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Basant Panchami 2026: नवचेतना और नवसृजन का पर्व है बसंत पंचमी

By नरेंद्र कौर छाबड़ा | Updated: January 23, 2026 05:54 IST

Basant Panchami 2026 Date: बसंत ऋतु में प्रकृति के भीतर एक नवचेतना, नवसृजन प्रस्फुटित होता है. पेड़ों पर नए पत्ते, नए फूल आने लगते हैं, पूरी प्रकृति रंग-बिरंगे फूलों से सुगंधित होती है.

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ठळक मुद्देकहीं बहुत अधिक ठंड तो कहीं बहुत अधिक गर्मी. संसार के किसी भी देश में इतनी ऋतुएं नहीं होतीं. भारतवासी बड़े भाग्यशाली हैं जो छह ऋतुओं का आनंद उठाते हैं.

Basant Panchami 2026 Date: बसंत पंचमी ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है अर्थात इस समय से बसंत बहार का आगमन होता है. दो माह तक कड़ाके की ठंड के बाद प्रकृति में परिवर्तन आने लगता है और मौसम खुशनुमा होने लगता है. हम भारतवासी बड़े भाग्यशाली हैं जो छह ऋतुओं का आनंद उठाते हैं. संसार के किसी भी देश में इतनी ऋतुएं नहीं होतीं. कहीं बहुत अधिक ठंड तो कहीं बहुत अधिक गर्मी. बसंत ऋतु में प्रकृति के भीतर एक नवचेतना, नवसृजन प्रस्फुटित होता है. पेड़ों पर नए पत्ते, नए फूल आने लगते हैं, पूरी प्रकृति रंग-बिरंगे फूलों से सुगंधित होती है.

उत्तर भारत में सरसों की लहलहाती फसल पीली चादर सी महसूस होती है. पीला रंग सुख-समृद्धि का प्रतीक है इसलिए बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाता है. हर दो महीने के बाद हमारे यहां मौसम बदलने के साथ-साथ पर्व त्यौहार भी मनाए जाते हैं. बसंत ऋतु के आने पर बसंत पंचमी मनाई जाती है. हर त्यौहार की तरह इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है.

कहा जाता है कि जब ब्रह्माजी ने सृष्टि को रचा तो उसमें कोई जान नहीं थी. उसमें जान भरने और सुव्यवस्थित करने के लिए देवी सरस्वती का जन्म हुआ. उन्होंने अपनी वीणा बजाते हुए संसार में मधुर स्वर भर दिया. इंसान के अंदर वाक्‌ शक्ति आने लगी और जीवन के अंदर विद्या का महत्व महसूस होने लगा. सरस्वती को विद्या की देवी कहा जाने लगा और बसंत पंचमी पर उनका जन्म दिवस मनाया जाने लगा.

मां सरस्वती का वरदान जिन्हें प्राप्त हो जाए उन्हें विद्वान माना जाता है. मां सरस्वती का रूप दिव्य है. श्वेत वस्त्र धारी अर्थात स्वच्छता, पवित्रता का प्रतीक, हंस जिनका वाहन है इसलिए उन्हें हंस वाहिनी भी कहा जाता है. हंस में परखने की, निर्णय लेने की शक्ति जबरदस्त होती है इसलिए वह नीर क्षीर को अलग कर देता है.

मां सरस्वती का एक हाथ वरदहस्त के रूप में दिखाया जाता है अर्थात सभी को सहजता से वरदान प्रदान कर देती हैं. लेकिन इसके लिए मन की स्थिति बहुत निर्मल और पवित्र रखनी पड़ती है.  देवी सरस्वती के एक हाथ में  ज्ञान के ग्रंथ हैं जो उनके भीतर के आध्यात्मिक ज्ञान, विद्या के प्रतीक हैं. उनके एक हाथ में माला दिखाई जाती है जो इस बात का प्रतीक है कि निरंतर हम परमात्मा से जुड़े रहें तो उनके वरदान प्राप्त होते रहेंगे. अपनी वीणा के माध्यम से उन्होंने संगीत की उत्पत्ति की थी इसलिए उन्हें संगीत की देवी भी कहा जाता है.

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती देवी की पूजा-आराधना की जाती है. बसंत पंचमी के दिन बिना कोई मुहूर्त देखे सभी अच्छे कार्यों की शुरुआत की जा सकती है. इसीलिए इस दिन खूब शादियां भी होती हैं. बसंत ऋतु उल्लास, आनंद की ऋतु है तथा सब प्रकार से निर्दोष है.

टॅग्स :बसंत पंचमीमां लक्ष्मी
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