केंद्र के हलफनामे के अनुसार राज्यों का तो बाद में, पहले अब तय हो जाए कि एनसीएम (राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग) एक्ट के अंतर्गत केंद्र को प्राप्त आधिकार संवैधानिक रूप से वैध है या नहीं।
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लिट्टे का सफाया करने के बाद महिंदा राजपक्षे चीन की गोद में बैठ गए थे. उन्हें लगता था कि लिट्टे की जड़ें तमिलनाडु में हैं इसलिए भारत समर्थन नहीं देगा.
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अगर माना जाए कि कार्रवाई राजनीतिक निर्देश पर की जाती है, तब भी केंद्रीय एजेंसियां चुपचाप अपना होमवर्क करती हैं और सबूत मिलने के बाद ही कार्रवाई करती हैं.
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वायु प्रदूषण स्वास्थ्य पर गंभीर असर तो डाल ही रहा है. साथ ही इससे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को भी बहुत बड़ी चोट पहुंचती है. भारत जैसे देश के लिए वायु प्रदूषण संकट की आर्थिक लागत सालाना 150 अरब डॉलर से भी ज्यादा हो सकती है.
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इमरान खान के खिलाफ माहौल बनाने में पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक स्थिति भी एक बड़ा कारण है. यूक्रेन युद्ध से ठीक पहले इमरान की रूस यात्र से अमेरिका भी बौखला गया और उसे लगा कि इस आदमी का अब सत्ता में रहना अमेरिका के हित में बिल्कुल ही नहीं है.
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पिछले साल 4 दिसंबर को नगालैंड के मोन जिले में फौज की गोलीबारी से 14 लोगों की मौत हो गई थी। इस दुर्घटना ने उक्त कानून की वापसी की मांग को काफी तेज कर दिया था।
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बसपा सुप्रीमो मायावती की बातें एक ऐसे सेनापति की याद दिलाती है, जो शिकस्त के बावजूद कहता रहे कि उसकी रणनीति तो बहुत लाजवाब थी, लेकिन क्या करे, शत्रुसेना का हमला ऐसा विकट था कि वह धरी की धरी रह गई।
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कालमान या तिथि-गणना किसी भी देश की ऐतिहासिकता की आधारशिला होती है. किंतु जिस तरह से हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं को विदेशी भाषा अंग्रेजी का वर्चस्व धूमिल कर रहा है, कमाबेश यही हश्र हमारे राष्ट्रीय पंचांग, मसलन कैलेंडर का भी है.
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विशेषज्ञों के अनुसार तीसरा विश्वयुद्ध होने पर आसमान से सारे सैटेलाइट नीचे गिर जाएंगे। जंगल जलकर राख हो जाएंगे और दुनिया में न्यूक्लियर विंटर की शुरुआत हो जाएगी।
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