भारतीय संविधान का आर्टिकल 19(1)(ए) फ्रीडम ऑफ स्पीच को सुनिश्चित करता है। मीडिया को यह अधिकार है कि वह उन सभी बातों को रिपोर्ट करे जो पब्लिक डोमेन में हैं। लोगों को जानकारी देना उसका न केवल अधिकार है बल्कि दायित्व भी है। निश्चय ही बंबई उच्च न्यायालय क
...
मौजूदा दौर में आप किसी भी राजनेता के बेटे-बेटियों से बात कीजिए, अधिकांश को न भारत की आजादी का इतिहास पता होगा, न ही वे संविधान की विकास गाथा जानते होंगे और न ही निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में अपने कर्तव्यों से वे परिचित होंगे।
...
जरूरी यह है कि भारत के बच्चों को संस्कृत, उनकी उनकी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी 11 वीं कक्षा तक अवश्य पढ़ाई जाए। इसके बाज उन्हें छूट हो कि वे अंग्रेजी या अन्य कोई विदेशी भाषा पढ़ें.
...
एक ओर सरकार में खाली पदों को पर्याप्त गति से नहीं भरा जा रहा. वहीं जहां रिक्तियां भरी भी जा रही हैं, वो ज्यादातर संविदा के आधार पर ही हैं. ये भी बेरोजगारी की समस्या को बढ़ा रहा है.
...
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें 2002 के गुजरात दंगे के मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 59 लोगों को विशेष जांच दल (एसआईटी) से मिली क्लीन चिट को चुनौती दी गई थी. साथ ही कोर्ट ने काफी तल्ख टिप्पणियां भी की।
...
अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात पर प्रतिबंध लगा दिया है. अमेरिका में इस फैसले की जमकर आलोचना हो रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने तो इस फैसले को 'भयंकर' बताया है.
...
14th BRICS Summit 2022: इस पर जानकारों का मानना है कि चीन ब्रिक्स पर अपनी पकड़ बनाने के लिए इसका विस्तार चाहता है. वह कुछ दक्षिण पूर्वी एशियाई, अफ्रीकी और लातीनी अमेरिकी देशों को साथ मिलाकर ब्रिक्स का संतुलन अस्थिर करना चाहता है.
...
अभी हाल ही में राज्यसभा से गुलाम नबी आजाद की विदाई के वक्त गौरवपूर्ण वाक्यों का उपयोग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रो पड़े थे। सम्मान, प्रेम और सहयोग के ऐसे और भी ढेर सारे उदाहरण हैं। लेकिन बदलते वक्त में राजनीति के रिश्ते भी क्षतिग्रस्त हो रहे
...
Jammu and Kashmir: गिलगित-बाल्टिस्तान भारत के जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है, हालांकि यह आजादी के बाद से पाकिस्तान के कब्जे में है. पाकिस्तान ने इस इलाके के विकास पर कभी भी ध्यान नहीं दिया, जिससे यह आज भी उपेक्षित और अविकसित है.
...
असम में प्राकृतिक संसाधन, मानव संसाधन और बेहतरीन भौगोलिक परिस्थितियां होने के बावजूद यहां का समुचित विकास न होने का कारण हर साल पांच महीने ब्रह्मपुत्र का रौद्र रूप होता है जो पलक झपकते ही सरकार व समाज की सालभर की मेहनत को चाट जाता है।
...