: वोडाफोन-आइडिया ने न्यायालय में पुनरीक्षा याचिका दायर की

By भाषा | Updated: August 12, 2021 23:56 IST

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नयी दिल्ली, 12 अगस्त संकट में फंसी वोडाफोन आइडिया लि. (वीआईएल) ने उच्चतम न्यायालय में पुनरीक्षा याचिका दायर की है। हाल में समयोजित सकल राजस्व (एजीआर) संबंधित बकाया की गणना में कथित खामियों में सुधार को लेकर दायर याचिका न्यायालय में खारिज होने के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया है।

इसी सप्ताह दायर याचिका में वीआईएल ने कहा है कि यह ‘न्याय की विडंबना’ है कि कंपनी को गणितीय त्रुटियों / चूक पर सवाल उठाने से रोक दिया गया है। जबकि इसकी लागत लगभग 25,000 करोड़ रुपये (मूलधन के 5,932 करोड़ रुपये के साथ ब्याज, जुर्माना और जुर्माना पर ब्याज) बैठ रही है।

वीआईएल ने कहा कि उसके तर्कों को समीक्षाधीन आदेश में खारिज कर दिया गया। इस इनकार के परिणामस्वरूप कंपनी रसातल में जा सकती है और इसका लगभग 27.3 करोड़ ग्राहकों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

कंपनी के अनुसार इसके अलावा व्यापार में जो निवेश किया गया है, उसका नुकसान होगा। साथ ही कर्मचारियों, वितरकों, खुदरा कारोबारियों और स्टोर में काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा।

वोडाफोन-आइडिया से पुनरीक्षा याचिका के बारे में ई-मेल के जरिये प्रतिक्रिया मांगी गयी, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

वीआईएल ने कहा है कि वह केवल दूरसंचार विभाग के लिपिक या गणितीय त्रुटियों को इंगित करना चाह रही है। कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि वह बकाया विवाद मामले को लेकर मुकदमे का कोई दौर शुरू नहीं कर रही है। वह न्यायालय द्वारा समायोजित सकल राजस्व को लेकर तय किये गये सिद्धांतों पर कोई सवाल नहीं उठा रही है। वह न्यायालय के आदेश के मुताबिक पूरा भुगतान करने को लेकर प्रतिबद्ध है।

याचिका मे कहा गया है, ‘‘अगली किस्त 31 मार्च, 2022 को देनी है। ऐसे में पर्याप्त समय है जिसके अंतर्गत किसी भी पक्ष के पूर्वाग्रह के बिना गणतीय त्रुटि को ठीक किया जा जा सकता है।’’

वीआईएल केवल दूरसंचार विभाग को उसकी लिपिकीय अथवा गणतीय गलती को बताना चाहता है। कंपनी का स्पष्ट कहना है कि वह बकाये को लेकर कोई नया विवाद शुरू नहीं करना चाहती है।

उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने पिछले महीने दूरसंचार कंपनियों वीआईएल और भारती एयरटेल की याचिकाएं खारिज कर दी। याचिकाओं में समायोजित सकल राजस्व के आकलन में कथित त्रुटी को दूर करने का आग्रह किया गया था।

हाल में उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला वीअईएल के चेयरमैन पद से हट गये। इससे पहले, उन्होंने कर्ज में डूबी दूरसंचार कंपनी में आदित्य बिड़ला समूह की हिस्सेदारी सरकार को सौंपने की पेशकश की थी।

वोडाफोन आइडिया पर एजीआर मद में कुल देनदारी 58,254 करोड़ रुपये बनती है। इसमें से 7,854.3 करोड़ रुपये उसने भुगतान किये हैं जबकि 50,399.6 करोड़ रुपये बकाये हैं।

कंपनी के ऊपर कुल कर्ज 31 मार्च, 2021 तक 1,80,310 करोड़ रुपये था। इसमें स्पेक्ट्रम मद में आगे के लिये टाली गयी स्पेक्ट्रम भुगतान दायित्व की 96,270 करोड़ रुपये की राशि और बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिया 23,080 करोड़ रुपये का कर्ज शामिल है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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