यूपी में उत्पाती बंदरों का होगा एनकाउंटर! प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने दिए निर्देश
By राजेंद्र कुमार | Updated: April 18, 2026 17:50 IST2026-04-18T17:50:39+5:302026-04-18T17:50:39+5:30
आए दिन बड़ी संख्या में उत्पाती बदरों द्वारा अंजाम दी जाने वाली ऐसी घटनाओं से निजात दिलाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गत 17 फरवरी को शासन को एक कार्ययोजना तैयार करने के आदेश दिए थे.

यूपी में उत्पाती बंदरों का होगा एनकाउंटर! प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी ने दिए निर्देश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बंदरों की लगातार बढ़ती आबादी शहरी क्षेत्रों के साथ ही अब खेतों में भी उत्पात मचा रही है. मथुरा, वृंदावन, अयोध्या, वाराणसी जैसे तमाम धार्मिक शहरों में बंदर श्रद्धालुओं के हाथ से फल के थैले तक छीन कर हर दिन भागते हैं. आए दिन बड़ी संख्या में उत्पाती बदरों द्वारा अंजाम दी जाने वाली ऐसी घटनाओं से निजात दिलाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गत 17 फरवरी को शासन को एक कार्ययोजना तैयार करने के आदेश दिए थे.
अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए प्रदेश सरकार ने मानव और बंदर के संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए जो अंतरिम कार्य योजना तैयार की है, उसमें उत्पाती बंदरों को बंदरों को मारने (एनकाउंटर) की अनुमति देने का भी प्रावधान किया गया है. जिसके चलते अब वन विभाग के शिकारी उत्पाती बंदर को मारने का कार्य करेंगे.
अभी तक राज्य में मनुष्यों-बच्चों पर हमला करने वाली बाघ, तेंदुआ और भेड़िया को ही मरने के लिए वन विभाग के आदेश के बाद उत्पाद करने वाले बाघ, तेंदुआ और भेड़िया को वन विभाग के शिकारी मारते हैं. अब इस सूची में बंदर को भी शामिल किया गया है.
बंदरों के उत्पात को रोकने के लिए बनी कार्य योजना :
प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक व विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी के अनुसार, वन विभाग ने प्रदेश के लोगों को बंदरों के उत्पात और हमलों से राहत दिलाने की अंतरिम कार्य योजना बनाई है. जिसमें तात्कालिक उपायों के तहत विभाग एक महीने के अंदर बंदरों के संघर्ष बाहुल्य वाले क्षेत्रों की पहचान पूरे प्रदेश में की जाएगी.
इसके साथ ही बंदरों की संख्या का आकलन, सूचनाओं के लिए नोडल अधिकारी नामित करने, हेल्पलाइन नंबर जारी करने तथा बंदरों को पकड़ने के माहिर लोगों व संस्थाओं को चिन्हित कर उनका पंजीकरण भी विभाग करेगा. इसी के आधार पर बंदरों के संघर्ष से लोगों को राहत दिलाने की दिशा में कार्यवाही होगी. इसके अलावा दीर्घकालिक उपायों के तहत बंदरों के संघर्ष से अधिक प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर कुछ समय के लिए इन क्षेत्रों में बंदरों को मारने की छूट दी जाएगी.
इस कार्ययोजना के तहत ही प्रदेश के सभी नगर निगमों और नगर पालिकाओं तथा नगर पंचायतों में एक माह में बंदरों से संघर्ष बाहुल्य क्षेत्रों की पहचान करने के साथ ही अन्य कई कदम उठाए जाएंगे. इस संबंध में जारी आदेश में कहा गया है कि बंदरों के उत्पात को रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए.
निरोधात्मक उपायों में जन जागरूकता कार्यक्रम, कूड़ा प्रबंधन, फलों की प्रजातियों का रोपण तथा धार्मिक मान्यताओं से बंदरों को खाने की वस्तुएं देने वाले लोगों के लिए नगरीय निकायों द्वारा स्थानों का चयन कर लोगों को सूचित किया जाए. जबकि दीर्घकालिक उपायों में बंदरों के प्रजनन दर को सीमित करने का प्रयास किए जाएंगे.
इसके अलावा कुछ विशेष परिस्थितियों में पकड़े जाने वाले बंदरों को रेस्क्यू सेंटर में आजीवन रखना तथा बंदरों के अत्यधिक संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर सीमित अवधि के लिए इन क्षेत्रों में बंदरों को पीड़ित जंतु घोषित कर उन्हें मारने की छूट प्रदान करना शामिल किया है.
सुनील चौधरी के अनुसार, मानव वन्य जीव संघर्ष में शामिल बंदरों को पकड़ने की कार्ययोजना के अनुश्रवण के लिए जिलों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है. पकड़े गए बंदरों को उसी जिले में स्थित वन क्षेत्र में छोड़ने को प्राथमिकता दी जाएगी. वन क्षेत्र उपलब्ध नहीं होने पर अन्य वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा.
सभी डीएफओ (प्रभागीय वनाधिकारियों) और प्रभागीय निदेशकों को बंदरों से प्रभावित क्षेत्रों में कार्य योजना के मुताबिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं.