21 अप्रैल 1947 को भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने दिल्ली के मेटकाफ हाउस में प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पहली बैच को संबोधित करते हुए उन्हें देश का स्टील फ्रेम कहा था.
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जनप्रतिनिधि तीस लाख से भी अधिक मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करता हो और कोई एक, दो या तीन लाख लोगों के ही वोटों से चुना जाता हो तो इसे किसी भी हालत में तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता.
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आज राजशाही नहीं होने के बावजूद, सत्ताधीशों की राजदरबारियों की तरह चाटुकारिता किए जाने की बात तो समझ में आती है, किंतु आम नागरिकों को बरगलाने से किसी का क्या फायदा हो सकता है?
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इसी रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले एक दशक में पृथ्वी की सतह का औसत तापमान पूर्व औद्योगिक काल की तुलना में लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और मौजूदा उत्सर्जन दर को देखते हुए हम 2030 तक यह वृद्धि 1.5 डिग्री के पार कर लेंगे.
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इसमें दिल्ली में नि:शुल्क बंगले, आजीवन यात्रा विशेषाधिकार, एक कार्यकाल के बाद पेंशन, सुरक्षा, कर्मचारी और बुनियादी ढांचे का विस्तार भी जोड़ दें, तो पांच वर्षों में कुल खर्च आसानी से 40-50 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है.
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दिल्ली हाईकोर्ट ने हरिराम सिंह बनाम रिजर्व बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (18 नवंबर, 2024) के केस में फिशिंग (वॉयस फिशिंग) के जरिये हुए साइबर फ्रॉड में उपभोक्ता को पूरी रकम नौ प्रतिशत ब्याज और 25000 रुपए खर्च के साथ देने का आदेश दिया था.
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एक अनुमान के अनुसार दुनिया भर की झीलों और जलाशयों में प्रति वर्ग किलोमीटर लाखों की संख्या में माइक्रोप्लास्टिक कण तैर रहे हैं, जो पानी के साथ-साथ हमारी खाद्य श्रृंखला का हिस्सा बन चुके हैं.
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