राजनीति की तासीर ही ऐसी है कि वह कभी शांत नहीं बैठती. जो सत्ता में है और जो सत्ता से बाहर है, वे दोनों ही जाल बुनते रहते हैं. किसके जाल में कौन फंसा, यह पूरी तरह से राजनीतिक पैंतरे और चतुराई पर निर्भर करता है. इस वक्त बड़ा सवाल है कि क्या शिंदे के बा
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे अपने ब्लाग में कहते हैं कि पहली ही मुलाकात में मुझे जवाहर लाल जी भा गए थे। उनका स्वभाव मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने सोचा, ‘इस आदमी में कुछ बात है’।
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महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल में जिस भी विभाग का दायित्व उन्हें सौंपा गया, उसमें उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। उद्योग, ऊर्जा, सिंचाई, खाद्य व नागरिक आपूर्ति, स्वास्थ्य, नगरविकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालते हुए उन्होंने सत्ता का इस्तेमाल आम जनता के लिए किया।
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शिवराज पाटिल का ब्लॉग: सभी के साथ बराबरी में विश्वास रखने वाले किसी को कभी नहीं कहते थे कोई अपशब्द, जवाहरलाल दर्डा कांग्रेस के विचार धारा से थे काफी प्रभावित
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इंदिराजी ने मुझसे कहा, 'दर्डाजी पर बात छोड़ दो, सब ठीक हो जाएगा।' उस समय के कांग्रेस के जनरल सेक्रेटरी बैएआर अंतुले ने दर्डाजी को फोन लगाया। चुनाव का फॉर्म भरने के लिए तीन दिन शेष थे। मैं तुरंत नागपुर होते हुए यवतमाल पहुंचा। नौजवान था। दर्डाजी से मिल
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महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में 17 वर्ष रहने के बाद भी बाबूजी ने सरकार, मंत्री पद और पत्रकारिता में घालमेल होने नहीं दिया। राष्ट्रीय विचार प्रवाह तथा सामाजिक दायित्व के निर्वहन की सीख उन्होंने बापूजी अणे से ली और उस पर अंत तक अडिग रहे।
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जब इंदिरा गांधी संकट में थीं, तब विदर्भ में बाबूजी उनके साथ डटकर खड़े थे। इंदिराजी के लिए उन्होंने पूरा विदर्भ छान डाला। 'लोकमत' के माध्यम से उन्होंने इंदिराजी तथा कांग्रेस के विचारों को घर-घर तक पहुंचाया। इससे महाराष्ट्र में नए राजनीतिक इतिहास का नि
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भारत में चिकित्सक दिवस मनाने की शुरुआत साल 1991 में हुई थी. पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री और जाने-माने चिकित्सक रहे डॉ. बिधान चंद्र रॉय के सम्मान में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई।
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आपको बता दें कि रूस और यूक्रेन के बीच यह युद्ध नहीं लड़ा जा रहा बल्कि यह नई विश्वव्यवस्था में नए जियो-पॉलिटिकल और जियो-इकोनॉमिक हितों को लेकर लड़ा जा रहा है।
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