Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार भोजशाला में आज एक साथ सरस्वती पूजा और नमाज, कड़ी सुरक्षा के इंतजाम
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 23, 2026 09:48 IST2026-01-23T09:48:23+5:302026-01-23T09:48:37+5:30
Dhar Bhojshala: बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण, हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों ने उस स्थान पर पूजा करने का दावा किया था।

Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार भोजशाला में आज एक साथ सरस्वती पूजा और नमाज, कड़ी सुरक्षा के इंतजाम
Dhar Bhojshala: वसंत पंचमी के मौके पर शुक्रवार को धार के भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर में सूर्योदय के बाद से हिंदू समुदाय की पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। हिंदू त्योहार और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने के मद्देनजर इस शहर में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। ऐतिहासिक धार शहर में 11वीं सदी के विवादित परिसर में सूर्योदय के बाद से ही श्रद्धालुओं के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया था।
#WATCH धार (मध्य प्रदेश): भोजशाला में वसंत पंचमी समारोह चल रहा है।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 23, 2026
भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने कहा, "पूजा सूर्योदय से चालू हो गया है और दिनभर आज पूजा चलेगी क्योंकि हिंदू समाज का आह्वान था कि आज अखंड पूजा चलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अखंड पूजा होने की मोहर लगा दी है इसलिए… pic.twitter.com/3s6YHS4wao
स्थानीय संगठन 'भोज उत्सव समिति' के सदस्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वाग्देवी (सरस्वती) का चित्र स्थापित करके पूजा शुरू की। इस दौरान हवन कुंड में आहुति डाल कर अखंड पूजा (पूजा का लगातार चलने वाला क्रम) की शुरुआत की गई। पूजा स्थल को फूलों की मालाओं और भगवा झंडों से सजाया गया था। इस वर्ष वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण दोनों समुदायों ने विवादित परिसर में पूजा-अर्चना और नमाज के लिए दावा किया था।
स्थिति को देखते हुए उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को हस्तक्षेप किया और समय-विभाजन का स्पष्ट फॉर्मूला तय किया। शीर्ष अदालत ने विवादित परिसर में वसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है। भोजशाला को लेकर विवाद शुरू होने के बाद एएसआई ने सात अप्रैल 2003 को एक आदेश जारी किया था।
इस आदेश के अनुसार की गई व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।